उपन्यासों के कवर पर सेक्स के खिलाफ जंग

  • 21 जनवरी 2013
Image caption एक कवर पर छपी तस्वीर की नकल करते जिम हाईंज़.

विज्ञान से जुड़े काल्पनिक उपन्यासों के जिल्द पर अक्सर आपने देखा होगा कि बेहुदा तरीके से कम कपड़े पहने हुई एक महिला को दिखाया जाता है.

ये तरीका पुरुषों को लुभाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन यही तरीका कई अन्य महिला पाठकों को उपन्यास से दूर धकेल देता है.

लेन्सी गैरिसन एक ऐसे उपन्यास लेखक से मिलवाने जा रही हैं जो लिंग के आधार पर महिलाओं को एक खास छवि से साथ पेश किए जाने के भेदभाव को खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं.

इस तस्वीर में जिम हाईंज़ ने एक उपन्यास के कवर की नकल कर एक संदेश देने की कोशिश की है.

लेकिन मिशन कोई भी हो जिम हाईंज़ अंग प्रदर्शन करना भी नहीं भूलते. जंग जीतने के साथ-साथ हाईंज़ को अंग प्रदर्शन करने का भी हक है, ठीक कहा ना?

काल्पनिक उपन्यास लेखक हाईंज़ इस तस्वीर में कुछ उपन्यासों के जिल्द पर छपने वाली महिलाओं के अंदाज़ में नज़र आते हैं. हाईंज़ कहते हैं कि इस तरह के उपन्यासों में महिलाओं को उपभोग की वस्तुओं की तरह पेश किया जाता है.

बेहूदापन प्रदर्शन

हाईंज़ कहते हैं, “जिस तरह महिलाओं को दिखाया जाता है वो बेहद बेहूदा रूप होता है, लेकिन आपको उसकी इतनी आदत हो जाती है कि आप उसे नज़रअंदाज़ कर देते हैं.”

हाईंज़ के अनुसार, “मुझे लगता है कि मेरा इस तरह पोज़ करना लोगों का ध्यान दोबारा उस बात की ओर ले जाता है कि ये कितना बेहूदा होता है जब एक 38 साल का उपन्यास लेखक इस तरह पोज़ करता है.”

जनवरी 2012 से हाईंज़ ने इस तरह पोज़ करने की शुरुआत की और तब से ही उनके इस तरह के पोज़ उनके ब्लॉग पर बेहद पसंद किए जाते हैं.

इससे प्रेरित होकर उन्होंने दिसंबर 2012 में एक नई शृंखला की शुरुआत की है ताकि महिलाओं में होने वाले आईकार्डी सिंड्रोम बीमारी के लिए पैसा इकट्ठा किया जा सके.

इस शृंखला को देखने के लिए एक लाख लोग हाईंज़ की वेबसाइट पर देख चुके हैं और करीब 15 हज़ार डॉलर की रकम जुटा चुके हैं.

विज्ञान से जुड़े काल्पनिक उपन्यासों के जिल्द पर महिलाओं को दिखाए जाने के अदांज़ पर चल रही बहस में ये प्रोजेक्ट सबसे नया है.

आम जिंदगी के अनुभवों से दूर साइंस फ़िक्शन की दुनिया में खो जाने की चाहत रखने वाले उपन्यास पाठकों को भी इस तरह महिलाओं के रूप से दो-चार होना पड़ता है जो वो आम जीवन में अक्सर देखते हैं.

जरुरी नहीं पाठकों को लुभा पाएं

इन उपन्यासों के जिल्द पर अक्सर महिलाओं का अंग प्रदर्शन करने वाले कपड़ों में दिखाया जाता है जो जंग जैसे विषयों पर आधारित इन उपन्यासों में महिलाओं के किरदारों से मेल नहीं खाते.

पाठक तर्क देते हैं कि महिलाओं के किरदारों को ऐसा रूप दिखाना कहीं ना कहीं ये संदेश देता है कि महिलाएं केवल उपभोग की वस्तुएं है.

आईरीन गैलो ने किताब छपाई उद्योग में 1990 में कदम रखा, उस वक्त कोनेन कवर्स ने अपनी कॉमिक्स के जिल्द पर महिलाओं को छापना कम कर दिया था.

फिलहाल टोर बुक्स के क्रिएटिव निर्देशक आईरीन गैलो कहते हैं, “उस वक्त हमारे सेल्स के लोगों ने कहा कि हमें कॉमिक्स के कवर पर कमसिन महिलाएं चाहिए साथ ही उन्हें हम कॉमिक्स कहानी के अहम किरदारों में भी महिलाओं को शामिल किजिए.”

हालांकि इन महिलाओं को जंग लड़ते दिखाया जाता है लेकिन आलोचना करने वाले कहते हैं कि जिस अंदाज़ में उन्हें दिखाया जाता है उनसे वो बेहद लाचार नज़र आती है.

अंदाज़

उपन्यास लिखने वाले सेलविया मोरेनो गॉर्सिया कहते हैं, “लोगों को लगता है कि महिलाओं को अगर बंदूक दे दी जाए तो वो अचानक ताकतवर महिला हो जाती है. लेकिन हम भूल जाते हैं कि जिस अंदाज़ में, जिन कपड़ों में उन्हें दिखाया जाता है वो इस्तेमाल की वस्तुएं ही नज़र आती है. एक बंदूक भर दे देने से अपकी कहानी का नज़रिया नहीं बदलता.”

आईरीन गैलो मानते हैं कि इसके पीछे की एक वजह ये भी है कि उपन्यासों के कवर डिजाइन के इस उद्योग में महिलाओं के मुकाबले पुरुष ज्यादा है.

किताबों पर कमसिन महिलाओं की तस्वीरों के लिए मार्केटिंग सोच जिम्मेवार हो सकती है लेकिन ये मानना कि सेक्स बिकता है ज़रुरी नहीं है कि सही हो.

प्रकाशन उद्योग के पर्यवेक्षक कोडेक्स ग्रुप के 2012 के आंकड़ों के मुताबिक कम कामुक दिखने वाले कवर कहीं ज्यादा संख्या में आम पाठकों को लुभाते हैं.

हालांकि महिलाओं को पेश किए जाने के अंदाज़ की ये बहस बढ़ रही है लेकिन हाईंज़ नहीं मानते कि ये उद्योग बदलाव की कगार पर है. जिसका सीधा सा मतलब है कि पाठकों को अब भी कुछ समय तक महिलाओं को उपभोग की वस्तु की तरह देखने के लिए मजबूर होना पड़ेगा.

हाईंज़ ये कोशिश ज़रुर करते हैं कि उनके उपन्यासों के कवर बाकी लोगों जैसे ना हों.

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