हेडली की सज़ा से भारत नाख़ुश

 शुक्रवार, 25 जनवरी, 2013 को 16:23 IST तक के समाचार
डेविड हेडली

डेविड हेडली का नाम पहले दाउद गिलानी था.

अमरीका की एक अदालत द्वारा डेविड हेडली को 35 साल कैद की सज़ा सुनाए जाने के फैसले पर भारत सरकार और राजनीतिक दलों की तीखी प्रतिक्रिया रही है.

जहां एक ओर विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने कहा है कि डेविड हेडली को जो सज़ा दी गई है उससे सरकार 'निराश' है वहीं विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी ने सज़ा को नाकाफी बताते हुए हेडली के प्रत्यर्पण की मांग की है.

फैसले पर नाखुशी ज़ाहिर करते हुए भाजपा प्रवक्ता राजीव प्रताप रूडी ने कहा, ''अमरीका के साथ 2009 में हुई भारत की संधि के तहत अमरीका को डेविड हेडली को भारत के सुपुर्द करना चाहिए. अगर हम हेडली को भारत लाने में नाकाम रहते हैं तो ये आतंकवाद को खत्म करने के लिए विश्व स्तर पर की जा रही कोशिशों की विफलता होगी.''

'फैसला अभी अधूरा है'

"ये फैसला अभी अधूरा है. हेडली को सज़ा अमरीकी कानूनों के हिसाब से मुंबई हमलों में मारे गए अमरीकी नागरिकों के मद्देनज़र सुनाई गई है. हम उन सभी लोगों के लिए इंसाफ चाहते हैं जो भारत में मारे गए. हर हाल में हेडली पर मामला भारत में चलाया जाना चाहिए."

भाजपा प्रवक्ता राजीव प्रताप रुडी

रूडी ने कहा कि ये फैसला अभी अधूरा है. हेडली को सज़ा अमरीकी कानूनों के हिसाब से मुंबई हमलों में मारे गए अमरीकी नागरिकों के मद्देनज़र सुनाई गई है. हम उन सभी लोगों के लिए इंसाफ चाहते हैं जो भारत में मारे गए. हर हाल में हेडली पर मामला भारत में चलाया जाना चाहिए.

फैसले की खबर के बाद विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने कहा कि हेडली को कठोरतम सज़ा दी जानी चाहिए थी. उन्होंने कहा कि हेडली पर भारत में मामला चलाया जाता तो संभव है उन्हें बेहद कठोर सज़ा मिलती.

उन्होंने भारत की इस मांग को दोहराया कि हेडली पर भारत में मामला चलाए जाने के लिए उन्हें प्रत्यर्पित किया जाना चाहिए. हालांकि सलमान खुर्शीद का कहना है कि ये फैसला एक शुरुआत है. उन्होंने कहा, ''हम यह समझते हैं कि अमरीका की अपनी कानून व्यवस्था है, लेकिन हमारी जो स्थिति है उसके मद्देनज़र हेडली के प्रत्यर्पण की मांग बनी रहेगी.''

'हेडली को मौत की सज़ा'

खुर्शीद के बयान के बाद गृह सचिव आरके सिंह ने भी यह साफ किया कि भारत सरकार डेविड हेडली के प्रत्यर्पण का मामला आगे बढ़ाएगी. उन्होंने कहा, ''हेडली को प्रत्यर्पित न किए जाने का समझौता अमरीका में हुआ है और उससे हमारा कोई सरोकार नहीं. हम हेडली सहित उन सभी लोगों के लिए मौत की सज़ा चाहते हैं जो मुंबई में मारे गए 165 लोगों की मौत के लिए ज़िम्मेदार हैं.''

"हेडली को प्रत्यर्पित न किए जाने का समझौता अमरीका में हुआ है और उससे हमारा कोई सरोकार नहीं. हम हेडली सहित उन सभी लोगों के लिए मौत की सज़ा चाहते हैं जो मुंबई में मारे गए 165 लोगों की मौत के लिए ज़िम्मेदार हैं."

गृह सचिव आरके सिंह

पाकिस्तान सरकार के समक्ष भारत की मांगों को दोहराते हुए उन्होंने कहा कि इस मामले में हमारा रुख साफ है और हम किसी भी कीमत पर सभी षड्यंत्रकारियों को कानून के दायरे में लाना चाहते हैं.

इस बीच कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने कहा है कि हेडली के प्रत्यर्पण पर कोई समझौता नहीं हो सकता और उन पर भारत में ही मामला चलाया जाना चाहिए.

'प्रत्यर्पण की कोशिशें जारी रहें'

उन्होंने कहा, ''मुंबई पर हुआ हमला भारत के इतिहास के सबसे भयावह चरमपंथी हमलों में से एक है. इस हमले में जो लोग मारे गए उन्हें सही मायने में इंसाफ तभी मिल सकता है जब हेडली पर भारत में मामला चलाया जाए.''

कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह के मुताबिक, ''हेडली को बेहद कठोर सज़ा मिलनी चाहिए और भारत सरकार को उनके प्रत्यर्पण की कोशिश में लगे रहना चाहिए.''

पाकिस्तानी मूल के 52 वर्षीय अमरीकी नागरिक हेडली को एफबीआई ने अक्टूबर 2009 में गिरफ्तार किया था. उन पर 2008 के मुंबई हमलों का षड़यंत्र रचने और उस पर अमल करने के आरोप थे.

चरमपंथी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के संदिग्ध सदस्य डेविड हेडली को अमरीका की एक अदालत ने 35 साल की सजा सुनाई है.

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