'कीनिया में ब्रिटेन के युद्धभ्यास पर ख़तरा'

ब्रिटिश सैनिक
Image caption कीनिया में ब्रितानी सैनिक 6 महीने के लिए अभ्यास पर जाते हैं

कीनिया में युद्ध अभ्यास के लिए गए एक ब्रितानी सैनिक पिछले सात महीनों से वहां के जेल में बंद हैं.

ये सैनिक उन 10 हज़ार ब्रितानी सैनिकों के दल के सदस्य हैं जिन्हें हर साल कीनिया में युद्ध अभ्यास के लिए लाया जाता है.

पिछले साल कीनिया में यु्द्ध अभ्यास के दौरान सैनिकों द्वारा की गई गोलीबारी में एक नागरिक की मौत हो गई थी.

जिस दौरान ये घटना हुई उस दौरान ये ब्रितानी सैनिक वहां ड्यूटी पर थे. अब दोनों देशों की सरकारों के बीच इस बात को लेकर विवाद है कि इस मामले पर सुनवाई का अधिकार किसका है.

इस घटना ने ब्रिटेन और कीनिया के बीच के सैन्य संबंधों पर विपरीत असर डालना शुरु कर दिया है.

युद्धअभ्यास

हर साल हजारों ब्रितानी सैनिक सैन्य अभ्यास के मक़सद से करीब छै सप्ताह के लिए उत्तर कोरिया आते हैं.

इस ट्रेनिंग के दौरान अफगानिस्तान और अन्य युद्धग्रस्त इलाकों में भेजने के लिए सैनिकों को ट्रेनिंग दी जाती है.

लेकिन, पिछले साल 10 जून को हुई एक घटना ने यहां के हालात ख़राब कर दिए...

जिस जगह पर ब्रितानी सैनिक युद्ध अभ्यास की तैयारी कर रहे थे वो पूरा इलाका पथरीली पहाड़ियों और कांटेदार घासफूस से घिरा हुआ था.

इसी दौरान उन्होंने वहां कुछ स्थानीय नागरिकों को घूमते हुए देखा जो हथियारों से लैस थे.

नानयुकी शहर के ब्रिटिश ट्रेनिंग बेस में तैनात कमांडर कर्नल मार्क क्रिस्टी के अनुसार ये स्पष्ट नहीं है कि असल में किसने ने गोली चलाई और क्या उस नागरिक ने वाकई में गोली चलाई भी थी या नहीं.

लेकिन सच्चाई ये है कि इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना में एक कीनियाई नागरिक की मौत हो गई थी.

ऐसे हालातों में सामान्य रूप से बातचीत करके उन्हें दूसरी जगह भेजने की तैयारी की जाती है लेकिन यहां बातचीत की जगह गोलीबारी ने ले ली जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई.

इस हादसे में अभियुक्त बनाए गए ब्रिटिश सैनिक सार्जेंट मैडिसन की ज़िंदगी अब नानयुकी के बैरकों में चक्कर काटते हुए बीत रही है.

उन्हें कीनिया में ही ब्रितानी सैनिकों की निगरानी में रखा गया है. हालांकि अभी तक उनपर किसी अपराध का आरोप नहीं लगा है.

कानून

विदेश मंत्रालय के अनुसार इस मामले की जांच का अधिकार सिर्फ उनका है लेकिन वहां के स्थानीय सांसद रफाएल लेटीमालो के अनुसार,''अगर विदेशी सैनिक हमारी धरती पर अपराध करते हैं तो उनपर भी कीनिया का कानून लागू होगा.''

कुछ लोगों का मानना है कि कीनिया में मार्च में होने वाले चुनाव के कारण इस मुद्दे पर टालमटोल किया जा रहा है.

यहाँ तैनात कमांडरों के अनुसार ये घटना एक व्यापक समस्या का लक्षण है. कीनिया के इस इलाके में डाकुओं और दस्यु की संख्या बहुत ज़्यादा है. उनके पास बड़ी संख्या में हथियार भी होते हैं और पुलिस की नाकेबंदी काफी कम.

कर्नल क्रिस्टी के अनुसार कभी-कभी उन्हीं लोगों में से कुछ ब्रिटिश सेना के उपकरणों को हथियाने के लिए ऐसे हमले कर सकते हैं.

नायुकी शहर चारों तरफ से सैन्य अड्डों से घिरा हुआ है. शहर की स्थानीय अर्थव्यवस्था भी काफी हद तक इन पर आश्रित है.

कीनियाई नेताओं का भी मानना है कि इससे दोनों देशों का फायदा हो रहा है लेकिन कीनिया में होने वाले आगामी चुनाव और सैन्य उपकरणों की चोरी के आरोप के कारण वहां पैदा हुए नाज़ुक हालात ने ब्रिटेन के सैन्य प्रशिक्षण पर खतरा ला दिया है.

संबंधित समाचार