मुंबई हमलों में इंसाफ़ होना बाकी: हिलेरी क्लिंटन

अमरीकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन
Image caption हिलेरी क्लिंटन का कहना है कि 26/11 मुंबई हमलों में अभी इंसाफ़ होना बाकी है.

अमरीकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने कहा है कि मुंबई हमलों में अभी इंसाफ़ होना बाकी है.

हिलेरी क्लिंटन ने यह बात मंगलवार को वॉशिंग्टन में एक टाउन हाल बैठक में अपने कार्यकाल के बारे में सवालों के जवाब के दौरान कही.

मुंबई हमलों के बारे में बोलते हुए अमरीकी विदेश मंत्री ने कहा, "हम पल्ला नहीं झाड़ रहे हैं. मुंबई हमलों के ज़िम्मेदार लोगों को न्याय के कटघरे में लाना अब भी अधूरा काम है."

हिलेरी क्लिंटन ने इस मामले में भारत के लोगों को इत्मिनान दिलाते हुए कहा, "मैं सारे भारतीय लोगों को यह बताना चाहती हूं कि इस मामले में न्याय दिलाना अब भी हमारी बेहद अहम प्राथमिकताओं में शामिल है."

हेडली और राणा को सज़ा

पिछले हफ़्ते मुंबई हमलों के एक मुख्य आरोपी डेविड हेडली को एक अमरीकी अदालत द्वारा 35 वर्ष कैद की सज़ा सुनाई गई थी. उससे पहले उसके साथी तहव्वुर राणा को भी 14 साल की सज़ा सुनाई गई.

लेकिन भारत अमरीका से यह मांग करता रहा है कि डेविड हेडली को मुंबई हमलों के मामले में भारत प्रत्यर्पित किया जाए. अमरीका ने हमेशा भारत की इस मांग को मानने से इंकार किया है.

हेडली को सिर्फ़ 35 वर्ष कैद की सज़ा दिए जाने के कारण भारत में सरकार समेत बहुत से लोग नाराज़ हैं.

लेकिन अमरीकी विदेश मंत्रालय ने यह कहकर पल्ला झाड़ने की कोशिश की थी कि हेडली के मामले में अमरीकी अदालत ने अपना फ़ैसला सुना दिया है.

'हेडली ने सहयोग दिया'

Image caption मुंबई में नवंबर 2008 में चरमपंथी हमलों 165 लोगों की मौत हुई थी.

इस माहौल में अब विदेश मंत्री के इस बयान की अहमियत और बढ़ जाती है कि अभी अमरीकी सरकार यह नहीं समझती कि मुंबई हमलों के ज़िम्मेदार लोगों को न्याय के कटघरे में ला खड़ा किया गया है.

क्लिंटन ने यह ज़रूर कहा कि हेडली ने जांचकर्ताओं के साथ सहयोग करके महत्वपूर्ण जानकारियां दीं जिससे भारत और अमरीका में मुंबई जैसे अन्य हमले होने से रोके जा सके.

हिलेरी क्लिंटन ने कहा, "हेडली से बहुत सी महत्वपूर्ण जानकारियां हासिल की गईं थीं. मैं समझती हूं कि जो सज़ा उसे मिली है, औऱ जो उसे मिलनी ही चाहिए थी, वह उसके सहयोग को भी दर्शाती है. हेडली का सहयोग आगे भी जारी रहने की उम्मीद है जिससे मुंबई जैसे हमलों को रोकने के लिए भारतीय और अमरीकी कोशिशें कामयाब हों."

अदालत में अमरीकी अटॉर्नी पैट्रिक फिट्जराल्ड ने हेडली के मामले में नरमी की अपील की थी. उन्होंने जज को बताया था कि हेडली के एक खबरी बनने के बाद 'जानें बची हैं.' जबकि अमरीकी सरकार ने हेडली के लिए अदालत से उम्र कैद की सज़ा की भी सिफ़ारिश नहीं की थी.

चरमपंथ के खिलाफ़ जंग जारी

लेकिन क्लिंटन ने कहा कि अमरीकी सरकार चरमपंथ के खिलाफ़ अपनी लड़ाई जारी रखेगी.

उनका कहना था कि अमरीका भारत के साथ गुप्त जानकारियों के अलावा कानून व्यवस्था के मामलों में भी सहयोग बढ़ा रहा है. और उन्होंने इत्मिनान दिलाया कि आने वाले वर्षों में इसका फायदा होगा.

हिलेरी क्लिंटन ने पाकिस्तान से भी अपील की है कि वह अपने देश में सक्रिय चरमपंथियों के खिलाफ़ कारर्वाई करे.

क्लिंटन ने कहा, "हम पाकिस्तानी सरकार से भी अपील करते रहे हैं कि वह अपने देश के भीतर से सक्रिय चरमपंथियों के खात्मे के लिए काम करे क्योंकि वे पाकिस्तान समेत भारत और अमरीका के लिए भी खतरा हैं. "

मुंबई हमलों के सिलसिले में भारत यह भी मांग करता रहा है कि पाकिस्तान स्थित चरमपंथी गुट लश्करे तैयबा के सरगना हाफ़िज़ सईद को भारत के हवाले किया जाए.

अमरीकी विदेश मंत्री ने भारत और पाकिस्तान के बीच रिश्तों को बेहतर बनाने की हाल में की गई कोशिशों को भी सराहा.

चार साल तक अमरीका की विदेश मंत्री रहने के बाद हिलेरी क्लिंटन पहली फ़रवरी को अपना पद छोड़ रही हैं.

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