जहां रहते है पांच पांच वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियन

  • 5 फरवरी 2013
बॉक्सिंग का बोलबाला
Image caption बुकोम में हर तरफ बॉक्सिंग का बोलबाला है

अफ्रीकी देश घाना की राजधानी अकरा के पास एक छोटी सी जगह है बुकोम जहां चहलपहल और शोरशराबे की कोई कमी नहीं है. लेकिन ये जगह एक वजह से बेहद खास है.

इसी छोटे से इलाके में अफ्रीका के कुछ बेहतरीन मुक्केबाज पैदा हुए हैं जिनमें से पांच विश्व चैंपियन भी रह चुके हैं.

1980 और 90 के दशक में तीन बार वर्ल्ड चैंपियनशिप जीतने वाले अजुमाह 'द प्रोफेसर' नेल्सन का बचपन भी बुकोम में गुजरा. हालांकि अब वो अकरा में एक बड़े से घर में रहते हैं जिसमें न सिर्फ स्वीमिंग पूल है, बल्कि जिम और बार की भी सुविधा है.

बचपन के दिनों को याद करते हुए नेल्सन कहते हैं, “बुकोम का मतलब ये समझिए कि जिसमें दम है, वही बचेगा. जब आप बच्चे होते हैं तो आप अपने लिए खाना तलाशते हैं, जिंदा रहने के लिए पैसा चाहते हैं, उसके लिए जद्दोजहद करते हैं. इससे आप मजबूत होते हैं. जब आप लड़ते हैं तो फिर लड़ाई कुछ नहीं रह जाती है.”

बॉक्सिंग संस्कृति

बॉक्सिंग बुकोम की संस्कृति का हिस्सा है. अगर दो पुरूषों या लड़कों की सड़क पर तू तू मैं मैं हो रही है, तो लोग उनसे कहते हैं, “बहसबाजी मत करो. बात बंद करो. लड़ो और चित्त कर दो.”

एक दीवार पर दो पोस्टर दिखाई देते हैं. एक में आने वाली मुक्केबाजी प्रतियोगिता के बारे में जानकारी है तो दूसरे में 'बजूका' क्वारटे, डेविड कोटी, प्रोफेसर, जोसेफ एजबेको और जोशुआ क्लोटे जैसे स्थानीय चैंपियंस का जिक्र है.

जोशुआ कहते हैं, “भले ही आपकी उम्र कुछ भी हो, आपको मजबूत होना पड़ेगा. अगर आप मजबूत नहीं हैं और उस इलाके में जाते हैं तो लोग आपको पीट पाट कर भगा देंगे.”

जोशुआ की मां मेमुना एनसाह कहती हैं कि ये शायद उनके जींस में शामिल है. वो कहती हैं, “मैं एक डांसर हूं और एक सक्रिय महिला हूं. हो सकता है कि यही बात बच्चों में गई है.”

आसपास के इलाके में भी फाइट कल्चर है. शायद यही बात इस इलाके के मुक्केबाजों को कामयाब बनाती है.

फिर चाहिए वर्ल्ड चैंपियन

किंग्स कॉलेज लंदन में इंस्टीट्यूट ऑफ साइकोलॉजी की डॉ. क्लेयर हावर्थ का कहना है, “एक संभावना ये है कि इस इलाके में रहने वाले लोगों में कुछ विशेष जीन हैं या फिर जिस तरह के माहौल और संस्कृति में ये लोग रहे हैं, वो उनके जींस पर भारी पड़ती है.”

Image caption नेल्सन अफ्रीका के सबसे कामयाब बॉक्सरों में गिने जाते हैं

बेशक सिर्फ जींस की बुनियाद पर कभी किसी को कामयाबी नहीं मिल सकती है. आप वर्ल्ड चैंपियन बनना चाहते हैं तो इसके लिए हजारों घंटों की ट्रेनिंग करनी होती है.

वैसे इस इलाके में कई बॉक्सिंग जिम भी मौजूद हैं. ऐसी ही एक जिम 'विल पावर' के मालिक हैं नैपोलियन टैगो. वो खुद भी फाइटर रह चुके हैं.

वो कहते हैं, “मैं ऐसा कोई लड़का तैयार करना चाहता हूं जो मेरे लिए वर्ल्ड चैपियनशिप जीते. मैं जानता हूं कि नंबर वन हूं. मुझे ये भी पता है कि ये कैसे करना है.”

टैगो की उम्मीदें 29 वर्षीय एल्बर्ट मेंसाह पर टिकी हैं. मेंसाह भी ये बात जानते हैं. वो कहते हैं, “मैं वर्ल्ड चैंपियन बनना चाहता हूं. मैं रोज इसके लिए मेहनत करता हूं. किसी दिन कुछ हासिल करने के लिए आपको आज ट्रेनिंग और बस ट्रेनिंग करनी है.”

बुकोम की गरीबी इस तरह के इरादे को और मजबूती देती है, जहां अपने हालात को बदलने का इकलौता जरिया मेहनत ही दिखाई पड़ती है.

कई लोग पहले भी ऐसा कर चुके हैं और ये बात युवकों को प्रेरणा देती है.

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