स्विट्ज़रलैंड: रेलवे से लोगों का मोहभंग!

  • 17 फरवरी 2013
स्विट्जरलैंड ट्रेन
Image caption स्विस रेलवे ने ट्रेनों में टिकट व्यवस्था को काफी जटिल बना दिया है

स्विट्ज़रलैंड के लोगों को लंबे समय से अपनी रेल व्यवस्था पर गर्व रहा है, लेकिन हाल ही में शुरू हुई वहां की नई टिकट नीति ने इस भावना को कमज़ोर किया है.

जिस वक़्त इस लेख को मैं लिख रहा हूं मैं अपने घर की ओर जा रहा हूं और जेनेवा झील को घेरे हुए पर्वतों के ऊपर सूर्यास्त का मनोरम दृश्य देख रहा हूं.

इस वक़्त काफ़ी ठंड है और यहां ख़ूब बर्फ़बारी हुई है, लेकिन ट्रेन सही समय पर है. ट्रेन के भीतर गर्मी है और मुझे एक सीट भी मिल गई है.

मैं ये देखकर काफ़ी खुश हो रहा हूं कि बाहर ट्रैफ़िक का क्या हाल है.

अब मैं और भी ज़्यादा प्रफुल्लित महसूस कर रहा हूं क्योंकि ताज़ी कॉफ़ी की खुशबू आने लगी है यानी ड्रिंक्स का समय हो गया है.

मेरे स्विट्ज़रलैंड के मित्र अक्सर मुझे गर्व के साथ बताते हैं कि उनके यहां रेल सेवा दुनिया भर में सबसे अच्छी है. लेकिन हाल के दिनों में उन लोगों का अपनी रेल सेवा से कुछ हद तक मोहभंग हुआ है.

दरअसल ट्रेनों में मिलने वाले टिकट की व्यवस्था अब समाप्त कर दी गई है, हालांकि टिकट कलेक्टर अभी भी ट्रेन के भीतर होते हैं. अब आप टिकट प्लेटफॉर्म पर लगी मशीन, ऑनलाइन या फिर स्मार्टफोन के ज़रिए ख़रीद सकते हैं.

परेशानी

लेकिन व्यवहार में इस व्यवस्था से आम लोगों को काफ़ी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. इसकी वजह एक तो ये है कि आपका टिकट वैध है या नहीं, ये बेहद पेंचीदी व्यवस्था है और दूसरे यदि टिकट नहीं है तो मोटा जुर्माना देना पड़ता है.

मसलन, किसी व्यक्ति के टिकट पर प्लेटफॉर्म मशीन से तारीख़ पंच करवानी होगी. लेकिन यदि मशीन काम नहीं कर रही है और वो व्यक्ति अपने हाथ से उस पर तारीख़ लिख देता है तो टिकट कलेक्टर उस पर जुर्माना कर देगा.

ऐसे ही एक बुज़ुर्ग व्यक्ति अपने पोते के साथ जा रहे थे और उन दोनों ने ई-टिकट लिया था, लेकिन उनमें से एक का टिकट अवैध बता दिया गया क्योंकि एक साथ एक ही ई-टिकट के लिए अनुमति है.

Image caption नई व्यवस्था के खिलाफ कुछ लोग अदालत भी गए हैं

और मैं खुद भी भुक्तभोगी हूं. एक दिन सुबह मैं अपने स्टेशन पहुंचा और देखा कि टिकट मशीन टूटी हुई है. मुझे लगा कि कोई बात नहीं, मेरे पास स्मार्टफ़ोन है और मैं इससे टिकट ले लूंगा और मैंने वैसा ही किया.

लेकिन ये इतना आसान नहीं था जितना कि मैंने सोचा था. मैं क्रेडिट कार्ड और स्मार्टफ़ोन के बीच उलझा रहा और तब तक मेरा ई-टिकट बुक हो गया और मैंने बड़े आराम से उसे टिकट कलेक्टर को दिखाया.

लेकिन वो इससे खुश नहीं हुई और उसने मुझे बताया कि कुछ विशेष परिस्थितियों में मेरा टिकट वैध नहीं है. ये बात मुझे तब समझ में आई जब कुछ ही हफ्तों बाद स्विस रेलवे की ओर से मेरा पास पैसा वसूले जाने संबंधी एक पत्र आया.

जुर्माना

लोगों ने मुझे बताया कि मेरे क्रेडिट कार्ड से पैसा तब कटा था जब ट्रेन को चले हुए चार मिनट बीत चुके थे और इस वजह से मेरा टिकट वैध नहीं है.

पत्र में मुझ पर 190 फ्रैंक्स यानी क़रीब 133 पौंड का जुर्माना लगाया गया था. यहां आपको ये भी बता दूं कि अकेला मैं ही नहीं था जिस पर स्विस रेलवे ने इस तरह जुर्माना ठोंका था, स्विटज़रलैंड में ऐसे करीब 750 यात्री हैं जिन पर इसी तरह से जुर्माना लगाया जा रहा है.

स्विस रेलवे का कहना है कि उनकी नीति ये है कि यात्रियों को ईमानदारी से सही किराये के साथ यात्रा सुविधा मुहैया कराई जाए, लेकिन कंपनी की बैलेंस शीट कुछ और ही कहती है.

कंपनी हर महीने क़रीब बीस लाख डॉलर का जुर्माना लोगों पर ठोंक रही है.

हालांकि कंपनी को फ़ायदा थोड़ा ही हुआ है लेकिन यात्रियों को परेशानी ज्यादा हुई है. उन्हें लगता है कि वो सही टिकट लेकर चल रहे हैं फिर भी उन्हें सज़ा दी जा रही है.

कुछ लोग तो मामले को अदालत में भी ले जा चुके हैं. काफ़ी रोचक होगा स्विस रेलवे बनाम आम लोगों का ये मुक़दमा.

इस बीच, हालांकि ट्रेन से यात्रा करना अभी भी ज़्यादा लोकप्रिय है, ट्रेन की सीटें अब उतनी आरामदेह नहीं लगतीं, कॉफी की ख़ुशबू में वो लज़्ज़त नहीं रह गई क्योंकि स्विस रेलवे अब पुराना हो गया. उसके लिए शायद हर महीने बीस लाख डॉलर की कमाई अपने ग्राहकों के साथ अच्छे संबंधों पर भारी पड़ गई है.

संबंधित समाचार