कहां से आया सबका प्यारा टेडी बीयर

टेडी बीयर की कहानी
Image caption आज टेडी बियर के न सिर्फ बच्चे बल्कि बड़े भी दीवाने हैं

सर रॉबर्ट क्लार्क ब्रितानी सेना के जांबाज अफसर थे जो 1924 में पैदा हुए. दूसरे विश्व युद्ध के दौरान वो ब्रितानी प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल के विशेष सैन्य दस्ते में शामिल हुए.

क्लार्क युद्ध के दौरान पैराशूट के जरिए इटली में दुश्मन के इलाके में दाखिल हुए और पकड़े जाने पर युद्ध बंदी भी रहे.

बाद में उन्हें न सिर्फ अपनी बहादुरी के लिए सम्मानित किया गया बल्कि ब्रितानी सरकार जरूरत पर पड़ने पर उनसे राय मशविरा भी किया करती थी.

लेकिन इस बहादुर सैन्य अफसर के व्यक्तित्व का एक और पक्ष है.

दो साल की उम्र में किसी से उन्हें मिला टेडी बीयर जिंदगी भर क्लार्क के साथ रहा. क्लार्क इसे फाला कहते थे जो उस वक्त भी उनके साथ था जब वो पैराशूट से दुश्मन के इलाके में दाखिल हुए और उस वक्त भी जब वो युद्ध बंदी रहे.

1980 के दशक के आखिरी सालों में दुनिया को अलविदा कहने वाले सर क्लार्क टेडी बीयर इतने शौकीन थे कि उनके पास लगभग 300 टेडी थे.

कैसे मिला नाम

टेडी बीयर से बेपनाह लगाव का ये इकलौता मामला नहीं है. बहुत सी बड़ी हस्तियां टेडी बीयर के दीवानी रही हैं.

लेकिन टेडी बीयर के अस्तित्व में आने की कहानी बहुत दिलचस्प है. 1902 में अमरीकी राष्ट्रपति थियोडोर ‘टेडी’ रुजवेल्ट मिसिसिपी राज्य के गवर्नर के न्यौते पर भालू का शिकार करने वहां पहुंचे.

रूजवेल्ट के कुछ दोस्तों ने एक काले अमरीकी भालू को घेर लिया और एक पेड़ से बांध दिया और उसका शिकार करने के लिए राष्ट्रपति को बुलाया.

Image caption राष्ट्रपति रूजवेल्ट ने अपना नाम इस्तेमाल करने की तुरंत अनुमति दे दी

लेकिन रुजवेल्ट को उस पर गोली चलाना अच्छा नहीं लगा. बाद में इस पर एक कार्टून बना.

ये कार्टून मॉरिस मिकटॉम नाम के एक रूसी यहूदी ने देखा जो ब्रुकलिन में दिन में टॉफियां बेचते थे और रात में अपनी पत्नी के साथ मिल कर सॉफ्ट टॉय बनाते थे.

कार्टून से प्रभावित होकर मिकटॉम ने एक कपड़े से भालू का बच्चे का खिलौना बनाया और अपनी दुकान पर रखा और नीचे लिखा टेडी बीयर.

मिकटॉम ने एक ऐसा खिलौना बना कर राष्ट्रपति रूजवेल्ट को भी भेजा और उन्होंने तुरंत इसके लिए अपना नाम इस्तेमाल करने की अनुमति दे दी.

ये नई तरह का खिलौना इस कदर हाथों हाथ लिया गया कि मिकटॉम ने अपनी आइडियल नोवेल्टी एंड टॉय कंपनी की स्थापना कर दी. संयोग की बात है कि लगभग उसी समय जर्मनी में भी सॉफ्ट टॉय की शुरुआत हुई और इसका श्रेय मार्गारेटे स्टाइफ को जाता है.

मार्गारेटे के भतीजे रिचर्ड ने अपनी किस्म का टेडी बीयर बनाया और 1903 में उसे लाइप्जिग में एक प्रदर्शनी में पेश किया. इसे बहुत पसंद किया गया और जल्द ही वो इसे ब्रिटेन के साथ साथ अमरीका के कुछ हिस्सों में निर्यात करने लगे.

भालू का आकर्षण

Image caption भालू की तस्वीरें मीडिया में खूब छपती हैं

आज तो टेडी बीयर इतना लोकप्रिय है कि उसके लिए अलग से दुकानें और बड़े बड़े स्टोर होते हैं. यही नहीं कई देशों में तो टेडी बीयर के न सिर्फ म्यूजियम हैं बल्कि ऑस्ट्रेलिया, अमरीका, ब्रिटेन, कनाडा, जर्मनी और जापान में नियमित तौर पर टेडी बीयर फेस्टिवल होते हैं.

लेकिन क्या होता अगर टेडी रूजवेल्ट का नाम कुछ और होता और वो मिसिसिपी राज्य के गवर्नर के बुलावे पर शिकार के लिए नहीं जाते. क्या फिर भी टेडी बीयर को इतनी कामयाबी मिलती.

इन सवालों के जवाब भले ही आसानी ना मिलें लेकिन इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि भालू हमेशा आकर्षण का केंद्र रहे हैं अब चाहे वो असली हो या फिर टेडी बीयर के रूप में.

तभी तो जहां बर्लिन के चिडियाघर के भालू क्नूट की जिंदगी और मौत अंतरराष्ट्रीय मीडिया की सुर्खियों में रही, वहीं आए दिन अखबारों, पत्रिकाओं और टीवी चैनलों पर पांडा दिखाई पड़ते हैं.

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