1971 का कत्लेआम: जमात नेता को उम्रकैद

युद्ध अपराध में उम्रकैद
Image caption जमात-ए-इस्लामी से जुड़े हैं मुल्ला

बांग्लादेश में एक ट्राइब्यूलन ने जमात-ए-इस्लामी पार्टी के नेता अब्दुल कादिर मुल्ला को मानवता के खिलाफ अपराधों का दोषी करार दिया और उम्रकैद की सजा सुनाई है.

कादिर मुल्ला पर 1971 के युद्ध के दौरान हत्या समेत कई अपराधों में शामिल होने के आरोप थे.

ये युद्ध अपराध ट्राइब्यूनल बांग्लादेश की आजादी के लिए लड़े गए युद्ध से जुड़े मामलों की सुनवाई कर रहा है, हालांकि इसे संयुक्त राष्ट्र का समर्थन प्राप्त नहीं है.

अनुमान है कि बांग्लादेश के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान 30 लाख लोग मारे गए थे.

पांच आरोपों में दोषी

ट्राइब्य़ूनल के सामने पेश अभियुक्तों पर 1971 में पाकिस्तानी सैन्य बलों के साथ मिल कर तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान और मौजूदा बांग्लादेश की आजादी में बाधा पहुंचाने और कई युद्ध अपराधों में शामिल होने के आरोप हैं.

इस मामले में कुल 12 लोगों के खिलाफ मुकदमा चला रहा है जिनमें से ज्यादातर जमात-ए-इस्लामी के सदस्य हैं. इनमें से एक व्यक्ति को मौत की सजा सुनाई जा चुकी है.

अब्दुल कादिर मुल्ला को हत्या का दोषी करार दिया गया है. अभियोजन पक्ष ने उन पर नरसंहार, षडयंत्र रचने और लोगों को बरगलाने समेत छह आरोप लगाए थे जिनमें पांच में अब उन्हें दोषी करार दिया गया है.

दूसरी तरफ जमात-ए-इस्लामी इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताती है.

प्रधानमंत्री शेख हसीना ने 2010 में युद्ध अपराध के अभियुक्तों के खिलाफ मुकदमे चलाने की प्रक्रिया शुरू की थी.

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