ईरान पर अमरीका ने शिंकजा और कसा

  • 7 फरवरी 2013
ईरान पर प्रतिबंध
Image caption ईरान के लिए हालात मुश्किल होते जा रहे हैं

ईरान पर अमरीकी प्रतिबंध और कड़े किए जा रहे हैं जिससे भारत को भी ईरानी तेल मिलने में दुश्वारियों का सामना करना पड़ सकता है.

ईरान के खिलाफ इन प्रतिबंधों का मकसद उसे अपना परमाणु कार्यक्रम छोड़ने को मजूबर करना है, जिसका मकसद पश्चिमी जगत परमाणु हथियार हासिल करना बताता है. हालांकि ईरान इससे इनकार करता है.

ताजा कदमों के तहत ईरान को तेल की बिक्री से मिलने वाले पैसे पर नई बंदिशें लगाई गईं. प्रतिबंधों के दायरे में ईरान के सरकारी मीडिया को भी शामिल किया गया है.

अभी तक जिन तक ईरान जिन नौ देशों को अपना तेल बेच रहा है उससे मिलने वाली राशि पर अमरीकी प्रतिबंध कारगर नहीं थे लेकिन अब भारत, चीन और तुर्की समेत इन देशों को ईरानी तेल की बिक्री से मिलने वाली रकम सीधे ईरान नहीं जाएगी, बल्कि उसे इन देशों में ही खोले गए बैंक खातों में जमा करना होगा.

प्रतिबंधों के तहत इस पैसे से ईरान सिर्फ इन देशों में चीजें खरीद सकता है. यानी सीधे ईरान ले जाकर इस पैसे का अपनी मर्जी से इस्तेमाल नहीं कर सकता है.

ईरान से लेन देन करने वाले जो वित्तीय संस्थान ताजा प्रतिबंध पर अमल नहीं करेंगे, वो अमरीकी वित्तीय तंत्र से अलग थलग पड़ सकते हैं.

ये प्रतिबंध अमरीकी संसद में छह महीने पहले पारित एक विधेयक के तहत लगाए गए हैं. ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर इसी महीने बातचीत शुरू होनी है.

मीडिया भी लपेटे में

अमरीकी वित्त मंत्रालय ने कहा है कि नए प्रतिबंधों से ईरान को विदेश में तेल की बिक्री से मिलने वाली राशि प्रभावी तरीके से बहुत सीमित हो जाएगी.

अमरीका के सहायक वित्त मंत्री डेविड कोहने ने कहा है कि जब तक ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम के बारे में अंतरराष्ट्रीय चिंताओं पर ध्यान नहीं देता है, तब तक अमरीका उसके खिलाफ प्रतिबंधों को कड़ा करता रहेगा.

Image caption ईरानी की सरकार का कहना है कि उसे शांतिपूर्ण उद्देश्य के लिए परमाणु कार्यक्रम चलाने का पूरा हक है

ईरान के सरकारी मीडिया के खिलाफ भी प्रतिबंध लगाए गए हैं. ये कार्रवाई राजनीतिक बंदियों से जबरदस्ती जुर्म कबूल करवाने और बीबीसी और वॉइस ऑफ अमेरिका जैसे विदेशी चैनलों को जाम करने के लिए लगाई गई है.

प्रतिबंध के दायरे में ईरानी सरकारी टीवी और उसके निदेशक एज़ातुल्लाह जारखामी को शामिल किया गया है.

ईरान पश्चिम जगत की इन आशंकाओं को खारिज करता है कि वो परमाणु हथियार बना रहा है. उसका कहना है कि वो शांतिपू्र्ण उद्देश्य के लिए परमाणु कार्यक्रम चला रहा है.

ईरान के एक अहम राजनेता ने पिछले हफ्ते कहा था कि बीते नौ महीनों के दौरान तेल से मिलने वाले राजस्व में 45 फीसदी की गिरावट आई है.

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