कश्मीरी आकांक्षाओं का दमन चिंता का विषय: पाकिस्तान

Image caption अफ़ज़ल गुरु को शनिवार सुबह आठ बजे फांसी दे दी गई थी. वो संसद पर हमले के मामले में दोषी ठहराए गए थे.

भारतीय संसद पर हमले के दोषी अफ़ज़ल गुरु को फांसी दिए जाने पर पाकिस्तान ने आधिकारिक प्रतिक्रिया देते हुए जम्मू-कश्मीर के लोगों के साथ अपनी सहानुभूति प्रकट की है और कश्मीरी लोगों के साथ भारत सरकार के बर्ताव पर गंभीर चिंता जताई है.

पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता मोअज्जम खान ने अफ़ज़ल गुरु को फांसी के बारे में कहा है कि वो अफ़ज़ल के मुकदमे की प्रक्रिया के विस्तार में नहीं जाना चाहते.

हालांकि उन्होंने कहा, “हम जम्मू कश्मीर के लोगों के प्रति अपनी सहानुभूति प्रकट करते हैं और अफ़ज़ल गुरु की फांसी के बाद भारत सरकार ने जिस तरह जम्मू-कश्मीर के लोगों की आकांक्षाओं को गिरफ्तारियों, हुर्रियत नेताओं की हिरासत, कर्फ्यू, मोबाइल और इंटरनेट सेवा बंद करके और अन्य तरीक़ों से दबाने की कोशिश की है, उस पर हम गंभीर चिंता जताते हैं.”

पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने हुर्रियत नेताओं के खिलाफ़ की जा रही कार्रवाइयों को रोकने और उनकी तुरंत रिहाई की भी मांग की है.

पाकिस्तानी मीडिया

इस बीच पाकिस्तान की मीडिया ने अफ़ज़ल गुरु को अचानक दी गई फांसी पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है.

पाकिस्तान के कई दक्षिणपंथी अख़बारों ने अफ़ज़ल गुरु की फांसी के बारे में लिखा है कि भारत सरकार का ये कृत्य कश्मीरी लोगों पर अत्याचार का उदाहरण है.

नवा-ए-वक़्त और द नेशन जैसे राष्ट्रवादी अख़बारों ने तो यहां तक लिखा है कि पाकिस्तान सरकार को अफ़ज़ल की फांसी का जवाब पाकिस्तान की जेल में बंद सरबजीत सिंह को फांसी देकर देना चाहिए.

नवा ए वक़्त ने लिखा है, "न्याय की मांग है कि भारतीय एजेंट सरबजीत सिंह को तुरंत फांसी दी जानी चाहिए. जिन परिवारों की ज़िंदगी सरबजीत की वजह से तबाह हुई है उन्हें न्याय दिलाने के लिए ये ज़रूरी क़दम होगा."

उधर, उदारवादी माने जानेवाले अख़बार समूह एक्सप्रेस ने भारत के क़दम की निंदा करते हुए लिखा है कि इससे बदला लेने का एक अलग वातावरण तैयार होगा.

Image caption पाकिस्तान के ज़्यादातर अख़बारों ने अफ़ज़ल की फांसी की निंदा की है हालांकि कुछ अख़बारों ने इस पर उदारवादी रुख अपनाया है.

कराची से छपनेवाले उदारवादी अंग्रेज़ी अख़बार ‘द एक्सप्रेस ट्रिब्यून’ ने लिखा है, “इस घटना से कश्मीरियों में अलगाव की भावना बढ़ेगी क्योंकि अफ़ज़ल को फांसी दिए जाने से पहले ही भारत सरकार ने घाटी में कर्फ्यू लगा दिया था.”

शांति की अपील

पाकिस्तान में सबसे ज़्यादा बिकनेवाले उर्दू अख़बार ‘जंग’ ने अलग रवैया अख़्तियार करते हुए शांति बनाए रखने की अपील की है और किसी भी तरह की भावनात्मक प्रतिक्रिया से बचने की चेतावनी दी है. हालांकि इस अख़बार की राय का डॉन, द न्यूज़ और पाकिस्तान टूडे जैसे अन्य उदारवादी अख़बारों ने समर्थन नहीं किया है.

“भावनात्मक प्रतिक्रिया देने की जगह हमें सब्र का परिचय देना चाहिए. हमें कश्मीरियों को नैतिक समर्थन देना जारी रखना चाहिए. राजनीतिक और कूटनीतिक मोर्चे पर भी हमें कश्मीर विवाद का हल संयुक्त राष्ट्र मसौदों के अनुरूप ढूंढने के लिए प्रयास करते रहना चाहिए."

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