फ्री-शॉपिंग से मिलता है अर्थव्यवस्था को बढ़ावा?

  • 14 फरवरी 2013
फ्री-शॉपिंग
Image caption गिव एंड टेक स्टॉल को एक स्वंयसेवी संस्था चलाती है

मनोवैज्ञानिकों के अनुसार 'फ्री-शॉप' यानि वो दुकान जहां से आपको आपके ज़रुरत का सामान मुफ्त मिलता हो, वो ना सिर्फ आपका मूड बल्कि अर्थव्यवस्था को भी बेहतर कर सकती है.

ऐसी ही एक मुफ्त की दुकान है रेक्सहैम पीपल्स मार्केट जिसे फ्री-इकोनॉमी रेक्सहैम नाम का स्वयंसेवी समूह चलाता है.

इस दुकान में खरीदारों को बुलाया जाता है और उन्हें उनकी पसंद की वो सारी चीज़ें दी जाती हैं, जिन्हें पहले से कोई इस दुकान में आकर दान कर जाता है.

मनोवैज्ञानिक ड़ॉ गैरथ हार्वे के अनुसार बिना पैसे से जो सामान मिलता है उससे लोगों को ना सिर्फ खुशी मिलती है बल्कि वे कहीं और ज़्यादा पैसे खर्च करने को प्रोत्साहित होते हैं.

सफलता

इसके आयोजकों ने नवंबर महीने में सबसे पहला स्टॉल खोला था लेकिन उसकी सफलता ने इन्हें जल्द दूसरा स्टॉल खोलने के लिए प्रेरित किया.

आसपास के लोग जो कुछ भी इस स्टॉल को दान में देते हैं वो ग्राहकों के लिए फ्री होता है, बदले में अगर कोई ग्राहक चाहे तो अपनी इच्छा से पैसे भी दान कर सकता है, जिसका इस्तेमाल इस दुकान या सामुदायिक योजना में किया जाता है.

कुछेक चीज़ों को छोड़कर ये स्टॉल अच्छी हालत में मिलने वाली सभी सामानों को दान में ले लेती है.

Image caption इस दुकान से लोग अपनी ज़रुरत के सामान ले जाते हैं और इच्छा से दान दे जाते हैं

दुकान के वॉलंटियर गे-जेकबसन कहते हैं, ''बहुत सारे लोग ये पूछते हैं कि ये कितने की है? जब हम कहते हैं कि ये मुफ्त की है तो वो हमारा विश्वास नहीं करते हैं, उन्हें लगता है कि हम मज़ाक कर रहे हैं. फिर जब उन्हें एहसास होता है कि ये वाकई फ्री है तब वे कहते हैं कि क्या हम इसके बदले कुछ पैसा लेना चाहेंगे, तब मैं कहता हूं कि ये आपकी मर्ज़ी पर है?''

शुरु-शुरु में कुछ हफ्तों तक आप लोगों को ट्रॉली भरकर सिर्फ सामान ले जाते हुए देखेंगे, लेकिन उसके बाद इन्हीं ट्रॉलियों में सामान भरकर आने लगते हैं. ये सब बहुत दिलचस्प होता है.

हमें हर दिन काफी सामान मिलता है, जिनमें कपड़ों, म्यूज़िक वीडियो, वीडियो कैसेट, बर्तन और फर्नीचर भी होते हैं.

इतना ही नहीं हमें बीच-बॉल, ग्लेन मिलर की एलपी और फेस मास्क भी मिलता है, यहां कुछ भी प्रतिबंधित नहीं है.

बिजली के सामानों की जांच के लिए हमने एक बिजली कारीगर भी रखा है ताकि बेकार सामान हमारे यहां इकट्ठा ना हो.

अर्थव्यवस्था को बढ़ावा

जेकबसन के अनुसार, ये सब कुछ फ्री इकोनॉमी रेक्सहैम और कुछ स्वयंसेवियों द्वारा शुरु की गई यम-यम प्रोजेक्ट से शुरु हुआ, जिसे कई अन्य स्टॉलों समर्थन मिला हुआ था.

रेक्सहैम्स यूनिवर्सिटी में कंज़्यूमर साईकोलॉजी विभाग में शिक्षक ड़ॉ गैरथ हार्वे के मुताबिक ग्राहकों को बिना कुछ खर्च किए उनकी ज़रुरत का सामान देना स्थानीय अर्थव्यवस्था में अच्छा असर ला सकता है.

इसका असर हमारे आत्मविश्वास के साथ-साथ हमारे मूड पर भी पड़ता है.

ऐसा देखा गया है कि जो लोग खुश होते हैं वो ज़्यादा शॉपिंग करते हैं, तो इससे पड़ोसी दुकानों की सेल बढ़ जाती है.

पहली खरीदारी मुफ्त होने के कारण, दूसरी और तीसरी खरीदारी आसान हो जाती है और शॉपिंग की गति बढ़ जाती है.

Image caption फ्री-शॉपिंग में आप कपड़ों, बिजली के सामान के अलावा किताबें भी मिल जाती हैं

ड़ॉ हार्वे के मुताबिक जब उनका स्टॉक बार-बार भरा जाने लगा तो उन्हें ज़रा भी आश्चर्य नहीं हुआ क्योंकि जब आप किसी को कुछ देते हैं तो बदले में कुछ पाने की उम्मीद बढ़ जाती है.

पड़ोस में ही गहनों की दुकान चलाने वाले करेन बार्कर कहते हैं, ''ये बहुत अच्छा है, इससे यहां लोगों का आना बढ़ गया है. अब मैं भी अपने घर को खाली करने में लग गया हूं.''

यहां आईं खरीदार ऐन बेकर कहती हैं, ''ये बहुत अच्छा है. जब तक कि वे हमारे दिए गए सामानों को बेचना शुरु नहीं कर देते हैं तब तक ये बहुत अच्छा आयडिया है.''

रेक्सहैम में ऐसे कई लोग हैं जो इस तरह की योजना का स्वागत करेंगे...और जिनके लिए अपना जीवन चलाना थोड़ा मुश्किल है.

ऐन कहती हैं, ''मैं जब भी यहां आती हुं तब कुछ ना कुछ दान ज़रुर देती हूं हालांकि वे मुझे इसके लिए मना करते हैं.''

ऐन के पति लॉयड बेकर के अनुसार, ''ये एक बेहतरीन आयडिया है. मेरा विवेक मुझे इस बात की इजाज़त नहीं देता कि मैं बगैर पैसा दिए कुछ लेकर जाऊं. इसलिए मैं हर बार कुछ ना कुछ दान ज़रूर देता हूं.''

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