क्या प्रभाकरन के बेटे की निर्मम हत्या हुई थी?

  • 20 फरवरी 2013
बालाकृष्णन
Image caption तस्वीरों से पता चलता है कि प्रभाकरन के बेटे की काफी निर्ममतापूर्वक हत्या की गई

श्रीलंका सरकार की ओर से मानवाधिकारों के उल्लंघन के मामले में देश के भीतर लोगों में गंभीर मतभेद हैं.

युद्ध अपराध के ताजा प्रमाणों को सेना भले ही नकार रही है लेकिन ईसाई पादरियों ने संयुक्त राष्ट्र से इस मामले की अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों से जांच कराने और सरकार के खिलाफ कड़े कदम उठाने की मांग की है.

मामला तब सुर्खियों में आया जब एक ब्रितानी फिल्म निर्माता ने ऐसी तस्वीरें जारी कीं जिनमें एलटीटीई प्रमुख प्रभाकरन के बेटे की निर्मम हत्या के गंभीर आरोप लगे हैं.

पिछले दो सालों में फिल्म निर्माता कैलम मैक्री ने ब्रिटेन के स्वतंत्र टीवी स्टेशन चैनल 4 के लिए कुछ फिल्में बनाईं. इन फिल्मों में उन्होंने वीडियो प्रमाणों के जरिए ये दिखाया कि साल 2009 में एलटीटीई को नेस्तनाबूत करने के क्रम में किस तरह से सरकार की ओर से गंभीर युद्ध अपराध किए गए.

हालांकि श्रीलंका सरकार शुरू से ही इन आरोपों से इनकार करती रही है.

पिछले साल आई एक फिल्म में एलटीटीई नेता प्रभाकरन के बारह वर्षीय बेटे बालाचंद्रन का शव दिखाया गया था और कहा गया था कि श्रीलंकाई सेना ने उसे बहुत ही बेदर्दी से मारा है.

मैक्री इस बारे में अपनी तीसरी फिल्म लेकर आए हैं जिसमें उन्होंने कुछ तस्वीरें दिखाई हैं. इन तस्वीरों से पता चलता है कि इस बच्चे को सैनिक धोखे से उठा ले गए और कहा गया कि उसे कोई खतरा नहीं है.

सरकार का दावा झूठा

लेकिन बाद में उसके सीने में पांच बार गोली मारी गई. दो अखबारों में छपे लेखों में मैक्री ने लिखा है कि ये तस्वीरें श्रीलंकाई सरकार के उस दावे को झूठा ठहराती हैं जिसमें कहा गया था कि प्रभाकरन के बेटे की मौत क्रॉसफायर में हुई थी. मैक्री का कहना है कि सेना ने बच्चे की सोच-समझ कर हत्या की है.

श्रीलंकाई सेना के प्रवक्ता रुवान वनिगासूर्या ने मैक्री के इन आरोपों को गलत और आधारहीन बताया है. उनका कहना है कि फिल्म ऐसे समय में रिलीज हो रही थी जब पिछले महीने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद का सत्र होने वाला था.

श्रीलंका सरकार की देश के भीतर ही काफी निंदा हो रही है. करीब 133 ईसाई पादरियों ने परिषद से श्रीलंका सरकार के खिलाफ कठोर प्रस्ताव पारित करने का अनुरोध किया है. इन लोगों ने ये भी मांग की है कि इस पूरे मामले की जांच के लिए एक स्वतंत्र और अंतरराष्ट्रीय जांच एजेंसी बनाई जाए.

तमिल ईसाइयों का कहना है कि उनके धर्म, संस्कृति और भाषा का दमन किया जा रहा है. इनका आरोप है कि ऐसा करके हमें पूरी तरह से खत्म करने की साजिश की जा रही है.

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