चुनाव तय करेगा आर्थिक सुधार की बयार ?

सिल्वियो बर्लुस्कोनी
Image caption इटली के पूर्व प्रधानमंत्री सिल्वियो बर्लुस्कोनी ने मॉन्टी की सरकार से समर्थन वापस ले लिया था

इटली की जनता आम चुनावों के लिए तैयार दिख रही है. यह चुनाव आर्थिक चुनौतियों का सामना करने के अलावा यूरोजोन के लिहाज से भी अहम है.

दो हफ्ते पहले प्रकाशित एक रुझान के मुताबिक सेंटर-लेफ्ट गठजोड़ के नेता पीयर लुइगी बरसानी आगे चल रहे थे.

सेंटर-राइट ब्लॉक का नेतृत्व करने वाले पूर्व प्रधानमंत्री सिल्वियो बर्लुस्कोनी के मुकाबले वह कुछ अहम बिंदु के लिहाज से आगे है.

शनिवार को बर्लुस्कोनी ने टीवी साक्षात्कार दिया जिसे उनके विरोधी दलों ने चुनाव प्रचार के प्रतिबंध की अवहेलना करार दिया.

हालांकि बाद में बर्लुस्कोनी के कार्यालय से यह सफाई दी गई कि इस साक्षात्कार के लिए एक समझौते के आधार पर इजाज़त दी गई थी कि सोमवार को मतदान खत्म होने के बाद ही इसका प्रसारण किया जाएगा.

रविवार और सोमवार को होने वाले चुनाव में केंद्रीय गठबंधन भी अपना दमखम दिखाने के लिए तैयार है जिसका नेतृत्व निवर्तमान प्रधानमंत्री मारियो मॉन्टी कर रहे हैं.

जब बर्लुस्कोनी की पार्टी ने मॉन्टी की विशेषज्ञों की सरकार से समर्थन वापस ले लिया उसके बाद यह चुनाव तयशुदा समय से दो महीने पहले कराने का फैसला किया गया.

Image caption इटली का चुनाव मंदी और मितव्ययिता के उपायों के बीच कराया जा रहा है

यह चुनाव मंद अर्थव्यवस्था की चुनौतियों और मितव्ययिता के उपायों के बीच हो रहा है जिसके लिए पहले से ही आम लोगों में रोष है. हालांकि इटली की सरकार ने भविष्य में मितव्यिता के कदम उठाने का वादा किया है.

बहुमत न मिलने का डर

रविवार को मतदान के पहले दिन इटली में सुबह 8 बजे से लेकर 10 बजे तक मतदान केंद्र खुला रहेगा. सोमवार को फिर सुबह 8 बजे से शुरू होकर शाम 3 बजे तक मतदान होगा.

शुरुआती नतीजे शाम से आने शुरू हो जाएंगे.संसद के दोनों सदनों के लिए 47 योग्य उम्मीदवारों का निर्वाचन होगा.

बरसानी की सेंटर-लेफ्ट डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडी) जनमत सर्वेक्षण में करीब 35 फीसदी के आंकड़े से आगे चल रही है.

पूर्व कम्युनिस्ट बरसानी मॉन्टी के सुधारों का समर्थन करते हैं लेकिन साथ ही वह यह भी चाहते हैं कि वृद्धि और नौकरियों को बढ़ावा देने के लिए यूरोपीय नीति में थोड़ा परिवर्तन होना चाहिए.

फिलहाल इटली में किसकी सरकार बनेगी यह कहना मुश्किल लग रहा है और अगर संसद में किसी को बहुमत न मिला तो यूरोजोन फिर से संकट से जूझेगा.

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