चुनाव से गहराता इटली का राजनीतिक संकट

इटली में चुनाव
Image caption यूरोपीय संघ के नेता चाहते हैं कि इटली में बेरसानी के नेतृत्व में सरकार बने

इटली में आम चुनाव के आंशिक नतीजों से देश में राजनीतिक गतिरोध की स्थिति पैदा होती दिख रही है.

दो तिहाई वोटों की गिनती पूरी होने के बाद पीयर लुइगी बेरसानी के नेतृत्व वाली मध्य वामपंथी डेमोक्रेटिक पार्टी संसद के निचले सदन में मामूली बढ़त के साथ आगे चल रही है.

वहीं पूर्व प्रधानमंत्री सिल्वियो बैर्लुस्कोनी के नेतृत्व वाले मध्य दक्षिणपंथी गठबंधन को ऊपरी सदन सीनेट में बहुमत मिल सकता है. हालांकि स्थिति अभी पूरी तरह साफ नहीं है.

कॉमेडियन बेबे ग्रिलो की पार्टी की तीसरे स्थान पर है. दोनों ही सदनों के चुनाव में उसे अच्छी खासी कामयाबी मिली है.

मंडराती अस्थिरता

संवाददाताओं का कहना है कि अगर इटली में अंतिम चुनाव नतीजे शुरुआती रुझानों के अनुरूप ही रहे तो देश राजनीतिक अस्थिरता के दौर में दाखिल हो जाएगा, जबकि यूरोपीय संघ और शेयर बाजार इटली में स्थायी सरकार चाहते हैं.

इटली के चुनाव पर न सिर्फ यूरोप बल्कि उससे बाहर और भी कई देशों की नजरे लगी हैं. दरअसल इटली इस वक्त गहरी मंदी के दौर से गुजर रहा है और वहां रिकॉर्ड बेरोजगारी का आलम है, खास कर युवाओं के बीच ज्यादा बेरोजगारी है.

ऐसे में देश को एक ऐसी सरकार की जरूरत है जो स्थिर हो और देश को आर्थिक स्थिरता दे सके. अगर ऐसा नहीं हुआ तो इससे इटली का संकट और गहरा सकता है. इससे यूरोपीय संघ के लिए मुश्किलें बढ़ेंगी जो ग्रीस, आयरलैंड, स्पेन और पुर्तगाल जैसे देशों की खस्ता हालत के कारण परेशानियों में घिरा है.

Image caption अब तक दो तिहाई वोटो की गितनी पूरी हो चुकी है

नवंबर 2009 में बैर्लुस्कोनी को गहराते आर्थिक संकट और सेक्स स्कैंडल में नाम आने के बाद प्रधानमंत्री पद छोड़ना पड़ा था. इस के बाद मारियो मोंटी के नेतृत्व में टेक्नोक्रेट्स की अनिर्वाचित सरकार ने सत्ता संभाली थी.

वादे

बैर्लुस्कोनी ने मारियो मोंटी सरकार की कड़ी बचत योजना का विरोध करते हुए सरकार से समर्थन वापस ले लिया था और लोगों से वादा किया था कि उन्हें जो राशि बढ़े हुए टैक्स के तौर पर चुकानी पड़ी, वो सत्ता में आने पर उसे लौटाएंगे.

वहीं बेरसानी ने लोगों से वादा किया को वो सत्ता मिलने पर देश में वित्तीय अनुशासन कायम करने के लिए मोंटी सरकार की आर्थिक नीतियों को जारी रखेंगे लेकिन आर्थिक विकास की रफ्तार बढ़ाने और नौकरियों के अवसर पैदा करने पर उनका खास तौर से जोर रहेगा.

इटली की संसद के निचले सदन चैंबर ऑफ डेपुटीज के सदस्यों की संख्या 630 है जबकि ऊपरी सदन सीनेट में 315 सदस्य हैं. ये सांसद पांच पांच साल की अवधि के लिए चुने जाते हैं. सरकार बनाने के लिए दोनों ही सदनों में बहुमत होना चाहिए.

लेकिन चुनावी नतीजों में मिल रहे अस्थिरता के संकेतों के कारण कई हल्कों में ये आशंका भी जताई जा रही है कि कहीं इटली में ग्रीस जैसे हालात न पैदा हो जाएं. पिछले साल ग्रीस में छह हफ्तों के भीतर दो बार आम चुनाव कराने पड़े थे.

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