रूस: घरेलू हिंसा से रोज़ 40 महिलाओं की मौत

रूस में घरेलू हिंसा हर साल हज़ारों महिलाओं की जान ले रही है. सही आंकड़े तो मौजूद नहीं हैं लेकिन सरकार का अनुमान है कि रूस में हर साल छह लाख महिलाओं को घर में मार पीट का सामना करना पड़ता है.

हालांकि रूस में इस मुद्दे पर एक दशक से भी ज़्यादा समय से बहस हो रही है, लेकिन पति-पत्नी के बीच होने वाली हिंसा को रोकने के लिए एक क़ानून के मसौदे पर संसद में बहस होनी अभी बाक़ी है.

मॉस्को के बाहरी इलाक़े में बने एक महिला आश्रय गृह में अन्या भी रहती हैं जिनके दो बच्चे हैं. वो सात साल तक घरेलू हिंसा को झेलने के बाद यहां आई हैं.

अन्या बताती हैं, “मैं अपने बच्चों और दोस्तों के साथ कहीं बाहर गई थी, जब लौटी तो मैं बहुत थकी हुई थी. मैं सोना चाहती थी. लेकिन उसने मुझे सोने नहीं दिया. मैंने कहा कि ऐसा मत करो और उसने मुझे पीटना शुरू कर दिया.”

मजबूरी

अन्या और उनके पति का तलाक़ हुए दो साल हो गए हैं, लेकिन मॉस्को में रहना बहुत महंगा है. अन्या इस क़ाबिल नहीं थीं कि अपने और बच्चों के लिए मॉस्को में किराए पर मकान ले सकें. इसलिए वो तलाक़ के बाद भी अपने पति के साथ रहती रही.

वो बताती हैं, “मुझे नहीं समझ आया कि मैं क्या करूं. उसने इस बात का ख़्याल रखा कि किसी तरह की चोट के निशान न दिखें और किसी ने वो सब होते हुए देखा नहीं. मैं तो इंतज़ार कर रही थी कि कब मेरे बच्चे बड़े हों ताकि वो पुलिस को बता सकें कि क्या हुआ. मैंने कुछ रिकॉर्डिंग भी की लेकिन कोई फ़ायदा नहीं हुआ क्योंकि पुलिस सुनना ही नहीं चाहती थी."

वो आगे कहती हैं, "फिर एक दिन एक महिला पुलिसकर्मी आई और बोली, ‘तुम मेरी तरह भाग क्यों नहीं जाती हो.’ मतलब महिला पुलिसकर्मियों के साथ भी ऐसा होता है.”

मानवाधिकार संगठनों के शोध दिखाते हैं कि रूस में किसी भी सामाजिक या आर्थिक समूह की महिलाएं घरेलू हिंसा से अछूती नही हैं. वहां घरेलू हिंसा को अपराध नहीं माना जाता इसलिए इस बारे में सही-सही आंकड़े भी नहीं हैं.

लेकिन 2008 में गृह मंत्रालय ने अनुमान लगाया था कि हर साल छह लाख महिलाओं का शोषण होता है और इनमें से चौदह हज़ार की मौत हो जाती है. यानी हर दिन वहां घरेलू हिंसा से 40 महिलाएं मारी जा रही हैं.

लचर क़ानून

पुलिस कप्तान आंद्रेई लेवचुक ने ऐसी बहुत महिलाएं देखी हैं. वो कहते हैं कि घरेलू हिंसा बहुत आम है, लेकिन अगर ऐसी किसी घटना के वक़्त वो कहीं पहुंचते हैं और हिंसा के कोई निशान नहीं दिखते हैं तो इस स्थिति में वो किसी पति को सख़्त हिदायत देने के अलावा ज़्यादा कुछ नहीं कर सकते हैं.

Image caption बहुत सी पीड़ित महिलाएं जानती ही नहीं है कि उन्हें कहां से मदद मिल सकती है

वो कहते हैं, “क़ानून में घरेलू हिंसा की कोई परिभाषा नहीं है. अपराध संहिता में सिर्फ़ मार पिटाई का ज़िक्र है. इसके बाद मध्यम चोटें, गंभीर चोटें और हत्या जैसे मामले आते हैं. इतना ही नहीं, घरेलू हिंसा के मामले में पत्नियों को साबित करना होता है कि उन्हें पीटा गया है या सताया गया है.”

क़ानून के जानकारों का कहना है कि ये साबित करना ख़ासा मुश्किल काम होता है क्योंकि ये काफ़ी जटिल है.

इस मुद्दे पर 10 साल से भी ज़्यादा समय से चर्चा चल रही है और अब एक क़ानून का मसौदा तैयार किया गया है. इसमें घरेलू हिंसा को अपराध क़रार दिया गया है और जल्द ही इसे रूसी संसद में पेश किया जाएगा.

संबंधित समाचार