बांग्लादेश में हड़ताल और हिंसा, 60 की मौत

बांग्लादेश, हिंसा, हड़ताल
Image caption सरकार ने उपद्रवी तत्वों से निपटने के लिए सेना बुला ली है.

बांग्लादेश में एक इस्लामी नेता को मौत की सज़ा सुनाए जाने के बाद देश में शुरु हुए हड़ताल और विरोध प्रदर्शनों में मरने वालों का सिलसिला जारी है.

साल 1971 के मुक्ति संग्राम के दौरान कत्ल, बलात्कार और यातना के आरोपों में जमात-ए-इस्लामी के दिलावर हुसैन सईदी को मौत की सज़ा गुरुवार को सुनाई गई थी.

इसके बाद से बांग्लादेश में भड़के दंगों में तकरीबन 60 लोग मारे जा चुके हैं. समाचार एजेंसी एएफपी के मुताबिक़ इन दंगों में मरने वालों की संख्या 73 तक पहुंच गई है.

हड़ताल और हिंसा

हिंसा से निपटने के लिए सरकार ने देश के उत्तर में फौज़ को तैनात कर दिया है. रविवार को हुए खून-खराबे में बांग्लादेश में कम से कम 16 लोगों के मारे जाने की सूचना है.

देश के मजहबी नेताओं का कहना है कि ट्रिब्यूनल सियासी वजहों से बनाया गया था. हालांकि बांग्लादेश की सरकार इन आरोपों से इनकार करती है.

अदालत के फैसले के खिलाफ जमात-ए-इस्लामी ने दो दिनों की देश व्यापी हड़ताल का आह्वान किया है. उपद्रवी तत्वों से निपटने के लिए सरकार ने उत्तरी जिले बोगरा में सेना भेज दी है.

Image caption दंगों में मरने वालों की संख्या 60 तक जा पहुंची है.

पुलिस का कहना है कि जमात के हज़ारों कार्यकर्ताओं ने हाथ में लाठी और देसी बम लिए पुलिस चौकियों पर धावा बोल दिया था.

तीसरा फैसला

यह तीसरा मौका है जब ट्रिब्यूनल ने अपना फैसला सुनाया है. ट्रिब्यूनल में जमात के नौ नेताओं और बांग्लादेश नेशनल पार्टी के दो नेताओं पर मुकदमा चल रहा है.

इस मुकदमे के कारण हाल के दिनों में ढाका में हिंसक झड़पें हुई हैं जिसमें कई लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा है.

सईदी पर मुक्ति संग्राम के दौरान अल बद्र संगठन के साथ मिलकर कई तरह के अत्याचार करने का आरोप था जिसमें हिन्दुओं को जबरन इस्लाम कबूलवाना भी शामिल था.

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