नेटो को मांगनी पड़ी माफी

गुंटर कात्ज
Image caption आईएसएएफ के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल गुंटर कात्ज ने कहा कि विद्रोही सेना से जुडे़ होने की गलतफहमी में दो अफगान लड़के मारे गए

अफ़ग़ानिस्तान में मौजूद नेटो के नेतृत्व वाले अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा सहायता बल (आईएसएएफ) ने हेलीकॉप्टर से हुई गोलीबारी में दो अफगान लड़कों की मौत के लिए माफी मांगी है.

सेना ने दोनों लड़कों को विद्रोही समझ कर गुरुवार को उरूज़गान प्रांत में हमला किया था. आईएसएएफ के कमांडर ने कहा, “आईएसएएफ इस हादसे की पूरी जिम्मेदारी लेता है.”

विश्लेषकों का कहना है कि देश के आम नागरिकों की मौत से अफगानिस्तान की जनता और राष्ट्रपति हामिद करजई भी नाराज़ हैं जिन्होंने हाल में आवासीय क्षेत्र में विदेशी हवाई हमले से अपनी सेना को हटाने का आदेश दिया था.

उन्होंने यह कदम 13 फरवरी की घटना के बाद उठाया जब अफगान सेना की गुजारिश पर नेटो के हवाई हमले में 10 लोग मारे गए थे जिनमें पांच महिलाएं और चार बच्चे थे.

गैरइरादतन हत्या

शनिवार को एक बयान में जनरल जोसेफ डनफोर्ड ने कहा, “मैं निजी तौर पर माफी मांगता हूं और मारे गए लड़कों के परिवार के लिए सांत्वना व्यक्त करता हूं.”

उन्होंने कहा कि दोनों लड़के मवेशियों की रखवाली कर रहे थे उस वक्त गठबंधन सेना ने यह सोच कर उन पर गोली चला दी कि वे विद्रोही बल से ताल्लुक रखते हैं.

उन्होंने अपने बयान में कहा, “जिन परिवारों को हमारी वजह से आघात पहुंचा है हम उनकी और उनके समुदाय की बेहतरी सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं.”

जनरल डनफोर्ड ने कहा कि आईएसएएफ और अफगान के जांचकर्ता केंद्रीय प्रांत के उस गांव का पहले ही दौरा कर चुके हैं और वहां के स्थानीय नेताओं से मुलाकात कर चुके हैं जहां वे लड़के रहते थे.

किसने किया हमला

एएफपी समाचार एजेंसी के मुताबिक ऑस्ट्रेलियाई सेना ने उन लड़कों पर गोली मारी.

उरूजगान प्रांत के गवर्नर अमीर मोहम्मद अखुंदजादा ने एएफपी को दिए गए अपने बयान में कहा है, “ऑस्ट्रेलिया की सेना ने उन लड़कों पर गोली चलाई. हालांकि यह हमला गलतफहमी में हुआ था न कि जानबूझ कर ऐसा किया गया था.”

उन्होंने कहा कि ऑस्ट्रेलियाई सेना और आईएसएएफ इस घटना की जांच कर रही है.

उरूजगान प्रांत में करीब 1,500 ऑस्ट्रेलियाई सैनिक तैनात हैं. वे वहां अफगान सैनिकों को प्रशिक्षण देने और उन्हें दिशानिर्देश देने के लिए मौजूद हैं.

संबंधित समाचार