सीरिया: संयुक्त राष्ट्र के शांति-दूतों को बंधक बनाया

  • 7 मार्च 2013

सीरिया के गोलान हाइट्स इलाके में हथियारबंद विद्रोहियों ने सरकार पर दबाव बनाने के लिए संयुक्त राष्ट्र के 20 शांति-दूतों को बंधक बना लिया लिया है.

खुद को यार्मुक के शहीद बताने वाले इन विद्रोहियों ने इंटरनेट पर एक वीडियो जारी किया जिसमें उन्होंने संदेश दिया है कि वे संयुक्त राष्ट्र के इन कर्मचारियों को तब तक नहीं रिहा करेंगे जब तक बशर अल असद की सेना जमला गांव से अपना कब्ज़ा नहीं हटाती.

यार्मुक सीरिया के दमिश्क शहर में एक शरणार्थी शिविर है जहां ज़्यादातर फलस्तीनी शरणार्थी रहते हैं. संयुक्त राष्ट्र के इन कर्मचारियों को गोलान पहाड़ियों के इलाके में पकड़ा गया है जो सीरिया और इसराइल की सीमा पर है.

गोलान हाइट्स के ज़्यादातर हिस्से पर इसराइल का कब्ज़ा है. इन लोगों को बंधक बनाने वाले विद्रोहियों के संगठन ‘यारमूक शहीद सेनादल’ ने बीबीसी से हुए बातचीत में कहा है कि उन्होंने सीरियाई सरकार द्वारा आम लोगों पर किए जा रहे हवाई हमलों को रोकने के लिए इन लोगों को बंधक बनाया है.

नई मुसीबत?

इसराइल ने 1967 से गोलान की पहाड़ियों पर कब्ज़ा कर रखा है. कुछ समय पहले इस इलाके में राष्ट्रपति बशर असल असद और विद्रोहियों के बीच हिंसक झड़पें हुई हैं.

इसराइल का कहना है कि उसकी विदेश नीति सीरियाई संघर्ष में हस्तक्षेप की नहीं है लेकिन जिन इलाकों पर उसका कब्ज़ा है वहां संघर्ष का उसने विरोध किया है. इसराइल ने इस इलाके में सीरियाई शर्णार्थियों के घुसने पर भी पाबंदी लगा दी है.

हालांकि सीरिया के प्रमुख विपक्षी दल ‘फ्री सीरियन आर्मी’ के प्रमुख जनरल सलीम इदरिस का कहना है कि वो संयुक्त राष्ट्र की ओर से इलाके में शांति कायम करने आए लोगों को अगवा किए जाने की कड़ी निंदा करते हैं और उन्हें जल्द से जल्द छुड़ाने की हर संभव कोशिश करेंगे.

सीरिया में पिछले दो सालों से बशर अल असद और विद्रोही फ्री सीरियन आर्मी के बीच संघर्ष चल रहा है. इस बीच इस नए विद्रोही गुट की बगावत राष्ट्रपति के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो सकती है.

अस्थिरता

संयुक्त राष्ट्र के एक प्रवक्ता एडुयार्डो डेल बुए का कहना है, ''हमें खबर मिली है कि कुछ 30 बंदूकधारी विद्रोहियों ने संयुक्त राष्ट्र के 20 शांति-दूतों को बंदी बना लिया है. ये कर्मचारी रोज़ की तरह सप्लाई मिशन पर थे, हम वहां एक टीम भेज कर स्थिति पर काबू पाने की कोशिश में लगे हैं.''

इस बीच ब्रिटेन ने कहा है कि वो सीरिया में आम लोगों की ज़िंदगी बचाने के लिए सीरियाई विपक्ष को हथियारबंद वाहन और सुरक्षा कवच देगा.

ब्रिटेन के विदेश मंत्री विलियम हेग के मुताबिक सीरीया में आम लोगों की मदद, बचाव में काम आने वाले हथियारों और महामारियों को रोकने मे मददगार तंत्र विकसित करने के लिए ब्रिटेन की ओर से कई लाख पाउंड का मदद दी जाएगी.

विलियम हेग के मुताबिक सीरिया में मानवीय संकट को खत्म करने के लिए हथियारों की ये कानूनी और वाजिब मदद ज़रूरी है. हालांकि ब्रिटेन के कुछ सांसदों का मानना है ब्रिटेन सैन्य हस्तक्षेप की तरफ बढ़ रहा है.

बीबीसी संवाददाता जोनाथन मार्कस के मुताबिक ब्रिटेन के विदेश सचिव विलियम हेग के इस फैसले से ज़ाहिर होता है कि सीरिया की स्थिति ब्रिटेन के लिए क्यों महत्वपूर्ण है.

अंतर्राष्ट्रीय बहिष्कार?

सीरिया में बढ़ते चरमपंथ से मध्यपूर्व में शांति और स्थिरता को खतरा है और मानवीय संकट बढ़ता जा रहा है.

हालांकि इसके बावजूद ब्रिटेन सीधे तौर पर सीरियाई विपक्ष को हथियार देने के लिए रज़ामंद नहीं हुआ है. ब्रिटेन ने फिलहाल विपक्ष को सलाह देने, इलाके में शांति बनाए रखने के लिए विपक्षी लड़ाकों को प्रशिक्षण देने और रणनितिक सहायता देने के लिए ही हामी भरी है.

ब्रिटेन की ओर से दिए जा रहे हथियारबंद वाहन सीरियाई विपक्ष के नेताओं की सुरक्षित यात्रा के लिए हैं.

इस पूरे घटनाक्रम से ब्रिटेन की विदेश नीति में हुए अहम बदलाव का संकेत मिलता है लेकिन सीरिया में विपक्ष को हथियारों की जो मदद चाहिए उसके लिहाज़ से ये मदद बेहद कम है.

सीरिया में पिछले दो साल से जारी संघर्ष में अबतक 70,000 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और दस लाख से ज्यादा लोग बेघर हुए हैं.

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