33 साल बाद मिला गायब सोवियत सिपाही

Image caption अब उन्हें शेख़ अब्दुल्लाह के नाम से जाना जाता है

सोवियत संघ के एक सैनिक जो करीब 33 सालों पहले ‘गायब’ हो गए थे, उन्हें अफगानिस्तान के हेरात प्रांत में कबायली लोगों से साथ रहते हुए पाया गया है.

वे इन कबायली लोगों में इस कदर घुल-मिल गए हैं कि इन्होंने अपना नाम भी बदलकर शेख अबदुल्लाह रख लिया है और हर्बल दवाओं का काम करने लगे हैं.

रूस की एक समाचार एजेंसी के मुताबिक ये सैनिक उजबेकिस्तान से थे और सोवियत संघ के उन वरिष्ठ सैनिकों में से एक हैं जिन्होंने कई जंगों में अपना साहस दिखाया था.

इनका असली नाम अलैक्जेंडर लावरेंत्येव बताया जा रहा है और लगभग एक साल तक चली तलाश के बाद इन्हें ढूंढ लिया गया है.

1980 में एक युद्ध में वे घायल हो गए थे लेकिन कुछ स्थानीय अफगानियों ने इन्हें पनाह दी और इनका इलाज किया.

अफगानिस्तान में कब्ज़े के बाद वहां सोवियत समर्थित सरकार और मुजाहिदीन के बीच हुई भीषण लड़ाई में कम से कम 15,000 रेड आर्मी सैनिक और लाखों अफगानी लोग मारे गए थे.

अफगानिस्तान बना घर

अलैक्जेंडर लावरेंत्येव अकेले ऐसे सैनिक नहीं हैं, जो युद्ध के बाद अफगानिस्तान के ही हो कर रह गए.

रूस के वरिष्ठ सैनिकों का लेखा-जोखा रखने वाली समिति के मुताबिक करीब 264 सोवियत सैनिक अफगानिस्तान में लापता हो गए थे, जिनमें से आधे रूस के हैं.

सोवियत के युद्ध से बाहर आने के बाद 1989 में समिति ने पाया कि कई सैनिकों ने अफगानिस्तान में ही रहने का फैसला ले लिया था.

समिति का कहना है कि वे उन सभी सैनिकों को ढूंढने का काम कर रहे हैं.

अलैक्जेंडर लावरेंत्येव उर्फ शेख अबदुल्ला शादी-शुदा थे, लेकिन उनकी पत्नी की मौत हो चुकी थी. उनके कोई बच्चे भी नहीं थे.

समिति के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि शेख अबदुल्लाह के शरीर पर आज भी युद्घ के घाव दिखाई देते हैं.

जब इन्हें उज़्बेकिस्तान ले जाया गया तो उन्होंने न केवल अपना घर पहचान लिया बल्कि अपने रिश्तेदारों को भी पहचान लिया.

उन्हें टूटी-फूटी रूसी भाषा ही आती है.

साल 2009 में बीबीसी संवाददाता लीस डूसेट ने यूक्रेन के दो पूर्व सैनिकों का इंटरव्यू किया था, जो उत्तरी अफगानिस्तान में मुसलमान बन कर रह रहे थे.

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