एक नदी से निकल रहे हैं हजारों मृत सूअर

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Image caption अभी तय यह साफ़ नहीं हो पाया है कि इनती बड़ी संख्या में सुअरों की मौत कैसे हुई.

चीन के अधिकारियों का कहना है कि शंघाई के हंगपू नदीं में मिल रहे सूअरों के शवों की संख्या क़रीब छह हज़ार तक पहुंच गई है.

शंघाई के अधिकारियों की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि हंगपू नदी से मंगलवार तक पांच हज़ार नौ सौ सोलह मृत सूअर निकाले गए थे.

अधिकारियों का कहना है कि इसका नदी के पानी पर कोई असर नहीं पड़ा है और वह सरकार की ओर से तयशुदा मानकों के तहत साफ सुथरा है.

मौत का रहस्य

माना जा रहा है कि मृत सूअर जियाशिंग से आ रहे हैं. यह झेजियांग का पड़ोसी राज्य है. हालांकि अभी यह साफ़ नहीं हुआ है कि इतने सूअरों की मौत कैसे हुई है.

शंघाई के स्थानीय प्रशासन की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि हंगपू नदी का पानी अभी सुरक्षित है. यहां के लोगों के लिए यह नदी पीने के पानी का प्रमुख स्रोत है. बयान के मुताबिक़ यहां के बाज़ार में अभी सूअर का कोई संक्रमित गोश्त नहीं मिला है.

माइक्रो ब्लॉगिंग वेबसाइट ‘ट्विटर’ की तरह चीन की मशहूर बेवसाइट 'वीबो' पर हंगपू नदी में मिल रहे सूअरों को लेकर चर्चा का बाज़ार गर्म है.

इस पर यूझू डुअलिस्ट नाम से एक व्यक्ति ने लिखा है, ‘‘इस नदी के पानी का रंग गोबर की तरह है. अगर वहां कोई मरा हुआ सूअर न हो तब भी आप उसका पानी नहीं पी सकते हैं.’’

सरकार की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि नदी से मिलने वाले मृत सूअरों की संख्या कम होने लगी है.

इनकी जांच में कुछ सूअरों में पारसिन सिरकोवायरस नाम का वायरस मिला है. यह सूअरों में होने वाली एक सामान्य बीमारी है. इसका इंसानों पर कोई असर नहीं होता है.

कहीं मौसम का असर तो नहीं

ख़बरों में कहा गया है कि हो सकता है कि इन सूअरों को जियाशिंग के किसी सूअर फ़ार्म से नदी में डाला गया हो.

जियाशिंग के स्थानीय प्रशासन के प्रवक्ता वॉंग डेंगफ़ेग ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘हम इस संभावना को दरकिनार नहीं कर सकते कि शंघाई में मिल रहे सूअर जियाशिंग के थे. लेकिन इसको लेकर हम पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं.’’

हालांकि सूअरों के कान में मिले टैग इशारा करते हैं कि वे जियाशिंग के थे. सूअरों के जन्मस्थान के बारे में एकमात्र यही जानकारी है.

जियाशिंग के अधिकारियों का यह भी कहना है कि इन सूअरों की मौत की एक वजह ठंडा मौसम भी हो सकता है.

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