आखिर कौन है आगे? ऐपल या गूगल?

Image caption गूगल के शेयरों में उछाल और ऐपल के शेयरों में गिरावट देखी गई है.

सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र की दुनिया की दो दिग्गज कंपनियों को लेकर निवशकों की धारणा में व्यापक बदलाव आया है.

आईफ़ोन और आईपॉड की ज़ोरदार ब्रिक्री के बाद, कुछ समय पहले तक 'ऐपल' वॉल स्ट्रीट पर निवेशकों की पहली पसंद हुआ करती थी.

लेकिन शेयर बाज़ार में उसके शेयरों में उल्लेखनीय गिरावट देखी जा रही है.

इस बीच ऐसा लग रहा है कि 'गूगल' ऐसी कंपनी से भिड़ने की तैयारी में है जो निवेशकों की नज़र में थोड़ा ग़लत कर सकती है.

उतार-चढ़ाव

इस साल पांच मार्च को ऐपल के शेयरों में इस साल की सबसे अधिक गिरावट देखी गई. उसके बाद से इसमें मामूली सुधार देखा गया है. वहीं पिछले छह महीनों में कंपनी के बाज़ार मूल्य में क़रीब 50 फ़ीसदी की गिरावट आई है.

गूगल के शेयर दूसरे रास्ते पर बढ़ रहे हैं, मार्च के शुरू में ये अपने सर्वाधिक ऊंचाई पर थे और हाल के दिनों में उनमें उससे नीचे कारोबार नहीं हुआ है.

बीजीसी फ़ाइनेंशियल के तकनीकी विश्लेषक कॉलिन गिलिस कहते हैं, ''गूगल का चढ़ना ऐपल को आइना दिखाने जैसा है.''

गिलिस का मानना है, "निवेशकों की नज़र भविष्य में राजस्व बढ़ाने के स्रोतों पर है, ऐसा लगता है कि गूगल के पास विचारों की भरमार हैं, जो आने वाले समय में उसके लिए पैसों की बरसात कर सकते हैं, वहीं ऐपल के बारे में यह पता नहीं चल पा रहा है कि भविष्य में उसके पास पैसा कहां से आएगा."

वह कहते हैं, ''रहस्यमय बने रहना ऐपल के लिए ऐतिहासिक रूप से सकारात्मक था. लेकिन अब यह नकारात्मक हो रहा है.''

निश्चित रूप से इससे शेयरधारकों का विश्वास डिगा है, आने वाले दिनों में यह समस्या और गहराती जाएगी.

सलाह देने वाली फर्म 'फ़ॉरेस्टर रिसर्च' के जेम्स मैक्वि कहते हैं, ''ऐपल का यह दुख एक बड़े मुद्दे को दर्शाता है.''

वह कहते हैं,''उपकरण बहुत दिन तक नहीं रहेंगे. महत्वपूर्ण यह है कि आपका अपने ग्राहकों के साथ संबंध कैसा है.''

आईट्यून म्यूजिक लाइब्रेरी और मोबाइल के लिए बेचे जा रहे एप्लीकेशन की सफलता का उदाहरण देते हुए वे कहते हैं, ''ऐपल और अच्छा कर सकता है.''

बढ़ता मुनाफ़ा

जेम्स मैक्वि कहते हैं कि समस्या सॉफ़्टवेयर और सेवाओं के साथ है, जबकि आईफ़ोन और आईपॉड की ब्रिक्री से मुनाफ़े में जोरदार बढ़ोतरी हुई है, इस वजह से पिछले साल ऐपल के शेयरों में अभूतपूर्व उछाल आया था.

वह कहते हैं,''निवेशकों ने शेयरों को ऊंचाई पर इसलिए पहुंचाया क्योंकि वे ऐपल के उपकरणों के जादू में विश्वास करते हैं, लेकिन यह धुंधला पड़ने की शुरुआत जैसा लगता है.''

'एंडर्स एनालिसिस' के बेनेडिक्ट इनवास कहते हैं, ''ऐपल का बाज़ार स्थिर है और इसके मुनाफ़े का दो तिहाई हिस्सा मोबाइल हैंडसेट की बिक्री से आ रहा है.'' इनवास इसके शेयरों के भाव में आ रही गिरावट को पहचानते हैं.

ऐपल के आईफ़ोन के बाजा़र में सबसे महंगा होने की ओर इशारा करते हुए वे कहते हैं कि बुनियादी सवाल यह है कि आने वाले कुछ सालों में कितने लोग 650 डॉलर का फ़ोन खरीदेंगे.

साल 2010 में ऐपल के राजस्व में क़रीब दोगुना बढोतरी हुई थी, 2011 में भी ऐसा ही हुआ, लेकिन 2012 में यह मुश्किल से 40 फ़ीसदी ही बढ़ पाया. अब यह 156 अरब डॉलर है.

भविष्य पर नज़र

Image caption गूगल ग्लास प्रोजक्ट पर काम कर रहा है.

अब यह देखते हैं कि इसने गूगल को कहॉं छोड़ा है.वह स्मार्टफो़न में अच्छा काम कर रहा हैं, बाज़ार के निचले छोर पर उसके एंड्रायड नाम के साफ़्टेवयर को उल्लेखनीय सफलता मिली है.

एंड्रायड आधारित हैंडसेट अलग-अलग निर्माता बनाते हैं. इसके बाद भी वह अधिकांश मुनाफा बटोर रहा है.

गूगल इससे सीधे पैसा नहीं बनाता है, क्योंकि वह मुफ्त में मिलता है. लेकिन वह इसका उपयोग करने वालों के लिए उसे लॉक कर देता है.

गूगल का मुख्य आधार सर्च इंजन है, उसने जीमेल, गूगल प्लस और गूगल प्ले जैसे वेब आधारित उत्पादों से लोगों के डिजिटल जीवन में महत्वपूर्ण जगह बनाई है. यह आईट्यून का जवाब है.

लेकिन 'बीजीसी फ़ाइनेंशियल' के गिल्स के लिए गूगल के शेयरों में आए उछाल के लिए यह मुख्य कारण नहीं है. उनका मानना है कि कंपनी व्यापार के नए इलाकों से अधिक पैसा बना रही है. इसके लिए वह गूगल की वीडियो सेवा यू ट्यूब का उदाहरण देते हैं.

इसके अलावा गूगल के ग्लास प्रोजेक्ट को लेकर भी लोगों में उत्सुकता है, इससे वह अधिक समय तक पैसा बना सकता है. गूगल इंटरनेट से जुड़े एक चश्में पर काम कर रहा है.

निवेशकों का ध्यान इस बात पर है कि वे ऐसा क्या कर रहे हैं जिससे तीन से पांच साल तक पैसा कमाया जा सकता है.

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