बलात्कार मामले में गिरफ़्तार पत्रकार रिहा

सोमाली पत्रकार अब्दीअज़ीज़ अब्दीनुर इब्राहिम
Image caption अब्दीनुर इब्राहिम को राष्ट्रीय संस्थाओं का अपमान करने का दोषी पाया गया था.

सोमालिया में सुप्रीम कोर्ट ने उस पत्रकार को रिहा कर दिया है जिसे एक कथित बलात्कार पीड़िता का इंटरव्यू करने के लिए जेल की सज़ा हुई थी.

अब्दीअज़ीज़ अब्दीनुर इब्राहिम नाम के 27-वर्षीय पत्रकार ने एक महिला का इंटरव्यू किया था जिसने आरोप लगाया था कि सरकारी सैनिकों ने उनका बलात्कार किया है.

अब्दीनुर इब्राहिम और इस महिला को राष्ट्रीय संस्थाओं का अपमान करने का दोषी क़रार दिया गया था और उन्हें इस वर्ष फ़रवरी में जेल की सज़ा सुनाई गई थी. पत्रकार और महिला को पहले एक-एक साल की जेल की सज़ा मिली थी.

व्यापक निंदा

मार्च की शुरुआत में महिला को अपील पर रिहा कर दिया गया था लेकिन कहानी नहीं छापने के बावजूद पत्रकार जेल में ही रहा.

लेकिन 17 मार्च यानी रविवार को सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अब्दीनुर इब्राहिम के ख़िलाफ़ आरोप वापस ले लिए गए हैं.

कोर्ट से निकल कर इब्राहिम ने कहा, "मैं बहुत खु़श हूं कि मुझे मेरी आज़ादी वापस मिल गई है. मैं अपने वकीलों समेत उन सभी का शुक्रिया अदा करना चाहता हूं जिन्होंने मेरी रिहाई के लिए काम किया."

इस मामले की दुनिया भर में निंदा हुई थी. मानवाधिकार संगठनों और पत्रकारों का कहना था कि ये मामला राजनीति से प्रेरित है. संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की-मून ने कहा था कि वो "बेहद निराश" हैं.

मामला

महिला ने तथाकथित बलात्कार की घटना मोगादिशु के एक थाने में दर्ज कराई थी. वादी पक्ष के वकीलों का आरोप था कि अब्दीनुर इब्राहिम ने महिला और अन्य कुछ लोगों को झूठ बोलने के लिए पैसा दिया था.

मामले की सुनवाई कर रहे जज ने उन विवादित मेडिकल सबूतों के आधार पर महिला को दोषी क़रार दिया था जिनके मुताबिक़ महिला का बलात्कार नहीं हुआ था.

अब्दीनुर इब्राहिम को जनवरी में हिरासत में लिया गया था. पुलिस का आरोप था कि वे विस्थापितों के शिविरों में बलात्कार पर अल-जज़ीरा की एक मीडिया रिपोर्ट के लिए तथ्य जुटा रहे थे.

वहीं अल-जज़ीरा नेटवर्क का कहना था कि पत्रकार, सोमाली रेडियो स्टेशनों और अंतरराष्ट्रीय मीडिया के लिए काम कर रहा था लेकिन वो विस्थापितों के शिविरों में बलात्कार वाली कहानी में शामिल नहीं था.

सोमालिया में आठ साल के परिवर्ती शासन के बाद पिछले वर्ष सितंबर में संयुक्त राष्ट्र-समर्थित सरकार ने सत्ता संभाली थी.

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