इसराइल में है ईरान पर हमला करने की हिम्मत

Image caption ईरान के परमाणु कार्यक्रम से इस्राइल में तनाव है

इसराइली नेतृत्व में ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर बढ़ती बेचैनी के बीच अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा इसराइल पहुंच गए हैं. संभावना है कि वो सैनिक कार्रवाई को रोकने की कोशिश करेंगे.

इसराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतान्याहू ने पिछले साल सितंबर में मामले को शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाने की जो कोशिशों को जल्द ही ख़त्म हो जाने वाला वसंत करार दिया था.

उस समय नेतान्याहू ने दुनिया भर के दर्शकों के आगे ईरान के परमाणु बम की तस्वीर बनाई थी और लाल पेन से उसके शीर्ष पर एक रेखा खींच दी थी. स्पष्टतः ये बताने के लिए ईरान का यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम जिस दिशा में जा रहा है इसराइल उसे जाने नहीं देगा.

शांति वार्ता पर भरोसा नहीं

इससे कुछ दिन पहले ही इसराइल के एक समयसीमा तय करने की सार्वजनिक घोषणा को अमरीका ने रोक दिया था कि वो ‘हर संभव तरीके से’ समझौते की कोशिश करेगा.

लेकिन नेतान्याहू का मानना है कि ऐसी बातचीत से ईरान को अपना परमाणु कार्यक्रम पूरा करने के लिए समय ही मिला है और इसका तब तक कोई फ़ायदा नहीं जब तक इसमें सैन्य हस्तक्षेप की धमकी शामिल न हो.

लेकिन इस बात पर पर्यवेक्षक और विश्लेषक एकमत नहीं हैं कि क्या ये नेतान्याहू सचमुच हमले का आदेश दे सकते हैं या ये उनकी अमरीका पर दबाव बनाने की रणनीति है ताकि वो मामले को सुलझाने के लिए ज़्यादा मज़बूत कार्रवाई करे.

इसराइल की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के पूर्व प्रमुख गिओरा ईलैंड कहते हैं, ''वो धमकी बिल्कुल नहीं दे रहे. उन्हें लगता है कि अगर अंत में दो ही विकल्प बचते हैं कि या तो परमाणु हथियारों वाले ईरान को बर्दाश्त करना सीख लो या फिर उसे इसराइली तरीकों से रोको, तो वो दूसरे विकल्प को पसंद करेंगे.''

इसराइल गुप्तचर एजेंसी

इसराइली गुप्तचर कार्यक्रम के अनुसार नेतान्याहू ने सेना को 2010 में ज़रूरत पड़ने पर कुछ घंटों में हमले के लिए तैयार रहने का आदेश जारी कर दिया था. लेकिन इसराइली सेना और गुप्तचर सेवा के तीव्र विरोध के बाद इसे ख़ारिज कर दिया गया.

हमलों के आदेश का विरोध करने वालों में आंतरिक गुप्तचर सेवा के डायरेक्टर युवाल डिस्किन भी शामिल थे. उनका कहना था कि ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमला करने से इसे रफ़्तार ही मिलेगी.

हालांकि इस तर्क के विरोध में भी लोग हैं. ये लोग इराक के ओसिराक परमाणु रिएक्टर पर 1981 में हुए हमले का हवाला देते हैं.

हरज़लिया में इंस्टीट्यूट ऑफ़ पॉलिसी एंड स्ट्रेटेजी में डायरेक्टर ऑफ़ स्टडीज़ डॉ श्मूएल बार कहते हैं, “जब हम ओसिराक पर हमले की योजना बना रहे थे तब हमें लगता था कि इससे इराक का परमाणु कार्यक्रम तीन से चार साल पीछे चला जाएगा. लेकिन ये दस साल पीछे चला गया.”

वो कहते हैं, “जब आप कोई काम करते हैं तो उसके परिणाम के बारे में ठीक से कुछ नहीं कह सकते.”

Image caption ईरानी राष्ट्रपति महमूद अमहदीनेजाद

ईरान पर हमला करने में सबसे महत्वपूर्ण कारक इसराइली गुप्तचर एजेंसी की रिपोर्ट होगी. हालांकि गुप्तचर एजेंसी ने अभी तक हमला किए जाने के कोई लक्षण नहीं दिखाए हैं लेकिन इसकी राय कभी भी बदल सकती है . अगर उसे लगता है कि ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह खुमैनी ने परमाणु बन बनाने का फ़ैसला कर लिया है तो वो ऐसा कर सकती है.

तेल अवीव में इंस्टीट्यूट फॉर नैशनल सिक्योरिटी स्टडीज़ के पूर्व ब्रिगेडियर जनरल श्लोमो ब्रोम कहते हैं, ''ईरान पर इसराइली हमले का अंदेशा सच्चा है. ख़ासतौर पर कुछ ख़ास परिस्थितियों में जैसे कि अगर इसराइल को विश्वसनीय गुप्तचर सूचना मिलती है कि ईरान परमाणु सैन्य क्षमता हासिल करने ही वाला है. ये वो अंतिम चरण है जिसकी नेतान्याहू कभी इजाज़त नहीं देंगे.''

कोरी धमकियां!

लेकिन नेतान्याहू की लगातार चेतावनियों से कई लोगों को ये भी लगता है कि वो कुछ करेंगे नहीं.

ऐसे लोगों में से एक, योस्सी मेलमैन, इसराइल के प्रमुख सिक्योरिटी और इंटेलीजेंस पत्रकार हैं.

वो कहते हैं, “नेतान्याहू की धमकियां असली नहीं हैं. वो इस बारे में हमेशा बोलते रहते हैं- अगर आप इतना ज़्यादा बोलते हैं तो मुझे नहीं लगता कि आपकी कुछ करने की इच्छा है. क्योंकि पहले जब इसराइल और इसराइली नेताओं ने कुछ करना चाहा तो वो बिना कुछ बोले किया.”

स्पाइस अगेंस्ट आर्मागेडान: इनसाइड इसराइल्स सीक्रेट वॉर्स के लेखक मेलमैन कहते हैं, “जब हमने ईराक के परमाणु रिएक्टर को नष्ट किया और 2007 में सीरिया के न्यूक्लियर रीएक्टर का मामला ऐसा ही है.”

वो कहते हैं, “मुझे लगता है कि इसराइल कई वजहों से ईरान पर हमला नहीं करेगा और इनमें सबसे ऊपर है अमरीका नहीं चाहता कि ऐसा हो- ये बिल्कुल साफ़ है.”

इसराइल के ईरान पर हमला करने पर अमरीका की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि ये इसराइली लोगों की राय को भी प्रभावित करती है.

पिछले साल गर्मी और सर्दी में किए गए जनमत सर्वेक्षण के अनुसार इसराइल का बहुमत अमरीकी सहायता के बिना ईरान के खिलाफ़ सैन्य कार्रवाई के ख़िलाफ़ है.

इसराइल ईरान को प्यार करता है!

कई लोग ऐसे हैं जो मानते हैं कि ईरान पर किसी सूरत में हमला नहीं होगा.

ग्राफ़िक डिजा़इनर रॉनी एड्रे ने फ़ेसबुक पर एक अभियान शुरू किया है ‘इसराइल ईरान को प्यार करता है’

हाल ही में इसका एक साल पूरा हुआ है और इसे 1,08,000 लाइक मिले हैं, जिनमें से एक तिहाई इसराइल से हैं.

वो कहते हैं, “हम ईरान से साथ लडाई की बात करीब दस साल से ज़्यादा वक्त से कर रहे हैं, मुझसे पूछिए तो ये सिर्फ़ एक धमकी है.”

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