दिल्ली गैंगरेप ने दिखाई बांग्लादेश को राह

Image caption महिलाओं के प्रति होने वाली हिंसा को लेकर बांग्लादेश में काफी प्रदर्शन हुए

पिछले साल दिसंबर महीने की शुरुआत में बांग्लादेश की राजधानी ढाका से करीब सौ किलोमीटर दूर तंगेल नाम के एक छोटे शहर में एक चौदह वर्षीय छात्रा पर हमला किया गया और उसके साथ सामूहिक बलात्कार हुआ.

बलात्कार करने वालों ने बाद में लड़की को रेलवे लाइन पर फेंक दिया. ढाका में उसे जब अस्पताल ले जाया गया तो उसके शरीर पर गंभीर चोटें थीं और वो बेहद सदमे में थी.

इस घटना के बाद बांग्लादेश की मीडिया में ये ख़बर छा गई. ज्यादातर अखबारों ने इस पहले पन्ने पर जगह दी और टेलीविज़न चैनलों पर इसे प्रमुखता से दिखाया गया.

ये घटना बलात्कार की उन तमाम घटनाओं में से एक थी जिन्हें मीडिया ने जनवरी और फरवरी महीनों में खूब कवर किया. यही वह समय भी था जब पड़ोसी देश भारत की राजधानी दिल्ली में गैंगरेप की शिकार लड़की की ख़बर कई दिनों तक मीडिया की सुर्खियां बनी रही.

बांग्लादेश के एक प्रमुख अंग्रेजी अखबार द डेली स्टार के उप संपादक इनाम अहमद कहते हैं कि इस घटना ने बांग्लादेश के पत्रकारों को हिला कर रख दिया.

वे कहते हैं, “हो सकता है कि समय-समय पर बलात्कार की घटना की रिपोर्टिंग में किसी समय संवेदनहीनता की भी स्थिति आ जाती हो, लेकिन दिल्ली की घटना ने हम सबको नींद से जगा दिया. इसके बाद से देश भर के पत्रकार ये महसूस करने लगे कि ऐसी घटनाएं हमारे देश में भी हर जगह हो रही हैं.”

सामाजिक बदलाव

बांग्लादेश जैसे रूढ़िवादी और पितृसत्तात्मक समझे जाने समाज में मीडिया ने उस समाज को जगाने और सोचने को मजबूर कर दिया जहां बलात्कार की शिकार महिला किसी से अपने ऊपर हुए जुल्म के बारे में बात भी नहीं करती है.

एक निजी टीवी चैनल के न्यूज एडिटर मसूद कमाल कहते हैं, “जब दिल्ली की घटना हुई तो निश्चित रूप से उसने एक हलचल पैदा कर दी. हमारे पत्रकारों को भी डर लगने लगा कि कहीं इस तरह की ख़बरें हमसे छूट तो नहीं रही हैं. तुरंत इस तरह की घटनाओं पर लोग अपना ध्यान केंद्रित करने लगे.”

लेकिन बलात्कार की ख़बरों की इस तरह की चर्चा ने उस समाज पर भी असर डाला है जहां बलात्कार पीड़ित महिला किसी से मदद की उम्मीद नहीं कर सकती थी.

ढाका के पुलिस उपायुक्त मोहम्मद मसूदुर्रहमान ऐसा ही मानते हैं. वे कहते हैं, “हम लोगों ने अब एक अलग यूनिट बना दी है जिसका काम है महिलाओं की मदद और मामले की जांच करना. इस यूनिट के सभी अधिकारी और दूसरे कर्मचारी महिलाएं ही हैं.”

महिलाओं की सोच

इस बारे में खुद महिलाओं के विचारों में भी बदलाव आया है. संजीदा डेज़ी ढाका विश्वविद्यालय में पढ़ाई करती हैं. वो कहती हैं, “बहुत से लोग ये सोचते हैं कि ऐसे बदलाव मीडिया की वजह से आ रहे हैं, न कि ये उनके जीवन के अंग हैं. इन सबके बावजूद लोगों में ऐसी घटनाओं के प्रति इतना गुस्सा नहीं है कि विरोध किया जाए.”

हालांकि बहुत सी महिलाओं की सोच इससे कुछ अलग भी है. ढाका विश्वविद्यालय की ही एक अन्य छात्रा फराह दीबा कहती हैं कि निश्चित रूप से बदलाव आया है.

कुछ लोगों का कहना है कि बलात्कार के बारे में सरकार को कठोर कानून बनाना चाहिए और दोषियों के लिए सख़्त से सख़्त सज़ा का प्रावधान होना चाहिए. कम से कम दिल्ली गैंगरेप की घटना के बाद तो इस बारे में सरकार को लोगों का भी साथ मिलेगा.

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