मुश्किल में आईएमएफ़ प्रमुख लगार्द

Image caption क्रिस्टीन लैगार्ड

2008 में व्यापारी बर्नार्ड टापी को वित्तीय सहायता देने का मामला अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की प्रमुख क्रिस्टीन लगार्द के गले की हड्डी बन गया है. इस मामले में फ्रांसीसी पुलिस ने उनके पेरिस स्थित अपार्टमेंट पर छापा मारा है.

बतौर वित्त मंत्री लगार्द ने बर्नार्ड टापी के क्रेडी लियोने बैंक के साथ चल रहे विवाद को मध्यस्थता पैनल को भेजने की सिफ़ारिश की थी, जिसने टापी को 4000 लाख यूरो का हर्जाना दिया था.

लगार्द के हस्तक्षेप से कुछ समय पहले ही टापी पूर्व राष्ट्रपति निकोला सारकोज़ी के चुनाव अभियान में बतौर समर्थक जुड़े थे.

आलोचक लगार्द पर अपनी शक्तियों के दुरुपयोग का आरोप लगाते रहे हैं लेकिन वो इनसे इनकार करती हैं.

'सच सामने आएगा'

छापे के बाद उनके वकील ईव रेपिक्वेट ने न्यूज़ एजेंसी रॉयटर को कहा, “इस छापे से सच सामने आएगा और मेरी मुवक्किल को आपराधिक अन्याय से आरोप मुक्ति दिलवाएगा.”

पेरिस में बीबीसी संवाददाता क्रिस्टीन फ्रेज़र के अनुसार जांचकर्ताओं को शक है कि 2007 में राष्ट्रपति सारकोज़ी को समर्थन के बदले टापी से सौदा किया गया था.

उनका कहना है कि फ़्रांस में अनुमान लगाए जा रहे हैं कि इस मामले में लगार्द के ख़िलाफ़ औपचारिक रूप से जांच शुरू की जा सकती है.

आलोचकों का कहना है कि इस मामले को निजी मध्यस्थ के पास नहीं भेजा जाना चाहिए था क्योंकि आंशिक सरकारी स्वामित्व वाले बैंक में सार्वजनिक धन दांव पर लगा था.

हर्जाना

माना जाता है कि टापी को जो हर्जाना मिला वो उससे कई गुना ज़्यादा था जो उसे अदालत से मिलना चाहिए था.

जनवरी में दिए एक इंटरव्यू में लगार्द ने अपने फ़ैसले का बचाव किया था. उनका कहना था, “उस समय यही सबसे बेहतर समाधान था.”

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष प्रमुख के रूप में लगार्द का कार्यकाल 2016 तक है.

लेकिन हमारे संवाददाता के अनुसार अगर औपचारिक जांच शुरू हो जाती है तो उनका ये कार्यकाल ख़तरे में पड़ सकता है.

यूरोप के आर्थिक संकट के गहराने के बीच इस मामले से बच निकलना उनके लिए आसान नहीं होगा.

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