इराक युद्ध: 10 साल बाद कैंसर, बीमारियों से जूझते बच्चे

  • 23 मार्च 2013
इराक में बच्चा
Image caption इराक युद्ध के 20 साल बाद भी अस्पतालों में चिकित्सा प्रबंधों की कमी है

इराक़ के बसरा शहर में एक अस्पताल के डॉक्टरों के मुताबिक वर्ष 2003 के बाद से वहां के बच्चों में जन्मजात विकारों में 60 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई है.

अस्पताल के डॉक्टर मुहसिन सबाक को यक़ीन है कि स्पाइना बिफिडा जैसे जन्मजात विकारों में बढ़ोतरी की वजह वर्ष 2003 के इराक़ युद्ध है.

सात दिन की ज़हारा भी स्पाइना बिफिडा बीमारी से ग्रस्त है. ये एक ऐसा विकार है जो ईराकी डॉक्टरों के मुताबिक बसरा और इराक के उन इलाकों में तेज़ी से बढ़ रहा है जहां युद्ध के दौरान भारी लड़ाई हुई थी.

ज़हारा की नानी नथीम के लिए ये एक व्यक्तिगत मामला है. वे कहती हैं, "आप जानती हैं न कि एक मां का दिल कैसा होता है. मेरी बेटी मुझे हर घंटे फोन करती है अपनी बेटी के बारे में जानने के लिए और फोन पर रोती है. वो मुझसे पूछती है कि मैं उसकी बेटी को कब उससे मिलाने लाऊंगी और मैं कहती हूं, कल."

डॉक्टर सबाक इन बढ़ते मामलों से चिंतित हैं. उनके अध्ययन के मुताबिक जन्मजात विकार वाले बच्चों के बालों और दांतों में सीसा और पारे की मात्रा बहुत अधिक होती है. और उन्हें यक़ीन है कि इसका संबंध युद्ध से है.

गंभीर समस्या

Image caption इराक में बच्चे कैंसर औऱ दूसरी बीमारियों से ग्रस्त हैं

इराक का स्वास्थ्य मंत्रालय विश्व स्वास्थ्य संगठन के साथ इसी मुद्दे पर एक रिपोर्ट पर काम कर रहा है. लेकिन इसके नतीजे आने में देरी होती जा रही है.

लेकिन मंत्रालय के डॉक्टरों ने बीबीसी से बातचीत में बताया कि वर्ष 2003 के बाद से जिन जगहों पर भारी लड़ाई हुई, वहां कैंसर और जन्मजात विकारों के मामलों में तेज़ी आ रही है.

हालांकि जब बीबीसी ने अमरीका के रक्षा विभाग से संपर्क करने की कोशिश की तो उन्होंने जवाब नहीं दिया. वहीं ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि वो रिपोर्ट के आधिकारिक नतीजे आने का इंतज़ार कर रहे हैं और इसलिए बिना किसी विश्वसनीय सबूत के किसी नतीजे पर पहुंचना जल्दबाज़ी होगी.

डॉक्टर मोज़ग़ान एक विषविज्ञानी हैं जिन्होंने फलुजा और बसरा के उन बच्चों के बालों और दांतों की जांच की है जिनमें जन्मजात विकार हैं. वो कहती हैं कि तुरंत कदम उठाए जाने की ज़रूरत है.

डॉक्टर मोज़ग़ान कहती हैं, "पानी, हवा, मिट्टी, भोजन-वो सभी तत्व जिनके संपर्क में लोग आते हैं, उनकी खा़सकर धातुओं के लिए जांच होनी चाहिए. और एक बार हमें वो आंकड़े मिल जाएं तो हम उन इलाकों की पहचान कर सकेंगे जहां ये प्रदूषण है और फिर हम इसे साफ़ करने के लिए कदम उठा सकते हैं. अगर हम कुछ नहीं करेंगे तो ईराक़ में बच्चों की कई पीढ़ियों पर इसका बहुत बुरा असर पड़ेगा."

बसरा में बच्चों की कब्रगाह में अबु बकर पिछले 10 साल से कब्र खोदने का काम कर रहे हैं. इससे पहले उनके पिता ये कब्र खोदने का काम करते थे. वे कहते हैं कि इस दौरान जिस तरह के मामले उन्होंने देखे हैं, वे दिल दहलाने वाले हैं.

अबु बकर कहते हैं कि उनके पिता ने उन्हें ऐसे मामलों के बारे में कभी नहीं बताया. वे कहते हैं, "मेरे पिता कहते हैं कि उन्होंने कभी ऐसा कुछ नहीं देखा. मैंने कुछ बेहद बुरे मामले देखे हैं. जब मैंने ये काम करना शुरु किया तो मैं बहुत डरा करता था लेकिन अब मेरे अंदर सब मर चुका है."

अब भी पक्की तरह से नहीं कहा जा सकता कि ये जन्मजात विकार यु्द्ध का नतीजा हैं लेकिन ये एक ऐसी समस्या है जिसे नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता.