पुतिन विरोधी रूसी उद्योगपति की लंदन में मौत

  • 24 मार्च 2013
Image caption पुलिस बोरिस बेरेजोव्स्की की मौत के कारणों की जांच कर रही है

निर्वासन में जीवन बिता रहे रूस के प्रख्यात उद्योगपति बोरिस बेरेजोव्स्की लंदन में अपने घर के बाहर मृत पाए गए हैं.

67 वर्षीय बेरेजोव्स्की राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन के विरोधी थे और रूस में एक वांछित व्यक्ति थे. पुलिस ने उनकी मृत्यु की जांच शुरू कर दी है.

क्रेमलिन सत्ता में कभी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले बेरेजोव्स्की के भाग्य का पुतिन के शासनकाल में पतन होने लगा और इसी वजह से वो साल 2000 में ब्रिटेन चले गए.

ब्रिटेन की टेम्स वैली पुलिस का कहना है कि उनकी मृत्यु के कारणों का अभी पता नहीं चल सका है.

पुलिस के मुताबिक जांच अभी बहुत ही शुरुआती दौर में है, इसलिए उस पर कुछ भी कहना मुश्किल है.

एंबुलेंस सर्विस की प्रवक्ता का कहना था कि उनके पास दोपहर करीब सवा तीन बजे फोन आया था, “हमने उस पते पर एक एंबुलेंस और कुछ अधिकारियों को भेजा. 67 वर्षीय बेरेजोव्स्की की घटनास्थल पर ही मौत हो चुकी थी.”

आर्थिक नुकसान से अवसाद में थे!

पिछले साल ही बेरेजोव्स्की को करीब तीन अरब पौंड का घाटा हुआ था जो उन्हें चेल्सी फुटबॉल क्लब के मालिक रोमन अब्रामोविक को चुकाना पड़ा था.

बीबीसी के वैश्विक मामलों के रिपोर्टर रिचर्ड गाल्पिन का कहना है कि इस मामले के बाद बेरेजोव्स्की काफी अवसाद में रहने लगे थे और उन पर काफी आर्थिक दबाव भी था.

बेरेजोव्स्की का व्यापार 1990 के दशक में अपने चरम पर था जब वो विदेशी मर्सिडीज कारें और रूस-निर्मित महंगी कारें बेचते थे.

बाद में उन्होंने रूस के प्रमुख टेलीविजन चैनल में हिस्सेदारी खरीदी और बोरिस येल्तसिन के सत्ता में आने में खूब मदद की.

बेरेजोव्स्की पर कई गंभीर आपराधिक आरोप थे जिनमें हत्या से जुड़े ढेरों मामले भी शामिल थे.

बतौर राष्ट्रपति बोरिस येल्तसिन के कार्यकाल के आखिरी वर्षों में बेरेजोव्स्की ने रूस की सुरक्षा परिषद के उप सचिव के रूप में सत्ता के बेहद करीबी व्यक्ति के रूप में काम किया था.

बीबीसी के मॉस्को संवाददाता स्टीव रोसेनबर्ग का कहना था, “1990 के दशक में बोरिस बेरेजोव्स्की रूस के सबसे प्रभावशाली लोगों में से एक थे. उन्होंने एक गणितज्ञ, एक कंप्यूटर प्रोग्रामर और एक कार व्यवसायी के तौर पर अपने करियर की शुरुआत की और बाद में सत्ता के इतने करीब पहुंचे.”

हालांकि उन्होंने पुतिन के उत्थान में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई लेकिन बाद में वो उनके सबसे बड़े आलोचक बन गए थे.

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