तिब्बत भूस्खलन: मज़दूरों के बचने की संभावना कम

  • 30 मार्च 2013
Image caption तिब्बत में हुए भूस्खलन में 83 ख़ान मज़दूर दब गए हैं

तिब्बत की राजधानी ल्हासा के नज़दीक हुए भूस्खलन में दबे 80 से ज्य़ादा खदान मज़दूरों के ज़िंदा बचने की उम्मीद खत्म होती जा रही है.

चीन की सरकारी मीडिया के अनुसार इस घटना के 36 घंटे बाद उन्हें सिर्फ एक मज़दूर का शव निकालने में सफलता मिली है और इस भूस्खलन में दबे अन्य मज़दूरों के ज़िंदा बचने की संभावना काफी कम है.

खदान मज़दूरों का ये कैंप तिब्बत की राजधानी ल्हासा से 70 किमी यानि 45 किमी की दूरी पर है जो हज़ारों टन चट्टानों के नीचे दब गया था.

ख़राब मौसम, भूस्खलन और ऊंची जगह पर ऑक्सीजन की कमी से होने वाली तकलीफ़ों की वजह से बचाव कार्य में काफी दिक्कत आ रही है.

समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार स्थानीय समयानुसार शाम के पाँच बजकर पैंतीस मिनट पर उन्हें पहले मज़दूर का शव मिला.

एक बचावकर्मी के अनुसार, ''भूस्खलन की घटनाओं के कारण इन मज़दूरों के बचने की संभावना काफी कम है.''

हादसा

ये हादसा शुक्रवार सुबह स्थानीय समयानुसार सुबह 6 बजे हुआ. जिस जगह पर ये हादसा हुआ वो 4600 मीटर या 1500 फीट की ऊंचाई पर है.

चीन के सरकारी मीडिया के अनुसार दो हज़ार से ज़्यादा पुलिस, अग्निशमन कार्यकर्ता, डॉक्टर और आपातकालीन कार्यकर्ताओं को 4600 मीटर या 1500 फीट की ऊंचाई पर स्थित दुर्घटनास्थल पर भेजा गया है.

इन लोगों को वहां किसी सुरक्षित स्थान पर एक तात्कालिक रहने की जगह बनाने के लिए भेजा गया है. इसके अलावा 200 से ज्य़ादा बुलडोज़र भी भेजे गए हैं ताकि वहां बड़ी-बड़ी चट्टानों को हटाया जा सके.

समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार जिस जगह ये घटना घटी उसके आसपास के इलाके की पहाड़ियाँ भी दरक रही हैं जिससे वहां आगे भी भूस्खलन होने की आशंका है.

तापमान 3 डिग्री सेल्सियस से भी कम होने के कारण खोजी कुत्ते भी ख़ास मदद नहीं कर पा रहे हैं.

शनिवार दोपहर तक तीन लाख टन से ज्य़ादा मलबा हटा लिया गया है.

बड़ा इलाका

भूस्खलन में एक बड़ा इलाका दब गया, जिसमें मज़दूरों की झुग्गियां भी शामिल थीं.

दुर्घटनाग्रस्त हुई खान राज्य सरकार के स्वामित्व वाली चाइना नेशनल गोल्ड ग्रुप की एक सहायक कंपनी के पास थी. ये ग्रुप चीन का सबसे बड़ा सोने का उत्पादक है.

चीनी अधिकारियों का मानना है कि तिब्बत के पठार में संसाधनों की भरमार है और यहां तांबा, सीसा, जस्ता और लौह अयस्क के लाखों टन के भंडार हैं.

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सरकारी मीडिया की रिपोर्टों के अनुसार दो मज़दूर तिब्बती और बाकी हान समुदाय के थे.

इनमें से ज्यादातर युन्नान, गिझोउ और सिचुआन प्रांतों के प्रवासी मज़दूर थे.

शिन्हुआ न्यूज़ एजेंसी के मुताबिक मैझोकुनगर क्षेत्र में स्थित मज़दूरों का कैंप भारी मात्रा में आए मलबे में दफ़न हो गया.

पुलिस के अनुसार चार वर्ग किलोमीटर तक का इलाका ढह चुका है.

स्थानीय अस्पतालों को घायलों के आने की संभावना को लेकर तैयार रहने को कहा गया है.

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