क्या है खुशहाल शादीशुदा ज़िंदगी का राज़?

डार्विन और उनकी पत्नी
Image caption डार्विन के पत्रों से उनके शादीशुदा जीवन के कई पहलुओं की जानकारी मिलती है.

दुनिया में कोई भी सुखी विवाहित जीवन के राज़ की व्याख्या नहीं कर सकता है, लेकिन इसका यह कत्तई मतलब नहीं है कि लोग इस राज़ पर से पर्दा हटाने की कोशिश ही न करें.

जो लोग आपको ख़ुशहाल शादीशुदा ज़िंदगी के क़ायदे के बारे में बताते हैं, मुमकिन है कि वह भी अपनी जिंदगी में ऐसे किसी नियम-क़ायदे पर अमल नहीं कर पाते हों. दुनिया के इस सच को सार्वभौमिक तौर पर लोग स्वीकार करते हैं.

जो लोग सेक्स के बारे में अच्छी किताबें लिख सकते हैं, उनके साथ आप शायद कभी प्रेम संबंध नहीं बनाना चाहेंगे, या फिर जो शिक्षाविद् लोगों में तहज़ीब ख़त्म होने के बारे में लेख लिखते रहते हैं वे भी अपनी निजी ज़िंदगी में काफ़ी ग़ुस्से वाले होते हैं, ठीक उसी तरह जो लोग शादी को बनाए रखने के तरीक़ों के बारे में लिखते हैं उनकी अपनी ज़िंदगी में शायद ही सबकुछ ठीक रहता है.

हालांकि मेरे पास भी इसके लिए कोई नियम नहीं है लेकिन मैं शादी के कई सालों के अनुभव के लिहाज़ से इस बारे में कुछ तो कह ही सकता हूं.

चार्ल्स डार्विन की शादी

यह विचार मुझे तब आया जब मैं चार्ल्स डार्विन और उनके रिश्ते की बहन एम्मा वेजवुड से उनकी शादी के बारे में सोच रहा था. दरअसल मैं डॉर्विन के बारे में एक किताब लिख रहा था जिसके लिए मुझे यह सब जानकारी लेनी थी.

1838 में जब डॉर्विन पहली बार शादी के बारे में सोच रहे थे तो उन्होंने इस विषय पर ख़ूब लिखा और वैज्ञानिक तरीक़े से शादी की ख़ूबी-ख़ामियों के बारे में सूची ही बना डाली.

शादी के विरोध में तर्क देते हुए उन्होंने लिखा, “शादी के बाद बच्चों के ख़र्च और उनसे जुड़ी चिंताएं होती हैं और एक अजीब सा सच यह है कि शादीशुदा आदमी जीवन में ज़्यादा ऊंचाइयों तक नहीं जा सकते.”

शादी की ख़ूबियां गिनाते हुए उन्होंने कहा कि इसमें एक ‘हमसफ़र’ और ‘बुढ़ापे के दिनों के लिए साथी’ मिलता है.

उन्होंने तो यहां तक कह दिया कि एक पत्नी कुत्ते से तो कम से कम बेहतर ही होती है.

डार्विन ने एक आदर्श शादी का अनुभव तक़रीबन ले ही लिया था. दुनिया की चेतना में बड़ा परिवर्तन लाने वाले इस विख्यात वैज्ञानिक की वर्ष 1882 में जब मौत हो रही थी तब भी उन्होंने अपनी पत्नी के बारे में कहा था, "मेरा प्यार, मेरा बेशक़ीमती प्यार."

तो क्या है राज़?

Image caption मशहूर अभिनेत्री एलिज़ाबेथ टेलर और रिचर्ड बर्टन की शादीशुदा ज़िंदगी भी खुशहाल रही थी.

तो सवाल यह है कि आख़िर उनकी शादी इतनी सफल क्यों रही?

डार्विन से लेकर अब तक कई लोगों के शादीशुदा जीवन के बारे में विचार करते हुए मैं इस नतीजे पर पहुंचा हूं कि एक ख़ुशहाल वैवाहिक जीवन का सदाबहार फ़ॉर्मूला है एक दूसरे के लिए काम-भोग की इच्छा रखना, हमेशा हंसते रहना और एक दूसरे के प्रति वफ़ादार रहना.

तो शादी वासना, हंसी और वफ़ादारी की पटरी पर चलती है लेकिन इन तीनों पहलुओं में एक संतुलन बनाना बेहद ज़रुरी है ताकि जीवन के किसी पल में अगर एक में कमी आए तो दूसरा उस कमी को पूरा कर दे.

जिंदगी की सबसे बड़ी खुशी यह खोज करना है कि ज़िंदगी की कुछ विसंगतियां आप दोनों को बेतुकी लगी और फिर एक सुंदर पल आया जब दोनों ने यह फ़ैसला किया कि हम एक-दूसरे के लिए ऐसा कर रहे हैं और दुनिया के लिए भी हमारी यही सोच है और हम हमेशा एक दूसरे के साझेदार बने रहेंगे.

वफ़ादारी

शादी में दो लोगों को एक-दूसरे के प्रति नरम रहना ज़रूरी है और इसमें काफ़ी कुछ वफ़ादारी पर भी निर्भर करता है जिससे ज़िंदगी और ख़ुशनुमा होती है.

हमने यह देखा है कि कई दशक पहले से ही एक दूसरे के लिए शारीरिक आकर्षण ख़त्म होने और ज़िंदगी में हंसी के पल भी लगभग न के बराबर होने के बावजूद सिर्फ़ एक दूसरे के प्रति वफ़ादारी के सहारे ही शादीशुदा जीवन चलता रहा है.

इसलिए लोग बार-बार कोशिश करते हैं कि वो अपने शादीशुदा जीवन में वफ़ादार रहें और फिर अपने साथी में शारीरिक आकर्षण तलाशने की कोशिश करें.

लेकिन ये कोई हिट या पूरी तरह आज़माया हुआ फॉर्मूला नहीं है और ये पूरी तरह सफल हो जाए ये भी नहीं कहा जा सकता.

आख़िर में मेरा यही मानना है कि जिस तरह डार्विन ने कहा था कि अपने अस्तित्व की लड़ाई ही ज़िंदगी का असली रहस्य है, ठीक उसी तरह एक ख़ुशहाल शादीशुदा जीवन की सबसे बड़ी पहचान यही है कि दोनों साथी एक दूसरे के साथ मिलकर हंस सकें, वफ़ादार रह सकें..

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