क्यों हैं तानाशाह स्टालिन इतने लोकप्रिय?

जोसेफ स्टालिन
Image caption स्टालिन सोवियत संघ के तानाशाह के तौर पर जाने जाते थे.

सोवियत संघ के तानाशाह रहे जोसेफ स्टालिन की 60 वीं बरसी पर उनके जन्मस्थान जॉर्जिया में उनकी विरासत को लेकर विवाद अभी भी बरकरार है.

साम्यवादी शासन की स्थापना और दुश्मनों के खात्मे के लिए जब स्टालिन ने सख्त अनुशासन और राज्य के आंतक का सहारा लिया तो लाखों लोग मारे गए थे.

इस बीच जॉर्जिया के गोरी शहर के नगर परिषद ने हाल ही में स्टालिन की प्रतिमा को फिर से स्थापित करने का फैसला किया है.

स्टालिन का जन्म इसी गोरी शहर में हुआ था.

तीन साल पहले राष्ट्रपति मिखाइल साकाशविली की पश्चिम समर्थक सरकार ने स्टालिन की ये प्रतिमा हटवा दी थी.

इतिहासकार कहते हैं कि जॉर्जिया को अपने सोवियत काल के अतीत से रूबरू होने की जरूरत है.

नायक या खलनायक?

गोरी शहर में स्टालिन का म्यूजियम सैलानियों के आकर्षण का केंद्र रहा है.

साल 1957 में म्यूजियम के बनने के बाद से ही इस खूबसूरत इमारत में रखी स्टालिन की तस्वीरें और उनसे जुड़ी दूसरी चीजें लगभग अनछुई ही हैं और यह हमें उस दौर में ले जाती हैं.

लेकिन सोवियत दौर से ही इस म्यूजियम में गाइड का काम कर रहे ओल्गा तोचिश्वली कहते हैं कि स्टालिन को लेकर लोगों का रवैया बदल रहा है.

ओल्गा कहते हैं,“जॉर्जिया में पुरानी पीढ़ी के ज्यादातर लोग ये सोचते हैं कि स्टालिन एक ऐसे महान राजनेता थे जिन्होंने कुछ छोटी-छोटी गलतियां की थीं. लेकिन नौजवान लोग स्टालिन को पसंद नहीं करते हैं. बेशक नौजवानों को इतिहास में दिलचस्पी नहीं है और वे स्टालिन को पसंद नहीं करते.”

लेकिन यह सिर्फ रवैय्ये का सवाल नहीं है बल्कि गोरी शहर भी काफी हद तक बदला है.

स्टालिन की प्रतिमा

Image caption साल 2010 में स्टालिन की यह प्रतिमा हटा दी गई थी.

शहर के मुख्य रास्ते स्टालिन स्ट्रीट पर किसी जमाने में इस तानाशाह की एक बड़ी सी प्रतिमा हुआ करती थी.

साल 2010 में साकाश्विली की सरकार ने इस प्रतिमा को हटवा दिया था. इस फैसले से गोरी शहर के कई लोग विचलित हो गए थे.

स्टालिन स्ट्रीट पर कारों को पार्किंग की खाली जगह पाने में मदद करने वाले निकोलोज कपानाड्जे भी मानते हैं कि स्टालिन की प्रतिमा वापस लगाई जानी चाहिए.

निकोलोज कहते हैं,“हर कोई यह चाहता है, केवल मैं ही नहीं बल्कि पूरा गोरी, पूरा जॉर्जिया ही यह चाहता है कि स्टालिन की प्रतिमा दोबारा उसी स्थान पर स्थापित की जाए जहां वह पहले थी. मैं 65 साल का हूं और मैंने जीवन भर उनके बारे में केवल अच्छी बातें ही सुनी हैं.”

राजनीतिक बदलाव

हफ्ते भर पहले ही नगर परिषद ने स्टालिन म्यूजियम के पास उनकी प्रतिमा लगाने के लिए पैसे का आवंटन किया था.

इसे जॉर्जिया में हो रहे राजनीतिक बदलाव के नतीजे के तौर पर कुछ हद तक देखा जा सकता है. पिछले अक्टूबर में साकाश्विली की पार्टी जॉर्जियन ड्रीम कोलिएशन के हाथों संसदीय चुनावों में हार गई थी.

जॉर्जियन ड्रीम कोलिएशन देश के रूस के साथ रिश्तों में सुधार चाहता है.

गोरी शहर के नए मेयर डेविड रजुआड्जे इसी गठजोड़ के नेता हैं.

डेविड ने कहा है कि गर्मियों में स्टालिन की प्रतिमा दोबारा स्थापित कर दी जाएगी.

जॉर्जिया की दुविधा

Image caption जोसेफ स्टालिन की प्रतिमा के साथ एक व्यक्ति.

बिलीसी यूनिवर्सिटी में सोवियत इतिहास के प्रोफेसर लाशा बकराड्जे हाल ही में किए गए एक सर्वे के हवाले से कहते हैं कि 45 फीसदी जॉर्जियन स्टालिन को लेकर सकारात्मक रवैया रखते हैं.

उनका कहना है कि जॉर्जिया को अपने सोवियत काल के अतीत से रूबरू होने की जरूरत है.

वह कहते हैं,“लोगों को स्टालिन के बारे में बताने के लिए कुछ नहीं किया गया है. इसके बारे में बात तक नहीं की जाती. स्कूल की किताबों में एक दलीय शासन प्रणाली के बारे में कुछ नहीं पढ़ाया जाता.”

वह कहते हैं कि जॉर्जिया के समाज के साथ एक समस्या है कि वे एक तरफ तो स्टालिन के साथ सहानुभूति भी रखते हैं और दूसरी तरफ ज्यादातर जॉर्जियाई लोकतंत्र और आजादी का समर्थन करते हैं.

स्टालिन के उसी म्यूजियम में बदलाव की आहट साफ तौर पर सुनी जा सकती है. म्यूजियम के एक कमरे में स्टालिन के दमन का शिकार हुए कुछ स्थानीय लोगों के नाम देखे जा सकते हैं.

हालांकि ओल्गा जैसे लोग स्टालिन की प्रतिमा लगाने का समर्थन राजनीतिक वजहों से नहीं बल्कि सैलानियों को लुभाने के लिए करते हैं.

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