अफगान अदालत में आत्मघाती हमला, 50 मरे

अफगानिस्तान में हमला
Image caption अफगानिस्तान में सुरक्षा के हालात लगातार चिंताजनक बने हुए हैं

पश्चिमी अफगानिस्तान में एक अदालत में हुए आत्मघाती हमले और गोलीबारी में 50 से ज्यादा लोग मारे गए हैं और 90 घायल हो गए हैं. मरने वालों में ज्यादातर आम लोग हैं.

अफगान अधिकारियों ने बताया कि ईरान सीमा से सटे फाराह प्रांत की राजधानी में ये हमला हुआ और चरमपंथी सैनिकों के वेश में आए थे. वे संदिग्ध तालिबान चरमपंथियों को रिहा कराना चाहते थे लेकिन इसमें नाकाम रहे.

तालिबान ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है.

काबुल से बीबीसी संवाददाता कैरोलीन व्याट का कहना है कि ये दिसंबर 2011 के बाद अफगानिस्तान में सबसे खतरनाक हमला है.

परस्पर विरोधी दावे

अधिकारियों ने बताया कि बुधवार को स्थानीय समय के अनुसार सुबह नौ बजे के आसपास फाराह शहर में ये हमला शुरू हुआ.

चरमपंथियों ने विस्फोटकों से लदी गाड़ियों को उड़ा दिया जिससे आसपास की कई इमारतों को नुकसान हुआ. इनमें स्थानीय गवर्नर का कार्यालय और दो बैंकों की शाखाएं भी शामिल हैं. हमले के वक्त बैंकों में काफी लोग थे.

इसके बाद अफगान सुरक्षा बलों के साथ चरमपंथियों की झड़प होने लगी. चरमपंथी पास की इमारतों में छिपे थे.

शुरुआतों खबरों में कहा गया कि चरमपंथियों का निशाना गर्वनर का परिसर था. लेकिन बाद में तालिबान के प्रवक्ता ने कहा कि हमला अदालत को ध्यान में रख कर ही किया गया था.

प्रांतीय पुलिस प्रमुख अफगा नूर केमजोत ने समाचार एजेंसी एपी को बताया कि छह हमलावर आत्मघाती जैकेट पहने हुए थे. अफगान अधिकारियों के अनुसार हमले में 34 आम नागरिक, सुरक्षा बलों के 10 सदस्य और नौ चरमपंथी मारे गए हैं.

पुलिस प्रमुख के अनुसार चरमपंथी 15 तालिबान कैदियों को रिहा कराना चाहते थे, जिन्हें मुकदमे की सुनवाई के लिए अदालत में लाया गया था.

उन्होंने कहा, “बेशक उनका इरादा कैदियों को रिहा कराना था लेकिन ईश्वर का शुक्र है कि वे कामयाब नहीं हो पाए.”

लेकिन तालिबान के प्रवक्ता ने सभी कैदियों को रिहा कराने लेने का दावा किया. समाचार एजेंसी रॉयटर्स की खबर में तालिबान के प्रवक्ता के हवाले से ये बाद कही गई है.

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