माँ ने कहा, मुझे लेडी कहो: माया एंजेलू

Image caption माया एंजेलू ने नई किताब में अपनी माँ के साथ अपने संबंधों का ज़िक्र किया है

मशहूर कवयित्री, लेखिका और सामाजिक कार्यकर्ता माया एंजेलू ने अपनी कई किताबों में अपने जीवन के बारे में बहुत कुछ लिखा है और इसकी शुरुआत उन्होंने की थी साल 1969 में लिखी गई किताब ‘ह्वाई द केज्ड बर्ड सिंग्स’ से.

अपने लेखन की शुरुआत किए उन्हें चालीस साल से ज्यादा हो गए हैं और अब जाकर उन्होंने अपने जीवन के सबसे महत्वपूर्ण और जटिल संबंधों पर ज़ुबान खोली है.

माया ने अपनी माँ विवियन बाक्स्टर के साथ अपने संबंधों के बारे में कई रहस्योद्घाटन किए हैं.

एंजेलू जब तीन साल की थीं, उनकी माँ ने उन्हें उनके भाई के साथ उनकी दादी के पास भेज दिया जो अरकांसास के स्टैंप्स शहर में रहती थीं.

दस साल बाद जब एंजेलू अपने माँ के पास रहने के लिए वापस आईं तो उनकी माँ ने उन्हें माँ कहने से मना कर दिया. बाक्स्टर ने एंजेलू से कहा कि वो उन्हें सिर्फ “लेडी” कहकर पुकारे.

'लेडी' से फिर माँ

एंजेलू ने अपनी सातवीं आत्मकथा में इस बात का ज़िक्र किया है कि खुद को “लेडी” कहलाने वाली ये महिला कैसे दोबारा माँ कहलाने को तैयार हुई. उनकी इस आत्मकथा का नाम है- ‘मॉम एंड मी एंड मॉम’.

माइकेल माहेर के साथ बातचीत में एंजेलू ने इस पूरे प्रकरण पर विस्तार से प्रकाश डाला है, लेकिन उनका कहना था कि ऐसा प्रेम की अद्भुत शक्ति की वजह से संभव हो सका.

वो कहती हैं," मेरी माँ ने मुझे और मेरे भाई को छोड़ दिया था. काफी समय बाद जब मैं लौट कर आई, तो माँ ने मुझे अपनाने से मना कर दिया."

वो काफी मौज-मस्ती करती थीं, लिपस्टिक लगाती थीं और संगीत का आनंद लेती थीं. उन्होंने मुझे माँ कहने से भी रोक दिया और कहा कि मैं उन्हें लेडी कहूं.

लेकिन एंजेलू कहती हैं कि वो मुझे प्यार करती थीं. मेरा मानना है कि कुछ छोटे लोगों के बहुत अच्छे माता-पिता होते हैं, मेरी माँ इससे बिल्कुल उलट थी.

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