क्यों निकाला जा रहा है पाब्लो नेरूदा का शव?

Image caption पाब्लो नेरूदा की कब्र खोदने से पहले तैयारी करते फोरेंसिक अधिकारी

चिली के मशहूर कवि पाब्लो नेरूदा की मौत के 40 साल बाद उनका शव कब्र से बाहर निकालने की तैयारियां शुरू हो गई हैं.

नोबेल पुरस्कृत कवि नेरूदा की मौत साल 1973 में हुई थी और तबसे ही उनकी मौत के पीछे रहे कारण पर अटकलें लगाई जा रही थीं.

अब उन अटकलों का ठोस जवाब ढूंढने के लिए चिली की सरकार उनकी कब्र खुदवाना चाहती है.

दरअसल नेरूदा चिली की कम्युनिस्ट पार्टी के सदस्य थे और तत्कालीन राष्ट्रपति साल्वाडॉर एलियांडे के कट्टर समर्थक थे.

लेकिन एलियांडे के खिलाफ जनरल ऑगस्तो पिनोशे की अगुआई में सैन्य क्रांति हुई थी. जिसके बाद 11 सितंबर 1973 को एलियांडे ने समर्पण करने के बजाय खुदकुशी कर ली थी.

इसके बाद प्रोस्टेट कैंसर से जूझ रहे नेरूदा चुपचाप देश छोड़कर बाहर जाना चाहते थे और वहां से सैन्य तानाशाह के खिलाफ आवाज़ उठाना चाहते थे.

लेकिन जिस दिन वो देश छोड़कर जाने की तैयारी में थे, उससे एक दिन पहले ही उन्हें सैन्य सरकार ने एक अस्पताल में भर्ती करा दिया जहां उनका कैंसर के लिए इलाज कराया जाने लगा.

क्या राज़ खुलेगा?

आधिकारिक तौर पर बताया गया कि अस्पताल में ही बीमारी की वजह से पाब्लो नेरूदा की मौत हो गई. लेकिन आशंका व्यक्त की गई कि सैन्य सरकार ने उन्हें मरवा दिया.

अब चिली की सरकार ये पता लगाना चाहती है कि नेरूदा की मौत कैंसर से हुई या उन्हें तत्कालीन सेना के जनरल ऑगस्तो पिनोशे के हुक्म पर ज़हर दिया गया.

नेरूदा के आइला नेग्रस स्थित घर पर फोरेंसिक विशेषज्ञों की एक टीम पहुंच गई है, जहां उनके शव को दफनाया गया था.

हालांकि फोरेंसिक विशेषज्ञों ने आशंका जताई है कि इतने सालों बाद शायद ही नेरूदा की मौत की वजहों का पता लग सके.

रविवार को पाब्लो नेरूदा के घर के बाहर पत्रकारों को संबोधित करते हुए कम्युनिस्ट पार्टी के वकील एडवार्डो कांट्रेरास ने कहा, "नमी और इस जगह के खारेपन की वजह से हमें अंदाज़ा है कि इस काम में बहुत मुश्किल आने वाली है. इसलिए सैंपल को विदेश की कई लेबोरेटरीज़ में भेजना होगा."

हालांकि नेरूदा के रिश्तेदारों को यकीन है कि शव की खुदाई से कई नई जानकारियाँ सामने आएँगी और मौत की असली वजह का पता लगाया जा सकेगा.

साल 1990 में चिली में एक बार फिर से लोकतंत्र की वापसी हुई. तभी से उनकी मौत की वजहों का पता लगाए जाने की मांग उठने लगी.

नेरूदा के ड्राइवर के इस बयान के बाद कि अस्पताल में उन्हें एक ज़हरीला इंजेक्शन दिया गया, जांच शुरू हो गई.

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