फिर शुरू होगी सविता हलप्पानवर की मौत की जांच

Image caption सविता गॉलवे के यूनिवर्सिटी अस्पताल में एक हफ़्ते तक भर्ती रहीं.

अप्रवासी भारतीय महिला दंत चिक्तित्सक सविता हलप्पानवर की मौत की जांच गॉलवे में सोमवार से एक बार फिर शुरू होगी.

गॉलवे, आयरलैंड के यूनिवर्सिटी अस्पताल में पिछले साल 21 अक्तूबर को 31 साल की हलप्पानवर की इलाज के दौरान गर्भपात की वजह से मौत हो गई थी. उस समय वे 17 सप्ताह की गर्भवती थीं.

उनके पति प्रवीण ने बताया कि अस्पताल में तीन दिन भर्ती रहने के दौरान परिवार ने कई बार गर्भपात के संबंध में बात की. लेकिन डॉक्टरों ने इसकी इजाज़त नहीं दी, क्योंकि भ्रूण का दिल धड़क रहा था.

विरोधाभाषी क़ानून

उन्होंने कहा, ''उनसे कहा गया कि यह एक कैथोलिक देश है. इस आधार पर अस्पताल के डॉक्टरों ने ऐसा करने से इनकार कर दिया था.''

अस्पताल में एक हफ़्ते के इलाज के बाद हुई सविता हलप्पनवार की मौत के बाद आयरलैंड के विरोधाभाषी गर्भपात क़ानूनों को लेकर बहस छिड़ गई थी.

इस मामले की जाँच इस साल शुरू में कुछ आगे बढ़ी थी, इसके बाद अब यह सोमवार से गॉलवे कोर्ट हाउस में दोबारा शुरू होगी. इस दौरान मौत के कारणों को निर्धारित किया जाएगा. लेकिन मौत के कारण जानने वाले अधिकारी अभी किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पाए हैं.

उम्मीद की जा रही है कि पहली बार अस्पताल में सविता हलप्पनवार की देखभाल करने वाले कर्मचारी एक सार्वजनिक मंच पर शपथ लेकर सबूत देंगे.

प्रवीण हलप्पनवार के वकील इन कर्मचारियों से उन क़दमों के बारे में सवाल-जवाब करेंगे जो उठाए गए और जो नहीं उठाए गए.

स्वास्थ्य सेवा के कार्यकारी की जांच रिपोर्ट के फ़ाइनल मसविदे के लीक हो जाने से सबको यह पता चल गया था कि आखिर हुआ क्या था.

लीक हुई रिपोर्ट से पता चला था कि जिस दिन सविता हलप्पनवार को अस्पताल में दाखिल कराया गया था, उस दिन हुई ख़ून की जांच में बढ़ी हुई श्वेत रक्त कोशिकाओं की जानकारी मिली थी. यह रक्त विषाक्तता का संकेत था.

बढ़ता गया संक्रमण

रिपोर्ट के मुताबिक़ ख़ून की जांच रिपोर्ट पर ध्यान नहीं दिया गया और ऐसा लगता है कि जिम्मेदार कर्मचारियों में इसको लेकर कुछ भ्रम भी था.

इस बात के भी प्रमाण मिले हैं कि सोमवार को अस्पताल में दाखिल कराए जाने के बाद संभावित संक्रमण को देखते हुए सविता हलप्पनवार की नाड़ी की धड़कन, शरीर के तापनाम और ब्लड प्रेशर का कोई रिकॉर्ड नहीं रखा गया.

इसमें केवल प्रवीण हलप्पनवार की ओर से गर्भपात के अनुरोध का ही रिकॉर्ड है, जिसे केवल इसलिए अस्वीकार कर दिया गया कि भ्रूण की धड़कन चल रही थी.

बुधवार सुबह संभावित संक्रमण का इलाज किया गया. लेकिन ख़ून में बैक्टिरिया की मौज़ूदगी की वजह से उनके रक्तचाप में ख़तरनाक रूप से गिरावट देखी गई.

उसी दिन चिकित्सकों के एक दल ने गर्भपात की संभावना पर चर्चा की, लेकिन दोपहर में हलप्पनवार का गर्भपात हो गया.

इसके बाद गुरुवार को उन्हें उच्च निर्भरता वाली ईकाई में भेज दिया गया. लेकिन उनकी हालत लगातार बिगड़ती गई. रविवार दोपहर पौने एक बजे सेप्टिसीमिया और ई कोलाई के संक्रमण की वजह से हृदय गति रुक जाने से उनकी मौत हो गई.

हलप्पनवार परिवार के वकील ग्रेयार्ड ओडोनिल ने कहा, ''हम जानते हैं कि सविता की मौत कैसे हुई. लेकिन प्रवीण को उम्मीद है कि इस जांच से पता चलेगा कि किन कराणों की वजह से उनकी मौत हुई.''

दंत चिकित्सक सविता हलप्पनवार की मौत के बाद आयरलैंड के गर्भपात संबंधी क़ानून को लेकर बहस छिड़ गई थी.

देश की सुप्रीम कोर्ट की ओर से 1992 में दिए गए एक फ़ैसले के मुताबिक़ एक महिला अपने स्वास्थ्य के अनुरूप एक बार गर्भपात करा सकती है.

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