संग्रहालय को मिला एक अरब डॉलर का दान!

Image caption न्यूयॉर्क के इस संग्रहालय को मिला एक अरब डॉलर का दान

न्यूयॉर्क के मेट्रोपॉलिटन म्यूज़ियम ऑफ आर्ट को “क्यूबिस्ट आर्ट” के नायाब नमूने दान में मिले हैं, जिनकी कीमत लगभग एक अरब डॉलर आंकी गयी है. यह दान लियोनार्ड लॉडर ने दिया है, जो एस्टी लॉडर फॉर्च्यून के वारिस हैं.

क्यूबिस्ट कला बीसवीं सदी के शुरुआती दौर का एक रूप है, जिसने यूरोप की तस्वीर बदल दी थी. पिकासो और जॉर्जेस ब्राक जैसे नायाब पेंटर इसके पुरोधा माने जाते हैं.

लियोनार्ड लॉडर ने कुल 78 नमूने दान कर दिए हैं, जो दुनिया में क्यूबिस्ट कला का बेहतरीन संग्रह माना जाता है.

उन्होंने 37 वर्षों के लंबे समय में इन कलाकृतियों का संग्रह किया था. इनमें पाब्लो पिकासो, जॉर्जेस ब्राक, युआन ग्रिस और फर्नांड लेगर की बनाई पेंटिंग भी हैं.

बेजोड़ उपहार

संग्रहालय के निदेशक थॉमस कैंपबेल ने कहा, कि यह उपहार “सचमुच बेजोड़” था.

वहीं, दान देने वाले अरबपति 80 वर्षीय लॉडर ने एक बयान में कहा, “यह उपहार न्यूयॉर्क में रहने और काम करनेवाले लोगों, के साथ ही उन सभी के लिए है, जो दुनिया भर से हमारे महान कला-संग्रहों को देखने आते हैं.”

मेट्रोपॉलिटन संग्रहालय पहले 20 वीं सदी के कला-संग्रह के मामले में थोड़ा कमज़ोर था, लेकिन लॉडर के दान से अब यह दुनिया के नायाब संग्रहों में से एक होने का दावा कर सकता है.

निदेशक कैंपबेल ने कहा, “हम अब क्यूबिज्म के मामले में अब उसके बेहतरीन शाहकारों को प्रदर्शित कर सकते है”.

गुणवत्ता, गहराई और विविधता के लिहाज़ से बेजोड़ इस संग्रह में पिकासो के 33, ब्राक के 14 और ग्रिस और लेगर की 14 पेंटिंग हैं.

लॉडर ने यह संग्रह लगभग चार दशकों की मेहनत से तैयार किया है. उन्होंने कहा कि मेट्रोपॉलिटन को उन्होंने इसलिए चुना, क्योंकि मैंने महसूस किया कि क्यूबिज्म और इससे जुड़े संग्रह को दुनिया के महान संग्रहालयों में से एक में जरूर शामिल होना चाहिए.

फोर्ब्स मैगजीन के मुताबिक यह संग्रह लॉडर के व्यक्तिगत संग्रह का 13 फीसदी हिस्सा होना चाहिए. पत्रिका ने लिखा है कि लॉडर का यह काम उनको दुनिया के बड़े दानवीरों में शामिल कर देता है.

इसी बीच, स्वामी विवेकानंद को जे डी सैलिंगर द्वारा लिखे गए पत्रों को मैनहटन के मॉर्गन लाइब्रेरी एंड म्यूजियम में दान किया गया है।

“द कैचर ऑफ द राय” के लेखक ने स्वामी को कुल 28 पत्र लिखे थे. सैलिंगर की मौत 2010 में 91 वर्ष की उम्र में हो गयी थी. वह प्राच्य दर्शन और धर्म से बेहद प्रभावित थे. उन्होंने अपनी कहानी में स्वामी विवेकानंद का उल्लेख किया था.

मॉर्गन संग्रहालय के पास अब सैलिंगर के लिखे कुल 52 पत्र हैं.

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