पश्चिमी देशों को चुकानी होगी बड़ी कीमत: असद

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Image caption सीरिया के स्वतंत्रता दिवस पर प्रसारित हुआ इंटरव्यू

सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल असद ने पश्चिमी देशों पर आरोप लगाया है कि वो उनके देश में अल कायदा का समर्थन कर रहे हैं और उन्हें अमरीका और यूरोप में इसकी बड़ी कीमत चुकानी होगी. एक सीरियाई टीवी को दिए इंटरव्यू में उन्होंने ये बात कही.

दो वर्षों से गृह युद्ध के हालात का सामना कर रहे सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल असद ने पश्चिमी देशों पर निशाना साधा है.

उन्होंने अफगानिस्तान का जिक्र करते हुए कहा है कि अमरीका की मदद से पहले वहां तालिबान खड़े हुए जिसकी बाद में अमराकी को ही चुकानी पड़ी.

उन्होंने साफ किया न तो झुकेंगे और न ही आत्मसमर्पण करेंगे.

पश्चिम को चेतावनी

राष्ट्रपति असद ने इस इंटरव्यू में कहा, "आखिकार सीरिया को भी कीमत चुकानी होगी. ये बड़ी कीमत होगी. अब हम सीरिया में बुनियादी ढांचे की बर्बादी के परिणाम देख सकते हैं, भले ही देश जीत जाए लेकिन वो कमजोर ही होगा. लेकिन पश्चिमी जगत नहीं जानता है, हो सकता है कि जानता भी हो लेकिन अभी इस बात को लेकर जागरुक न हो कि यूरोप में आंतकवाद की वापसी होगी."

उन्होंने आगे कहा, "पश्चिमी मीडिया में इन खतरों की बात होने लगी है. लेकिन ये तथ्य है कि उन्होंने अफगानिस्तान में चरमपंथियों को आर्थिक मदद दी और इसकी बड़ी कीमत चुकाई. और अब वे सीरिया में, लीबिया में और अन्य जगहों पर इनका समर्थन कर रहे हैं और बाद में यूरोप और अमरीका में इसकी कीमत चुकाएंगे."

सीरिया के एक बागी गुट अल-नुसरा फ्रंट ने हाल में कहा कि वो अल-कायदा के प्रति वफादार है. और ये गुट अमरीका का ब्लैकलिस्ट में भी है.

अल-इखबारिया टीवी पर प्रसारित इस इंटरव्यू को सीरिया के स्वतंत्रता दिवस के मौके पर दिखाया गया. सीरिया को 1946 में फ्रांस से आजादी मिली थी.

'जीत का विकल्प नहीं'

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Image caption सीरिया में जारी विद्रोह से जान माल का भारी नुकसान हो रहा है

अपने इस इंटरव्यू में असद ने साफ किया कि वो सीरिया में जारी संघर्ष में हारने का जोखिम नहीं उठा सकते हैं.

उन्होंने कहा, "जीत का कोई विकल्प नहीं है, वरना ये सीरिया का अंत होगा, और मुझे नहीं लगता कि सीरियाई लोग इसे स्वाकीर करेंगे."

असद के अनुसार सिर्फ सीरिया के लोग ही तय कर सकते हैं कि वो सत्ता में रहेंगे या नहीं.

दूसरी तरफ संयुक्त राष्ट्र के महासचिव बान की मून ने कहा है कि वो सीरियाई सरकार की अनुमति का इंतजार कर रहे हैं ताकि संयुक्त राष्ट्र के रासायनिक हथियार विशेषज्ञ सीरिया जा कर जांच कर सकें.

सीरिया में राष्ट्रपति असद के खिलाफ मार्च 2011 से विद्रोह जारी है जिसमें अब तक 60 हजार से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं.