बांग्लादेश: राजनीतिक पदों पर महिलाएं आगे

  • 30 अप्रैल 2013
शिरीन की नियुक्ति से इस्लामी गुट नाराज़ हैं

बांग्लादेश की संसद ने पहली बार एक महिला को अध्यक्ष के रुप में चुना है.

शिरीन शर्मिन चौधरी सत्ताधारी आवामी लीग की सदस्य हैं और इससे पहले वे महिला व बाल मामलों की मंत्री रह चुकी हैं.

उनकी नियुक्ति के साथ ही मुसलमान-बहुल राष्ट्र बांग्लादेश में चार में से तीन शीर्ष राजनीतिक पदों की अगुवाई महिलाएं करेंगीं.

बांग्लादेश की प्रधानमंत्री की कुर्सी पर शेख हसीना हैं जबकि मुख्य विपक्षी दल बीएनपी की अध्यक्ष खालिदा ज़िया हैं.

बांग्लादेश में महिलाओं के उत्थान के लिए बनी नीतियों में शिरीन शर्मिन चौधरी की बहुत बड़ी भूमिका रही है, जिसका इस्लामी गुटों ने जम कर विरोध किया था.

बीबीसी बंगाली सेवा के संपादक साबिर मुस्तफा का कहना है कि शिरीन की नियुक्ति से कई तबकों को प्रश्न खड़े किए हैं.

कच्ची खिलाड़ी?

जहां कुछ लोग उन्हें स्पीकर बनाए जाने के फैसले को प्रधानमंत्री शेख़ हसीना का एक ठोस क़दम मानते हैं, वहीं ये भी डर है क्योंकि इससे आवामी लीग के वरिष्ठ नेता नाराज़ हो सकते हैं.

सत्ताधारी पार्टी आवामी लीग के वरिष्ठ नेता उन्हें राजनीति में एक कच्चा खिलाड़ी मानते हैं.

उनकी नियुक्ति से मदरसा के इस्लामी गुट भी नाराज़ हो सकते हैं. उन्होंने धमकी दी है कि वे आगामी रविवार को 20 लाख समर्थकों को जुटा कर ग़ैर-इस्लामी कानूनों के खिलाफ रैली करेंगें.

इस्लामी गुटों की सूची में सबसे ऊपर वो महिला विकास नीति है जिसका आगाज़ दो साल पहले शिरीन शर्मिन चौधरी ने ही किया था.

छयालीस साल की शिरीन ने ढाका युनिवर्सिटी स्नातक किया और फिर ब्रिटेन से पीएचडी की.

उन्होंने ‘न्यू ऐज’ अखबार को बताया कि उनका मकसद महिलाओं को हिंसा से बचाना है.

उनका कहना था, “हमारे पास पर्याप्त कानून है, लेकिन फिर भी हिंसा की घटनाएं हो रही हैं. सिर्फ कानून से ही स्थिति नहीं बदली जा सकती. लोगों की मानसिकता में बदलाव लाने की ज़रूरत है. अड़चनें तो आएंगी ही, लेकिन इसके बावजूद महिलाएं आगे बढ़ रही हैं.”

शिरीन के पिता रफीकुल्लाह प्रधानमंत्री शेख हसीना के पिता शेख मुजीबुर रहमान के सेक्रेटरी रह चुके थे.

संबंधित समाचार