पाकिस्तान में तीर लगेगा या बल्ला चलेगा?

पाकिस्तान में चुनाव
Image caption पाकिस्तान चुनावी गर्मी में तप रहा है

भारत में जहां पंजे का निशान कांग्रेस की पहचान है, वहीं कमल को देखते ही भारतीय जनता पार्टी का अहसास होता है.

इससे चुनाव चिन्हों की अहमियत का साफ पता चलता है.

पाकिस्तान में आने वाले आम चुनाव में भी पार्टियां विभिन्न निशानों पर लोगों से वोट मांग रही हैं.

इनमें कुछ निशान पार्टी के नेताओं की शख्सियत को देखते हुए बिलकुल सही मालूम होते हैं.

मसलन क्रिकेट से राजनेता बने इमरान खान की पार्टी का निशान जहां बल्ला है वहीं पाकिस्तानी परमाणु कार्यक्रम के जनक कहे जाने वाले अब्दुल कदीर खान की पार्टी मिसाइल चुनाव चिन्ह के साथ मैदान में उतरी है.

एक नजर पाकिस्तान की बड़ी पार्टियों के चुनाव चिन्हों पर.

तीर और शेर

तीरः देश की सबसे बड़ी पार्टी पाकिस्तान पीपल्स पार्टी तीर के निशान पर लोगों से मुहर लगाने की अपील कर कर रही है.

हालांकि पार्टी को ये निशान हासिल करने के लिए खास जद्दोजहद करनी पड़ी. पार्टी का एक और धड़ा इस चिन्ह पर दावेदारी जता रहा है.

लेकिन चुनाव आयोग ने फैसला जरदारी के नेतृत्व वाली पाकिस्तान पीपल्स पार्टी (पार्लियामेंटेरियंस) के हक में सुनाया.

पीपीपी ने इस चुनावों में नारा दिया हैः जीते निशान, तीर का निशान.

शेरः नवाज शरीफ के नेतृत्व में पाकिस्तान मुस्लिम लीग (एन) शेर के निशान के साथ चुनाव में उतरी है.

इन चुनावों में पार्टी का नारा है: शेर का निशान, रोशन पाकिस्तान. शेर ताकत का प्रतीक होता है.

ऐसे में पार्टी अपनी चुनावी सामग्री में शेर को बखूबी इस्तेमाल कर रही है.

बल्ला और पतंग

Image caption पीएमएल (एन) का शेर निशान काफी समय से है

बल्ला: इमरान की खान की पार्टी के लिए शायद बल्ले से अच्छा कोई अच्छा निशान न हो.

ये उस खेल को दर्शाता है जिससे इमरान खान का वास्ता रहा है.

इसके अलावा युवाओं के बीच क्रिकेट बेहद लोकप्रिय भी है.

तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी के नेता इमरान खान के समर्थकों को “इंशा अल्लाह, जीते बल्ला जीते बल्ला” जैसे नारे लगाते देखा जा सकता है.

पतंगः मुख्य तौर पर कराची में प्रभाव रखने वाली एमक्यूएम पार्टी को चुनाव आयोग ने पतंग का निशान दिया है.

ऐसे में पार्टी के कई समर्थकों प्रचार के दौरान पतंग उड़ाते हुए देखा जा सकता है.

पार्टी ने पतंग को लेकर कई नारे भी गढ़े हैं जैसे ‘वोट फॉर काइट, वोट फॉर राइट’.

लालटेन और मिसाइल

लालटेनः लालटेन का निशान आवामी नेशनल पार्टी को दिया गया है जिसका खासकर खैबर पख्तून ख्वाह इलाके में बहुत असर माना जाता है.

हालांकि अब पार्टी देश की व्यापारिक राजधानी कहे जाने वाले कराची में भी अपने पांव पसार रही है.

ऐसे वहां एमक्यूएम के साथ उसका टकराव भी होता है.

मिसाइलः दुनिया भर में परमाणु प्रसार के आरोपों से घिरे पाकिस्तानी वैज्ञानिक अब्दुल कदीर खान को पाकिस्तान में परमाणु कार्यक्रम का जनक माना जाता है.

वह इन चुनाव में किस्मत आजमा रहे हैं.

चुनाव आयोग ने उनकी पार्टी तहरीक-ए-तहफ्फुज पाकिस्तान को मिसाइल चिन्ह दिया है.

किताब और दवात

Image caption एमक्यूएम की रैली का एक दृश्य.

किताबः जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम (एफ) बंद किताब का निशान पाकर बहुत खुश है.

पार्टी के अनुसार वो खुली किताब की बजाय हमेशा से बंद किताब का निशान चाहती थी.

इनके अलावा अन्य चुनाव निशानों में जमाते इस्लामी को जहां तराजू दिया गया है वहीं पूर्व सैन्य शासक परवेज मुशर्रफ की पार्टी ऑल पाकिस्तान मुस्लिम लीग को बाज का निशान दिया गया है.

अन्य पार्टियों में आवामी मुस्लिम लीग को दवात, बलूचिस्तान नेशनल पार्टी को ऊंट, पाकिस्तान मुस्लिम लीग (एफ) को गुलाब, जम्हूरी वतन पार्टी को पहिया और पाकिस्तान मुस्लिम लीग-एफ को पत्तियों का निशान दिया गया है.

इस तरह पाकिस्तान के इन आम चुनाव में 144 पार्टियां अलग-अलग निशान के साथ चुनाव में उतरी हैं.

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