ओसामा की मौत महज़ ड्रामा थी?

  • 6 मई 2013
ज़ीरो डार्क थर्टी फिल्म का एक दृश्य
Image caption ओसामा की मौत से जुड़ी सैन्य कार्रवाई पर बनी हॉलीवुड फिल्म 'ज़ीरो डार्क थर्टी' का एक दृश्य (लादेन के घर की चारदीवारी).

दो साल पहले जिस जगह पर अमरीकी सेना के विशेष अभियान में अल कायदा नेता ओसामा बिन लादेन मारे गए थे वहां अब बच्चे क्रिकेट खेलते हैं.

यहीं एक घर में ओसामा बिन लादेन खुफिया तौर पर रह रहे थे. अब वो घर तो नहीं रहा लेकिन आस-पास के लोग उसे भूल नहीं पाएंगे.

समरेज खान ओसामा बिन लादेन के घर के सामने ही रहते हैं और 2 मई 2011 की घटना के चश्मदीद भी हैं.

उस दिन के वाक़ये को बयान करते हुए समरेज कहते हैं, "रात को हम सोए हुए थे. तभी विमान इधर आए और विमान ने धमाका किया. फिर उसने चक्कर लगाए. एक चक्कर लगाने के बाद विमान ने फिर धमाका किया. उसके बाद वह यहां से चला गया. विमान की आवाज़ बहुत ज्यादा थी. दूसरे विमान का हमें कोई पता नहीं चला. फिर सब लोग गली में चले आए. मैं भी बाहर चला आया और वहां देखा कि विमान में आग लगी हुई है."

सबसे वांछित व्यक्ति

अल कायदा नेता की मौत को अब दो साल पूरे हो गए हैं.

लेकिन ये सवाल बराबर अपनी जगह पर बरकरार है कि ओसामा बिन लादेन यहां बरसों तक कैसे रहते रहे और किसी को कानों कान ख़बर तक नहीं हुई.

हालांकि शहर के लोग अब भी ये यकीन करने को तैयार नहीं है कि ओसामा बिन लादेन इसी शहर में एक अमरीकी हमले में मारे गए थे.

ज्यादातर लोगों का कहना है कि वो दुनिया का सबसे वांछित व्यक्ति यहां मौजूद ही नहीं था.

एबटाबाद के एक शहरी कहते हैं, "समझ में नहीं आ रहा है कि रातों रात अमरीका आया और उसने हमारे एक बहुत बड़े फौज़ी ठिकाने के करीब हमला किया और ओसामा बिन लादेन का एक ड्रामा रचाया गया. जो ड्रामा हकीकत में कुछ भी नहीं है. अमरीका ने अपनी हार स्वीकार करते हुए जिला एबटाबाद के अमनपसंद इलाके को खतरे में डाल दिया."

एक अन्य शहरी की भी राय इससे मिलती-जुलती थी, "दो मई का वाक़या एक ड्रामा ही लगता है. क्योंकि कभी किसी ने ओसामा बिन लादेन को न देखा था और न सुना था. ये अमरीका के ड्रामे की तरह ही लगता है. अगर वह एबटाबाद में रहता तो कोई न कोई उसे जरूर देखता."

'कार्रवाई एक नाटक'

Image caption मौत के बाद भी ओसामा को लेकर संशय बरकरार है.

एबटाबाद की घटना के एक अहम मुल्जिम डॉक्टर शकील अफरीदी तकरीबन दो सालों से जेल में है.

बताया जाता है कि उन्होंने ही 'झूठा टीकाकरण अभियान' चला कर ओसामा बिन लादेन को पकड़ने में मदद की.

देशद्रोह के मामले में डॉक्टर अफरीदी पेशावर की सेंट्रल जेल में 37 साल की सजा काट रहे हैं.

उनके वकील समीउल्लाह अफरीदी भी अमरीकी कार्रवाई को एक नाटक ही मानते हैं.

वह कहते हैं, "ड्रामा रचाया गया था. इसमें कोई हकीकत नहीं है. जहां तक इस मुकदमे के भविष्य की बात है कि डॉक्टर शकील अफरीदी का क्या होगा. मेरे ख्याल से डॉक्टर साहब तब तक जेल में रहेंगे जब तक कि पाकिस्तान की हुकूमत और अमरीका में कोई समझौता न हो जाए."

दो मई 2011 की घटना के बाद अब ना एबटाबाद में ओसामा बिन लादेन रहे और न ही उनका ठिकाना.

लेकिन इसके साथ-साथ इस घटना से जुड़े वो तथ्य भी सामने नहीं आ सके, जो पाकिस्तानी जनता और उनके साथ साथ दुनिया भर के लोग भी जानना चाहते हैं.

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