क्या नवाज़ शरीफ़ बना पाएंगे रिकॉर्ड?

नवाज़ शरीफ़
Image caption नवाज़ शरीफ़ की रैलियों में भारी भीड़ जमा हो रहा है.

नवाज़ शरीफ़ पंजाब के सरगोदा के एक चुनावी रैली में मंच पर आते हैं. सर्मथकों का एक वर्ग हाथ में पीएमएल (एन) का निशान टंका हुआ हरे रंग का हैट लिए है, और नवाज़ शरीफ़ से कहता है कि वो उसे पहनें.

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री ये कहते हुए इंकार कर देते हैं कि वो "इसे 11 मई को पहनेंगे." पाकिस्तान में 11 मई को मतदान होना है.

बीस हज़ार की वहां जमा भीड़ जोश से भर उठती है, और जीत के नारे लगाने लगती है.

एक समर्थक कहता है कि वो पाकिस्तान के लिए इकलौती उम्मीद हैं. "वही हैं जो बेरोज़गारी, मंहगाई और बिजली की बुरी स्थिति पर रोक लगा सकते हैं."

नया रिकॉर्ड?

शरीफ इस चुनाव में पसंदीदा उम्मीदवारों में से एक बताए जा रहे हैं, और अगर वो जीत जाते हैं, तो पाकिस्तान के राजनीतिक इतिहास में एक नया रिकॉर्ड क़ायम करेंगे. इससे पहले कोई भी नेता तीन बार प्रधानमंत्री नहीं बना है.

पूर्व सेना प्रमुख परवेज़ मुशर्रफ ने नवाज़ शरीफ़ को सत्ता से बेदख़ल कर दिया था, जिसके बाद उन्हें निर्वासन में जाना पड़ा था.

मुल्क में पिछली सरकार में फैले भ्रष्टाचार और अक्षमता को लेकर भारी ग़ुस्सा है.

पूर्व प्रधानमंत्री दिन रात चुनाव प्रचार में लगे हैं और उनकी कोशिश है कि मतदान से पहले ज्यादा से ज़्यादा शहरों और गांवों का दौरा कर सकें.

वो अपनी सरकार की कामयाबियों के बारे में बताकर वोटरों को प्रभावित करने की कोशिश करते हैं. उनके छोटे भाई हाल तक पंजाब सूबे के मुख्यमंत्री थे.

उनकी रैलियों में बड़े-बड़े होर्डिंग लगे होते हैं, जिसमें उनके दौर में तैयार हुई तीन-लेन वाले राजपथों और रैपिड ट्रांज़िट बस सिस्टम की तस्वीरें मौजूद होती हैं.

बस सिस्टम का उद्घाटन उनके भाई शाहबाज़ शरीफ़ ने लाहौर में फरवरी में किया था.

सर्वे में बढ़त

हाल में आए सर्वेक्षणों में से अधिकतर ने नवाज़ शरीफ़ को दूसरे उम्मीदवारों से आगे रखा है. हालांकि उन पर कितना भरोसा किया जा सकता है ये तो नतीजे आने के बाद ही पता चलेगा.

Image caption पीएमएल (एन) के लिए इमरान की पार्टी नुकसानदेह साबित हो सकती है

पीएमएल (एन) के कार्यकर्ताओं को भरोसा है कि उन्हें पंजाब में भारी सर्मथन हासिल होगा. पंजाब में देश की 60 प्रतिशत आबादी रहती है, और वहां मिले भारी समर्थन के बल पर मुल्क में सरकार बनाने का मौक़ा मिल सकता है.

साल 1997 में भी पार्टी को पंजाब में काफी समर्थन हासिल हुआ था, और उन्हें देश की संसद में दो तिहाई बहुमत मिला था.

नवाज़ शरीफ़ तालिबान के हिट-लिस्ट पर भी नहीं हैं, जो एक तरह से उनके प्रचार के हित में है क्योंकि चरमपंथी संगठन की धमकी की वजह से पाकिस्तान पीपल्स पार्टी का प्रचार धीमा है.

'लड़ाई मुश्किल है'

एक चुनावी रैली में नवाज़ शरीफ़ मंच पर मौजूद कार्यकर्ताओं से कहते हैं कि वो बुलेट-फ्रूफ ग्लास को वहां से हटाएं ताकि वो अपने वोटरों से बिना किसी रुकावट के बात कर सकें.

भीड़ ये सुनते ही जैसे पागल हो उठती है और लोग पार्टी के झंडे को हवा में लहराने लगते हैं, उनकी बहादुरी के नारे लगाते हैं.

समाजसेवी और विश्लेषक अज़मत अब्बास कहते हैं, "शरीफ़ के लिए लड़ाई उससे ज़्यादा मुश्किल है जितना वो पहली नज़र में लगती है."

वो कहते हैं कि पीपीपी सरकार की नक़द-मदद स्कीम ने गांवो में मौजूद जनता के बीच पार्टी के समर्थन को बढ़ाया है.

उन्हें दूसरा ख़तरा पूर्व क्रिकेटर इमरान ख़ान से है, जिन्हें पश्चिम-विरोधी भावना रखने वाले उस रूढ़िवादी तबक़े में समर्थन हासिल है जो नवाज़ शरीफ़ के पीछे भी खड़ा दिखता है.

इमरान ख़ान भी नेताओं की उस लिस्ट पर नहीं हैं जिसे तालिबान की धमकी मिली हो, इसलिए उनका चुनाव प्रचार भी आक्रामक ढंग से चल रहा है, जिसमें वो नवाज़ शरीफ़ को बराबर निशाना बना रहे हैं.

गठबंधन सरकार का तजुर्बा

रक्षा और राजनीतिक मामलों के विशेषज्ञ हसन असकरी रिज़वी कहते हैं कि हो सकता हो पीएमएल (एन) की सीटों की संख्या पीपीपी के मुक़ाबले बढ़ जाएं लेकिन दोनों में से किसी को भी बहुमत का 275 का आंकड़ा हासिल नहीं होगा.

उनका कहना है कि गठबंधन सरकार चलाने का पीपीपी का रिकॉर्ड पीएमएल (एन) से बेहतर है.

मगर हसन असकरी कहते हैं कि अगर पीएमएल (एन) को पीपीपी से 25 सीटें अधिक हासिल होती हैं तो नवाज़ शरीफ़ प्रधानमंत्री बन सकते हैं.

हालांकि वो कहते हैं कि इस सरकार का झुकाव दक्षिणपंथियों की तरफ़ होगा जो चरमपंथ के ख़िलाफ़ लड़ाई को प्रभावित करेगा.

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