सस्ते फ़ोनों को ऐप क्यों भूले ?

फ़ीचर फ़ोन
Image caption उभरते बाज़ारों में अब भी बेसिक और फ़ीचर फ़ोन का ही बोलबाला है

अगली बार जब आप किसी बस स्टॉप पर खड़े-खड़े लेटलतीफ बस को कोस रहे हों तो एकबारगी मिलिंद दहिकर के बारे में ज़रूर सोचिए.

संभव है कि मुंबई के दहिकर आपसे भी ख़राब मौसम का सामना कर रहे हों और हो सकता है कि वो जिस बस का वो इंतजार कर रहे हों वो आए ही नहीं.

मुंबई की सड़कों का नक्शा हर साल बदल जाता है और यातायात अपनी अनिश्चितता के लिए कुख्यात है.

दहिकर ने कहा, "मेरा घर बस स्टॉप से लगभग 15 मिनट की दूरी पर है. मुझे यहां तक आने के लिए ऑटो रिक्शा करना पड़ता है. मैं घर से सही समय पर निकलता हूं ताकि बस आने से पहले पहुंच सकूं."

उन्होंने कहा, "अक्सर मैं जल्दी पहुंच जाता हूं. खास कर मॉनसून के दिनों में बसें देरी से आती हैं. मुझे बस या वैकल्पिक व्यवस्था के इंतजार में घंटों उमसभरी गर्मी या भारी बारिश में खड़े रहना पडता है."

ऐप

पश्चिमी देशों में आपके स्मार्टफोन पर ऐसा ऐप होता है जो आपको बस के बारे में बराबर सूचना देता रहता है.

लेकिन भारत में मोबाइल ढांचा इतना विकसित नहीं है.

अगर ऐसे ऐप उपलब्ध भी हैं तो स्मार्टफ़ोन के अभाव में वो इसका फायदा नहीं उठा पाते हैं.

दहिकर आईटी आउटसोर्सिंग प्रोवाइडर मास्टेक में काम करते हैं.

उनकी कंपनी ने अपने कर्मचारियों को इन समस्याओं से निजात दिलाने के लिए एक हल निकाला है.

कंपनी के वाइस प्रेसिडेंट (सोल्यूशंस एंड स्ट्रैटजी) स्टीव लेशम ने कहा, "हमने कर्मचारियों को लाने ले जाने वाली बसों पर एक सामान्य और सस्ता जीपीएस आधारित डिवाइस लगाया है."

वह कहते हैं, "हमारा सर्वर इस डिवाइस की मदद से बस की जानकारी जुटाता है और फिर इसे हमारे मोबाइल ऐप पर भेज देता है. जिन लोगों के पास बेसिक मोबाइल हैं उन्हें एसएमएस भेजकर बस के बारे में जानकारी भेजी जाती है."

फ़ीचर फ़ोन

विकासशील देशों में फ़ीचर फ़ोन बेहद लोकप्रिय हैं.

ऐसे फ़ोन में जीपीएस, कैमरा, एमपी3 प्लेयर और इंटरनेट एक्सेस की बेसिक सुविधाएं होती हैं.

Image caption ऐप की मदद से बेसिक मोबाइल पर भी फेसबुक प्रोफाइल को अपडेट कर सकते हैं

ये फ़ोन बेसिक फ़ोन और स्मार्टफ़ोन के बीच की कड़ी होते हैं.

हो सकता है कि पश्चिम के ज्यादातर लोग फ़ीचर फ़ोन को देखकर नाक भौं सिकोड़ें लेकिन ये फ़ोन सस्ते़ और मजबूत होते हैं और इनकी बैटरी लंबे समय तक चलती है.

कुल मिलाकर ये फ़ोन उभरती अर्थव्यवस्थाओं के अनुरूप हैं.

रिसर्च फ़र्म गार्टनर के मुताबिक साल 2012 की चौथी तिमाही में दुनियाभर में 26.44 करोड़ फ़ीचर फ़ोन बिके जबकि स्मार्टफ़ोन की संख्या 20.77 करोड़ रही.

इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि फ़ीचर फ़ोन का बाज़ार कितना बड़ा है.

अब सवाल उठता है कि इसके बावजूद ऐप्स बनाने वाली कई कंपनियों ने फ़ीचर फ़ोन को नज़रअंदाज क्यों किया.

मोबाइल ऐप डेवलपमेंट फ़र्म बोल्सर के डायरेक्टर एश्ले बोल्सर ने कहा, "ऐसा इसलिए होता है क्योंकि हम तकनीक की दुनिया में काम करते हैं और हमें हमेशा कुछ नया चाहिए होता है."

उन्होंने बताया, "अक्सर हम भूल जाते हैं कि बड़ी संख्या में ऐसे लोग भी हैं जो इंटरनेट एक्सेस करना चाहते हैं और डाउनलोड करना चाहते हैं और उनके पास ऐसा करने लिए केवल फ़ीचर फ़ोन ही है."

सफल

बोल्सर फ़ीचर फ़ोन के लिए नया ऐप बनाने के बजाए डेटा को आसान बनाने में यकीन रखते हैं.

उनकी कंपनी ने हाल ही में बीबीसी के टॉप गियर न्यूज़ ऐप का फ़ीचर फ़ोन वर्ज़न बनाया जो दक्षिण पूर्व एशिया में काफी सफल हुआ था.

फ़ीचर फ़ोन को ऐप्स और अन्य सेवाएं मुहैया कराने वालों को कुछ समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है.

पहली समस्या लोगों को इस बात की जानकारी ही नहीं है कि फ़ीचर फ़ोन के लिए ऐप्स उपलब्ध हैं.

दूसरी समस्या ये है कि ऐसे ऐप्स खरीदने के लिए क्रेडिट या डेबिट कार्ड का जरूरत होती है.

हाल में नाइजीरिया, भारत, सऊदी अरब और ब्राजील में 3500 उपभोक्ताओं के बीच कराए गए सर्वेक्षण के मुताबिक केवल 29 प्रतिशत लोग ही कार्ड से भुगतान करना चाहते हैं.

ईटूसेव के रॉब होजेस ने कहा कि इस समस्या को दूर करने का प्रयास किया जा रहा है.

इसके तहत 31.4 करोड़ उपभोक्ता ऐप्स खरीदने के लिए फ़ोन बिल के ज़रिए भुगतान कर सकेंगे.

दुनियाभर में मोबाइल की बिक्री पर नज़र रखने वाली संस्था इंटरनेशनल डेटा कॉरपोरेशन (आईडीसी) के मुताबिक इस साल स्मार्टफ़ोन की बिक्री फ़ीचर फ़ोन से अधिक हो जाएगी.

अनुमान

आईडीसी का अनुमान है कि इस साल बिकने वाले स्मार्टफ़ोन की संख्या 91.86 करोड़ तक पहुंच जाएगी जो कि दुनियाभर में बिकने वाले कुल मोबाइलों की संख्या का 50.1 होगी.

Image caption फ़ीचर फ़ोन के लिए ऐप्स विकसित करने का मतलब है तकनीक को सरल रखना

इससे सवाल उठता है कि जिन कंपनियों ने फ़ीचर फ़ोन को नज़रअंदाज किया, क्या उन्होंने सही किया क्योंकि स्मार्टफ़ोन लगातार लोकप्रियता हासिल कर रहा है.

डेलोइट डिजिटल साउथ अफ्रीका के मैनेजर (मोबाइल टेक्नोलॉजीज) जो होहलर ने कहा कि ऐसा सोचना मोबाइल मार्केट को समझने में गलती करना है.

उन्होंने कहा, "असली मुद्दा ये है कि नए डिवाइस की बिक्री के बारे में सोचने के बजाए उस मोबाइल के बारे में सोचिए जो इस समय लोगों के पास है."

जो ने कहा, "कई उभरते बाज़ारों में हैंडसेट का दोबारा इस्तेमाल किया जाता है, बेचा जाता है और इसे परिवार के अन्य सदस्यों को दे दिया जाता है."

जहां तक मोबाइल फ़ोन ऐप्स की बात है तो ये जमाना ‘बडे़, बेहतर, तेज़ और ज्यादा’ का है.

आपको आश्चर्च होगा कि ऐसे में ‘छोटा, सादा, धीमा और कम’ भी समान रूप से अच्छा मंत्र हो सकता है.

संबंधित समाचार