पाक चुनाव तालिबान पर जनमत संग्रह

  • 9 मई 2013
तालिबान की वजह से पीपीपी, पीएमएल (एन) और एएनपी ठीक से चुनाव प्रचार नहीं कर पाई हैं.

पाकिस्तान में शनिवार को होने वाले आम चुनाव से पहले पूरे देश में हिंसा देखने को मिली है. चुनाव को लेकर तालिबानियों ने धमकी भी दी हुई है, ऐसे में लग रहा है कि ये चुनाव एक तरह से तालिबानी नीतियों पर जनमत संग्रह साबित होने वाला है.

अवामी नेशनल पार्टी (एएनपी) के नेता असफ़ंदयार वली ने हाल ही में मुझसे कहा था.''आजकल पाकिस्तान में तालिबान नेता हकीमुल्लाह मेहसूद ही मुख्य चुनाव आयुक्त के तौर पर काम कर रहे हैं. उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त फखरुद्दीन जी इब्राहिम की जगह ले ली है.''

दरअसल महसूद वे ही यह तय कर रहे हैं कि चुनाव में कौन से पार्टी चुनाव अभियान चलाएगी और कौन नहीं. उन्होंने काफी हद तक अपने जोर से वह सब करा लिया है, जो वे कराना चाहते थे.

तालिबान का असर

मेहसूद ने चुनाव अभियान को अबतक काफी हद तक प्रभावित किया है. अब देखना यह है कि चुनाव के दिन वे क्या असर डालते हैं. वे लोगों को मतदान केंद्र तक जाने से रोक पाते हैं या नहीं? क्योंकि अब तक यही जाहिर हुआ है कि तालिबान कोशिश कर रहा है कि लोग चुनाव के दिन मतदान के लिए घर से न निकलें.

पाकिस्तान में अबतक के चुनाव अभियान पर नजर डालें तो, हिंसा ने चुनाव अभियान को काफी हद तक प्रभावित किया है. पाकिस्तान तालिबान की धमकी की वजह से पाकिस्तान के तीन बड़े राजनीतिक दल पाकिस्तान पीपल्स पार्टी (पीपीपी), पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज) और अवामी नेशनल पार्टी (एएनपी) पूरी तरह से अपना अभियान नहीं चला पाए हैं.

इसका एक नकारात्मक प्रभाव यह पड़ा कि जिन मुद्दों पर बात होनी चाहिए थी, उन पर पाकिस्तान के मतदाताओं के बीच कोई बात नहीं हो पाई है.

बिजली की कमी और बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर मतदाताओं के बीच कोई चर्चा नहीं हुई है.पिछले पांच साल में राजनीतिक दलों ने कितना काम किया है, उसपर भी कोई बात नहीं हुई है. लोग केवल हिंसा पर बात कर रहे हैं. चुनाव प्रचार के दौरान पाकिस्तान में हिंसा थम नहीं रही है.

इमरान पर संशय

क्रिकेटर से नेता बने इमरान ख़ान चुनाव प्रचार के दौरान मंच से गिरकर घायल हो गए थे

लाहौर में एक चुनावी रैली के दौरान इमरान ख़ान स्टेज से गिर गए. मुझे लगता है कि इससे उनके प्रति लोगों में थोड़ी सहानुभूति जगेगी. उन्होंने अस्पताल से ही मतदाताओं के नाम संदेश जारी किया है. उसी के उनकी पार्टी तहरीक-ए-इंसाफ़ का चुनाव अभियान टीवी पर चल रहा है.

उनका यह संदेश भावुकता से भरा हुआ है. इससेस वे मतदाता जो अब तक कोई फ़ैसला नहीं ले पाए हैं, उनका झुकाव इमरान की ओर हो सकता है.

वैसे हकीकत यह है कि इमरान पहली बार इतने बड़े पैमाने पर चुनाव में अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहे हैं. लेकिन आम लोगों में उनको लेकर अभी संशय बन हुआ है.

लोगों को शक है कि क्या इमरान के पास एक ऐसी टीम है, जो पूरा काम कर सकती है? क्या इमरान वैसे नेता हैं जो अपने वादे पूरे कर पाएंगे? वे दूसरे अन्य राजनेताओं से कितने अलग हैं?

इन्ही सब सवालों पर आम मतदाताओं में इमरान को लेकर हिचकिचाहट भी है.

बहुत समय बाद पाकिस्तान में एक ऐसा चुनाव होने जा रहा है जिसमें यह साफ नहीं है कि कौन सी पार्टी चुनाव जीत रही है. इस लिहाज से इस चुनाव को बाक़ी के चुनाव से अलग माना जा सकता है.

(बीबीसी संवाददाता रूपा झा से हुई बातचीत पर आधारित)

संबंधित समाचार