बोलने, गाने तो दे पाक की नई सरकारः बेग़ैरत बैंड

  • 12 मई 2013
पाकिस्तान का बेगैरत बैंड

आम तौर पर राजनीति और कलाकारों को एक दूसरे से अलग ही देखा गया है.

लेकिन पाकिस्तान में एक पॉप बैंड इस बार चुनावों और देश की सियासी हालत पर न केवल गाने लिखे बल्कि फ़ौजियों, कठमुल्लों और नेताओं का मज़ाक भी जम कर उड़ाया. नतीजा रहा कि इनके गानों को दिख़ाने पर देश में पाबंदी लग गई.

इनके सियासी गीत लोकप्रिय तो हैं लेकिन जम कर विवादों में भी घिरे रहते है.

सियासी गीत

लाहौर का बेग़ैरत ब्रिगेड आम गीत नहीं गाता है. उनके शब्दों में उनके गीत सियासी है, पॉलीटिकल सैटायर यानी व्यंग्य हैं.

बैंड का मानना है कि ऐसे सियासी गीत गाने वाले वे पाकिस्तान में इकलौते हैं.

इसीलिए पाकिस्तान में हो रहे चुनाव पर, उसकी सियासत पर, पाकिस्तान के समाज पर और इन सब के ठेकेदार समझने वालों पर इनकी टिप्पणी गाने के जरिए होती है.

बोलने का हक चाहिए

बैंड के प्रमुख गायक अली आफताब सईद कहते है कि ऐसे गीत गाने का फ़ैसला सोच समझ कर लिया गया है और चुनाव से एक बड़ी उम्मीद बंधी है.

वह कहते हैं, "इस चुनाव में जो भी सरकार बनाए, हमें एक हक जरूर दे, बोलने की आज़ादी दे. मैं खुद एक पत्रकार हूं. सियासी, इंकलाबी गीत गाने का फ़ैसला लेने के पीछे सबसे बड़ी वजह ये है कि हमे लगा कि हम चुटकी लेने के अंदाज़ में गंभीर बातें कह सकते हैं."

सईद का कहना है "यह आम लोगों को बुरा भी नहीं लगता और हम एक एक शब्द पर बेहद गौर से तौल कर इस्तेमाल करते हैं."

Image caption चुनाव से हर किसी की अपनी-अपनी उम्मीदें हैं.

पाकिस्तान के सियासी हालात पर बतौर कलाकार और अधिक रोशनी डालते हुए अली ने बताया कि इस माहौल में जब दहशतगर्दी बरकरार है, सबसे ज़्यादा नुकसान कलाकारों का हुआ है. यहां कोई संगीत समारोह नहीं होता, काम नहीं मिलता.

आलू अंडे और धिनक धिनक

बेग़ैरत ब्रिगेड 2011 में बना और अभी इसके तीन सदस्य हैं.

अली आफताब सईद के अलावा दानियाल मलिक और हम्ज़ा मलिक.

इन्हें शोहरत अपने गीत आलू अंडे से मिली जिसमें उन्होंने सरकार, मीडिया और इसके ठेकेदारों पर जम कर तंज़ किया था.

( आलू अंडे के वीडियो के लिए यहां क्लिक करें)

इस गीत ने इंटरनेट पर धूम मचा दी और फिर पिछले दिनों वे एक और व्यंग्य गीत लेकर आए हैं, धिनक धिनक धिन ता धा.

इस गीत में वे सेना और सियासतदानों के जवाबदेही न लेने पर सवाल उठा रहे हैं.

खबरे हैं कि पाकिस्तान में इस गीत पर पाबंदी लगा दी गई है.

हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई.

( धिनक धिनक के वीडियो के लिए यहां क्लिक करें)

डर तो लगता है

बेग़ैरत ब्रिगेड को लोगों से मिल रही तारीफ़ से अपने काम पर भरोसा बढ़ता है.

अली कहते हैं कि इस बैंड के गीत हमेशा इंकलाबी ही होंगे.

लेकिन डर के माहौल से वे इंकार नहीं करते.

उन्होंने कहा, “देखिए जिस तरह का हम काम करते हैं तो डर तो लगता है. अब भी लग रहा है लेकिन ये भी सच है कि हम एक बदल रहे पाकिस्तान में रह रहे हैं."

वह आगे कहते हैं, "ऐसे सियासी गीत हम लिख रहे हैं, गा रहे हैं और सत्ता हमें ये करने दे रही है अपने आप में इस बदल रहे पाकिस्तान का सबूत है. हम इसी जज़्बे के साथ अपनी बात कहते जाएंगे."

बेग़ैरत बैंड का मानना है कि कलाकारों को राजनीति में दिलचस्पी लेनी चाहिए कम से कम इतनी तो ज़रूर कि अपने वोट और अपनी आवाज़ को ज़ाया न होने दे.

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