यूट्यूब पर पे चैनल की शुरुआत

  • 10 मई 2013
Image caption गूगल ने 2006 में एक अरब 65 अरब डॉलर की लागत से यूट्यूब की शुरुआत की थी

वीडियो शेयर करने के लिए मशहूर यूट्यूब ने अपनी वेबसाइट पर पेड चैनल यानी की पैसे देकर देखे जाने वाले चैनल की शुरुआत, प्रायोगिक तौर पर शुरू की है.

पायलट प्रोजक्ट के रूप में शुरू की गई इस परियोजना के तहत चैनल उपभोक्ताओं को 99 सेंट प्रतिमाह यानी करीब 50 से 60 रुपए की दर से यह सुविधा उपलब्ध कराएंगे.

हर चैनल उपभोक्ताओं को 14 दिन की मुफ़्त सुविधा का पेशकश करेगा. बहुत से चैनल सालाना फीस में छूट भी देंगे.

हालांकि शुरू में इस सुविधा के लिए 53 चैनलों को चुना गया है.

कमाई का अवसर

यूट्यूब की मालिक गूगल है, उसने कहा है कि इस सुविधा को शुरू करने का उद्देश्य सामाग्री बनाने वालों को उनकी रचनात्मकता के लिए कुछ कमाई करने देने का अवसर उपलब्ध करना है.

इसे इस तरह समझ सकते हैं कि बच्चों में लोकप्रिय चैनल ‘सेसमी स्ट्रीट’ जब लांच किया जाएगा तो वह पूरे एपिसोड अपने पे चैनल पर उपलब्ध कराएगा.

उपभोक्तता अपने क्रेडिट कार्ड या गूगल की वाटेल सुविधा के जरिए इसके लिए भुगतान कर सकते हैं.

पायटल प्रोजक्ट में शामिल किए गए चैनलों में विविधता है. इनमें नेशनल जियोग्राफिक किड्स, कुछ ब्रिटिश टीवी धारावाहिकों को दिखाने वाला ‘एकॉर्न’ जैसे चैनल शामिल हैं.

यूट्यूब ने अपने ब्लॉग पर कहा है कि यह तो अभी सिर्फ शुरुआत है. आने वाले हफ्तों में सेल्फ सर्विस फीचर के तहत और भी चैनल लेकर आएँगे.

यूट्यूब पर पेड चैनल की शुरुआत का मतलय यह है कि गूगल सदस्यता पर आधारित टीवी चैनल देखने की सुविधा उपलब्ध कराने वाले नेटफ्लिक्स, हुलु और अमेजन के क्लब में शामिल हो गया है.

इंटरनेट और टीवी

ऑनलाइन मीडिया की विशेषज्ञ इयान मौड ने बीबीसी से कहा,'''यूट्यूब की इस पहल से इस तरह की सुविधा उपलब्ध कराने वाले छोटे प्लेटफार्म के लिए मुश्किल खड़ी हो जाएगी, क्योंकि गूगल के पास सामाग्री को रखने, उसे लोगों तक पहुंचाने और उसका प्रचार करने का बुनियादी ढांचा उपलब्ध है.''

गूगल ने 2006 में 1.65 अरब डॉलर की लागत से यट्यूब की शुरुआत की थी. माना जाता है कि उसे इस पर विज्ञापन से बहुत कम आमदनी होती है. लेकिन इस पर उपलब्ध विडियो के विशाल संग्रह को देखने के लिए लोगों को किसी तरह का भुगतान नहीं करना पड़ता है.

संभावित विज्ञापनदाताओं के लिए इसे और आकर्षक बनाने के लिए यूट्यूब ने धीरे-धीरे इस पर पूरी फ़िल्म और टीवी सीरियल जैसी पेशेवर सामग्री डालने की शुरुआत की है.

यूट्यूब का कहना है कि दुनियाभर के एक अरब लोग हर महीने इस सुविधा का लाभ उठाते हैं.

कंपनी ने मार्च में कहा था,''यूट्यूब अगर एक देश होता तो, वह चीन और भारत के बाद दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा देश होता.''

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