नाइजीरिया: बोको हराम के खिलाफ बड़ी कार्रवाई

Image caption नाइजीरिया की सरकार ने बोको हराम के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा अभियान चलाया है

नाइजीरियाई सरकार ने देश के उत्तर पूर्वी राज्यों में इस्लामी चरमपंथियों से निपटने के लिए बड़े पैमाने पर लोगों को तैनात कर दिया है.

एक बयान में कहा गया है कि ये कदम देश की क्षेत्रीय अखंडता और सुरक्षा को सुनिश्चित करने के मकसद से उठाया गया है.

मंगलवार को राष्ट्रपति गुडलक जोनाथन ने तीन उत्तर पूर्वी राज्यों- योब, बोर्नो और अदामावा में हाल ही में हुए कई हमलों के मद्देनज़र आपातकाल की घोषणा कर दी थी.

इनमें से ज्यादातर के लिए इस्लामी चरमपंथी गुट बोको हराम के लड़ाकों को ज़िम्मेदार ठहराया गया है.

इस चरमपंथी गुट की जड़ें देश के उत्तर पूर्वी हिस्से में हैं और साल 2010 से जारी इनकी हिंसा में अब तक करीब दो हज़ार लोग मारे जा चुके हैं.

पिछले तीन सालों से देश के इस हिस्से पर बोको हराम का नियंत्रण है और ज्यादातर हिंसा भी इसी इलाके में हो रही है.

हालांकि इसी गुट ने साल 2011 और 2012 में राजधानी अबूजा में भी बम से हमले किए थे.

माना जाता है कि इन चरमपंथियों के सहारा इलाके में अल-क़ायदा से संबंध रखने वाले चरमपंथियों से भी संबंध हैं. जानकारों का मानना है कि ये लोग कैमरून की सीमा से आते हैं और हमले करने के बाद वापस उधर लौट जाते हैं.

सांस्कृतिक विविधता

नाइजीरिया में तमाम नस्लों के करीब सोलह करोड़ लोग रहते हैं. यहां ज़मीन, धर्म और तेल को लेकर भी अक्सर विवाद होते रहते हैं.

बुधवार को देश के रक्षा मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा कि पुलिस और दूसरे सुरक्षा बलों ने सीमा पर हो रही चरमपंथी गतिविधियों से छुटकारा पाने का अभियान शुरू कर दिया है.

इस अभियान का मकसद सरकारी विभागों की सुरक्षा को और बढ़ाना है क्योंकि पिछले दिनों राष्ट्रपति जोनाथन ने कहा था कि सरकारी इमारतों पर हमला करना देश के विरुद्ध युद्ध समझा जाएगा.

बोर्नो, अदामावा और योब देश के सबसे गरीब राज्यों में से एक हैं और ये तेल से भरपूर दक्षिणी इलाके से भी काफी दूर हैं.

राष्ट्रपति के प्रवक्ता डोइन ओकूप ने बीबीसी को बताया, “सीमा पर होने वाले अपराध देश की सबसे बड़ी समस्या हैं. इसके अलावा ऐसे भी सुबूत मिले हैं कि हमला करने वाले ज्यादातर गैर नाइजीरियाई लोग हैं.”

उनका कहना था कि जब तक ये चरमपंथी वहां से चले, तब तक हम परेशानी में ही रहेंगे.

स्थानीय लोगों का कहना था कि यहां तो पहले से ही सेना और हथियारों की बहुतायत है.

बोको हराम सरकार को उखाड़ फेंकने और वहां इस्लामी कानून लागू करने के लिए लड़ रही है.

हालांकि उनके निशाने पर मुख्य रूप से ईसाई समुदाय के लोग और सरकारी इमारतें रहती हैं लेकिन हिंसा में अब तक बड़ी संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोग भी मारे जा चुके हैं.

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