पाकिस्तान: 18 घंटों तक की बिजली कटौती, हाल बेहाल

  • 25 मई 2013

पाकिस्तान में हाल में हुए आम चुनावों में जीत दर्ज करने वाली पाकिस्तान मुस्लिम लीग (एन) ऐसे वक्त में सरकार बनाने जा रही है जब वहां बिजली की किल्लत अपने चरम पर है.

पाकिस्तान में कई ऐसे इलाके तो ऐसे हैं जहां 20-20 घंटे बिजली नहीं आ रही है.

पिछली सरकार का नेतृत्व करने वाली पाकिस्तान पीपल्स पार्टी ने माना है कि चुनावों में उसकी हार की एक बड़ी वजह बिजली संकट भी रहा.

ऐसे में प्रधानमंत्री पद संभालने जा रहे नवाज शरीफ ने बिजली के संकट से निपटने को अपने प्राथमिकता बताया है.

लेकिन पाकिस्तान में बरसों से जारी इस समस्या से निपटने में वो कितने कामयाब होंगे इस सवाल का जवाब कई लोग खोज रहे हैं.

पाकिस्तान में जब भी लाइट जाती है, कहने वाले कहते हैं कि ये लाइट अपने साथ पीपल्स पार्टी की सरकार को भी ले गई.

टास्क फोर्स का गठन

Image caption बिजली के इतजाम को दुरुस्त करने के लिए बड़े निवेश की जरूरत है.

चुनाव नतीजों के बाद होने वाले विश्लेषणों के अनुसार पीपल्स पार्टी की हार में बिजली के संकट ने अहम भूमिका निभाई है.

इस संकट की गंभीरता का एहसास आने वाली सरकार को भी है.

पीएमएल (एन) के वरिष्ठ नेता ख्वाजा साद रफीद कहते हैं, "हर आम शहरी की जिंदगी को लोडशेडिंग ने बुरी तरह प्रभावित किया है. पाकिस्तान मुस्लिम लीग (एन) की आने वाली सरकार के एजेंडे में यह सबसे ऊपर है. पिछले कुछ दिनों से नवाज शरीफ ने इससे निपटने के लिए एक टास्क फोर्स का भी गठन किया है."

सरकारी वादे अपनी जगह हैं लेकिन कई लोगों को गर्मी के इस मौसम में बिजली न होने की वजह से जग कर रातें काटनी पड़ रही हैं.

बच्चे न सिर्फ देर से स्कूल पहुंच रहे हैं, बल्कि स्कूल पहुंचने पर बिजली न होने की वजह से कक्षाओं में गर्मी झेलने को मजबूर हैं.

बच्चों की पढ़ाई पर असर

Image caption बिजली की किल्लत का असर बच्चों की पढ़ाई पर भी दिख रहा है.

राजधानी इस्लामाबाद के पास स्कूल में लगभग आठ घंटे बिजली नहीं आती है. अध्यापकों का कहना है कि इससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है.

इस स्कूल में पढ़ाने वाली उज्मा कहती हैं, "लोडशेंडिग हमारे लिए बहुत बड़ा मसला बन चुका है. क्योंकि बच्चों की जब नींद नहीं पूरी होती तो वे सुबह आलस्य के साथ आते हैं. लाइट नहीं रहती है तो वे अपने पढ़ाई पर ध्यान नहीं दे पाते. लाइट की दिक्कत की वजह से हम लोग भी अपने काम पर ठीक से ध्यान नहीं दे पाते."

दूसरी तरफ विश्लेषकों का कहना है कि 90 दिन में बिजली संकट को कम करने के लिए मुस्लिम लीग (एन) को तत्काल कदम उठाने होंगे.

वरिष्ठ पत्रकार एहतशामुल हक ने पाकिस्तान के बिजली संकट पर कहा, "फौरी तौर पर उनको यह करना होगा कि बिजली बनाने वाली कंपनियों इस वक्त बैठी हुई हैं. उनका कहना है कि हमको पैसा दीजिए, हम आपको बिजली बनाकर देंगे. नवाज शरीफ को आते ही यह करना होगा. यह सबसे ज्यादा जरूरी है कि अगर 18 घंटे की लोडशेडिंग तुरंत खत्म नहीं की गई तो मेरा ये अंदाजा है कि हालात अगले 20-25 रोज तक ऐसे ही रहने पर लोग सड़कों पर उतर सकते हैं."

चीनी प्रधानमंत्री का दौरा

Image caption ली कचियांग ने पाकिस्तान को मदद का भरोसा दिलाया है.

ऊर्जा संकट के चलते उद्योग धंधे भी चौपट हो रहे हैं. पाक स्टील मिल एक ऐसी ही फैक्टरी है जो बिजली के लिए जनरेटर इस्तेमाल करने को मजबूर है.

वहीं गैस की किल्लत को पूरा करने के लिए कोयले पर निर्भर है. इससे उनके उत्पादन पर आने वाली लागत दो गुनी हो गई है.

मिल के मालिक हसन फरीद का कहना है, "बिजली की उपलब्धता बहुत खराब है. कभी आ रही है, कभी जा रही है. यह पता नहीं है कि उत्पादन की योजना कैसे बनानी है. क्लाइंट के ऑर्डर कैसे पूरा करना है. बेहद मुश्किल हालात हैं."

भारत के बाद पाकिस्तान के दौरे पर पहुंचे चीनी प्रधानमंत्री को भी एहसास है कि उनका करीबी दोस्त पाकिस्तान किस कदर बिजली के संकट से गुजर रहा है.

चीनी प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में चीन और पाकिस्तान के बीच पारंपरिक दोस्ती का तो जिक्र किया ही, साथ ही पाकिस्तान को बिजली संकट से निपटने में मदद की पेशकश भी की.

उन्होंने कहा कि दोनों देशों को बिजली उत्पादन के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाना चाहिए.

बांधों का निर्माण

Image caption बिजली की कमी से निपटने के लिए बांधों के निर्माण की जरूरत है.

पाकिस्तान की मौजूदा अंतरिम सरकार में बिजली और पानी का महकमा देख रहे मंत्री मुसद्दिक मलिक बिजली के उत्पादन से जुड़ी बुनियादी समस्याओं की तरफ ध्यान दिलाते हैं.

उन्होंने कहा, "इस वक्त तकरीबन 23 फीसदी बिजली बनाने की हमारी क्षमता है जो हम नहीं बना पाते हैं, उसमें 17-18 फीसदी बिजली का मतलब तकरीबन 13 हजार मेगावट हुआ. इसके लिए हम सिर्फ तेल या गैस या पैसे मुहैया कराने की जरूरत है. फौरी तौर पर आज जो 10 हजार मेगावट बिजली आ रही है वह 12-13 हजार मेगावाट बिजली तक पहुंच जाएगी. इससे लोड शेडिंग 7-8 घंटे या एक सेफ जोन में रहेगी."

जानकार कहते हैं कि इस संकट की बड़ी वजह इच्छाशक्ति की कमी रही है.

आने वाली सरकार ने संकट से उबारने का भरोसा तो दिया है लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि बिजली की किल्लत से निपटने के लिए दीर्घकालीन योजना यही है कि बांधों पर राजनीति की बजाय उनके निर्माण की तरफ बढ़ा जाए.

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