घट रही है भारतीयों की 'धर्म में दिलचस्पी'

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Image caption सर्वे बताता है कि भारतीयों की धर्म में आस्था घट रही है

भारतीयों की धर्म में दिलचस्पी घट रही है. कई लोगों का भगवान में यक़ीन नहीं है और वो ख़ुद को धार्मिक नहीं मानते.

हालांकि ख़ुद को पूरी तरह नास्तिक कहने वालों की तादाद में गिरावट आई है. ग्लोबल इंडेक्स ऑफ़ रिलीजियॉसिटी एंड अथीज़्म की ताज़ा रिपोर्ट से ये जानकारी सामने आई है.

2005 में जहां भारत के 87 फ़ीसदी लोगों ने ख़ुद को धार्मिक बताया था, वहीं 2013 आते-आते इनका प्रतिशत 81 रह गया. सर्वे के मुताबिक़ 13 फ़ीसदी भारतीयों का कहना है कि वो धार्मिक नहीं हैं.

स्पष्ट है कि आस्तिकता में सात साल में छह फ़ीसदी की गिरावट आई है. दूसरी तरफ़ नास्तिकों की संख्या भी एक फीसदी तक नीचे आई है.

सात साल पहले चार फ़ीसदी भारतीय ख़ुद को नास्तिक मानते थे जबकि अब सिर्फ तीन फ़ीसदी ही ऐसा मानते हैं कि वो पक्के तौर पर नास्तिक हैं और किसी धर्म में उनका यक़ीन नहीं है.

विन गैलप इंटरनेशनल एसोसिएशन के सर्वे में ये आंकड़े सामने आए. भारत में सी-वोटर्स ने विन गैलप के लिए ये सर्वे किया और 1091 लोगों का साक्षात्कार लिया. इनमें सभी आयवर्ग, उम्र और धर्म को मानने वालों से सवाल पूछे गए थे.

पाकिस्तान में बढ़ी धार्मिकता

Image caption पाकिस्तान में मज़हब की तरफ झुकाव बढ़ा है- सर्वे

इस सर्वे में यह भी कहा गया है कि हिंदुस्तान के पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में हालात उलट हैं. वहां ख़ुद को धार्मिक मानने वालों की तादाद में छह फ़ीसदी तक का इज़ाफ़ा हुआ है.

2005 में 78 फ़ीसदी पाकिस्तानियों ने सर्वे के तहत खुद को मज़हबी बताया था. सात साल बाद आज 84 फ़ीसदी पाकिस्तानी खुद को धार्मिक कहते हैं.

हालांकि सर्वे बताता है कि इन्हीं सात साल में पाकिस्तान में एक फ़ीसदी के मुक़ाबले आज दो फ़ीसदी आबादी ख़ुद को नास्तिक मानती है.

चीन में सबसे ज़्यादा नास्तिक

Image caption चीन अकेला देश है जहां करीब आधी आबादी नास्तिक है-सर्वे

हिंदुस्तान का पड़ोसी देश चीन दुनिया के नक़्शे पर ऐसा मुल्क बनकर उभरा, जहां सबसे ज़्यादा नास्तिक रहते हैं. जहां की करीब आधी आबादी ने ख़ुद को नास्तिक बताया.

जबकि इस मामले में बाक़ी दुनिया का औसत 13 फ़ीसदी पाया गया है.

इसमें शायद ताज्जुब नहीं होना चाहिए कि चीनी गणराज्य की 1949 में स्थापना के वक्त उसे सरकारी तौर पर नास्तिक देश घोषित किया गया था. 1967 से 1977 के बीच ज़्यादातर मंदिर और धार्मिक चीज़ें नष्ट कर दी गईं थीं.

हालांकि 1980 के दशक के दौरान बौद्ध और ताओ मंदिरों को फिर खड़ा करने का अभियान चलाया गया. हाल के कुछ वर्षों में सरकार ने बौद्ध और ताओ धर्मों को देश की सांस्कृतिक धरोहर का हिस्सा मानना शुरू किया है.

सऊदी अरब में पांच फीसदी नास्तिक !

इसी सर्वे से एक और चौंकाने वाला नतीजा निकला है. इस्लामिक देश सऊदी अरब में पांच फ़ीसदी आबादी ने खुद को नास्तिक करार दिया. जबकि वहां ऐसा करना क़ानूनन जुर्म माना जाता है.

हालांकि इराक़ और अफ़ग़ानिस्तान में सिर्फ एक फ़ीसदी लोगों ने खुद को नास्तिक बताया है.

ताज्जुब की बात तो ये है ख़ुद पोप के गृहदेश अर्जेंटीना में आस्तिक लोगों में आठ फ़ीसदी तक गिरावट देखी गई है.

Image caption सऊदी अरब में नास्तिक होना जुर्म माना जाता है

सर्वे के मुताबिक दुनिया की 59 फ़ीसदी आबादी मानती है कि वो धार्मिक है, जबकि 23 फ़ीसदी का मानना है कि वो धार्मिक नहीं हैं. इसी सर्वे से ज़ाहिर होता है कि 13 फ़ीसदी लोग खुद को पक्के तौर पर नास्तिक मानते हैं.

क्या ग़रीबों का है धर्म?

सर्वे से एक रोचक तथ्य उजागर हुआ कि कम पैसा कमाने वाले लोगों में अभी भी धार्मिकता बची हुई है.

ऐसे लोग बाक़ी लोगों के मुकाबले 17 फ़ीसदी ज्यादा धार्मिक मिले. जिन देशों में समृद्धि बढ़ी है वहां धर्म के प्रति लोगों का झुकाव कम होता गया है.

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आस्तिकता में नौ फ़ीसदी गिरावट आई है तो नास्तिकता में तीन फ़ीसदी की बढ़ोतरी हुई है. सर्वे में यह स्पष्ट तौर पर निकलकर आया कि ख़ुद को धार्मिक कहने-मानने वालों का प्रतिशत बड़ी तेज़ी से घट रहा है.

विन गैलप के इस सर्वे में पांच महाद्वीपों के 57 देशों में कुल 51 हजार 927 लोगों से बात की गई.

हर देश में कम से कम एक हज़ार पुरुषों-महिलाओं से सवाल पूछे गए. रिलीजियॉसिटी एंड अथीज़्म इंडेक्स के तहत लोगों ने उनकी धार्मिक आस्था के बारे में बात की जाती है.

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