ऑस्ट्रेलिया है दुनिया का सबसे ख़ुश देश

Image caption खुश देशों की दौड़ में तीस से अधिक देश शामिल थे

ऑस्ट्रेलिया को तीसरी बार विकसित अर्थव्यवस्थाओं में सबसे खुश देश का दर्जा मिला है.

आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (ओईसीडी) की ओर से संकलित बेहतर जीवन सूचकांक में अर्थव्यवस्था की मजबूती की वजह से ऑस्ट्रेलिया ने इस सूची में पहला स्थान हासिल किया है.

इस सूची के पहले पांच देशों में स्वीडन, कनाडा, नॉर्वे और स्विट्ज़रलैंड के नाम शामिल हैं.

सर्वेक्षण में आय के स्तर, स्वास्थ्य, सुरक्षा और आवास के मापदंड पर 30 से अधिक देशों को परखा गया.

बेहतर प्रदर्शन

ओईसीडी ने अपनी वेबसाइट पर कहा है, ''सुख मापने के हर पैमाने पर ऑस्ट्रेलिया ने बेहतर प्रदर्शन किया, इसके अलावा बेहतर जीवन सूचकांक के अधिकांश विषयों में वह शीर्ष के देशों में शामिल है.''

ऑस्ट्रेलिया के 15 से 64 साल की आयु वर्ग के दो करोड़ तीस लाख लोगों में से 73 फ़ीसदी के पास नौकरी थी. यह ओईसीडी के औसत से भी अधिक है.

औसत आयु भी यहां अधिक थी, यह क़रीब 82 साल है.

ऑस्ट्रेलिया की प्राकृतिक संपदा की मांग की वजह से पिछले दो दशक से अधिक समय में उसकी अर्थव्यवस्था तेज़ी से विकसित हुई है.

ऑस्ट्रेलिया आर्थिक संकट को टालने में भी कामयाब रहा. साल 2009 में आई वैश्विक आर्थिक मंदी से बचने वाला यह प्रमुख विकसित देश था.

इस देश की आर्थिक ताक़त इसकी मुद्रा में दिखाई देती है, ऑस्ट्रेलियाई डॉलर आजकल पिछले 30 साल में सबसे अच्छा कारोबार कर रहा है.

हालांकि खनन क्षेत्र में आई तेजी के कमज़ोर पड़ जाने और बढ़ती बेरोजगारी की वजह से सरकार को चुनौती का सामना करना पड़ रहा है.

इस वजह से ऑस्ट्रेलिया की लेबर पार्टी की सरकार अब अर्थव्यवस्था की निर्भरता खनन क्षेत्र से हटाकर बुनियादी ढांचा निर्माण और उत्पादन की ओर करने पर विचार कर रही है.

इसके अलावा आमदनी में बढ़ता फासला भी ऑस्ट्रेलियाई सरकार के सामने एक चुनैती है. ओईसीडी के मुताबिक़ ऑस्ट्रेलिया की ऊपरी 20 फ़ीसदी आबादी की आय नीचे की 20 फीसदी आबादी की आय से छह गुना अधिक है.

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