विरोध दरकिनार कर रूस देगा सीरिया को मिसाइलें

Image caption 2007 में रूस ने सीरिया के साथ याखोंथ मिसाइलें भेजने का करार किया था.

रूस ने कहा है कि वो सीरिया को एस-300 विमानभेदी मिसाइलें भिजवाएगा ताकि वहां बाहरी देशों के दखल से बचा जा सके.

रूस के उप विदेश मंत्री सेरगई याबकोव ने कहा कि ये मिसाइलें एक तरीके से सीरिया में स्थिरता लाने का काम करेंगी और कुछ 'गर्म-मिज़ाज तत्वों' को वहां दखलअंदाज़ी करने से रोक सकेंगी.

रूस ने यूरोपीय संघ के उस हालिया फैसले की निंदा की है जिसमें सीरियाई विद्रोहियों को हथियार भेजने पर सहमति दी गई.

एस-300 एक बेहद सक्षम मिसाइल प्रणाली है जो विमान पर निशाना साधने के साथ-साथ मिसाइल प्रक्षेपित करने के भी काबिल है.

इसकी तुलना अमरीकी पेट्रियॉट प्रणाली से की जा सकती है जिसे नेटो ने तुर्की में रखा है ताकि सीरिया से किसी युद्ध की संभावना से बचा जा सके.

बीबीसी संवाददाता जिम म्यूर का कहना है कि रूस के इस फ़ैसले से सीरियाई संकट में एक नया मोड़ आ सकता है.

आमने-सामने

सोमवार को यूरोपीय संघ ने कहा कि उसके सदस्य देश सीरिया में हथियार भेजने को लेकर अपनी नीति खुद तय करेंगें जिसके बाद सीरिया पर लगे हथियार-प्रबंध की अवधि बढ़ा दी जाएगी.

लेकिन उसके कुछ ही घंटों बाद संघ ने कहा कि फ़िलहाल वे सीरिया में हथियार नहीं भिजवाएंगे.

( यूरोपीय संघ का बयान पढ़ने के लिए क्लिक करें)

यूरोपीय संघ की विदेश मामलों की समिति इस फैसले पर आगामी 1 अगस्त से पहले पुनर्विचार करेगी.

बीबीसी से बातचीत में ब्रिटेन के विदेश मंत्री विलियम हेग ने कहा कि 1 अगस्त कोई अंतिम तिथि नहीं है.

उन्होंने कहा कि अगर ब्रिटेन चाहे तो वो अभी से ही विद्रोहियों को हथियार भेज सकता है, लेकिन फ़िलहाल ऐसी कोई योजना नहीं है.

अमरीका ने भी यूरोपीय संघ के फ़ैसले का समर्थन किया है.

विश्लेषकों का मानना है कि इससे स्थिति बिगड़ सकती है क्योंकि यूरोपीय संघ और अमरीका एक तरफ हो जाएंगें और सीरिया का मित्र देश रूस दूसरी तरफ.

रूस ने कहा है कि इस फ़ैसले का असर अगले महीने अमरीका और रूस के बीच होने वाली बैठक पर पड़ेगा.

हथियार का करार

Image caption रूस लंबे समय से सीरियाई राष्ट्रपति बशर अल असद को किसी भी बाहरी दबाव से बचाने की कोशिश करता आ रहा है.

रूसी मीडिया ने विदेश मंत्री सरगेई लावरोव का बयान छापा जिसमें लिखा था, “बहुत से ऐसे फ़ैसले लिए जा रहे हैं जिनमें हमारे पश्चिमी मित्र देशों जैसे अमरीका और फ्रांस की सहमति भी है. ऐसे फ़ैसलों से अगले महीने होने वाले शांति सम्मेलन पर असर तो पड़ेगा ही.”

रूस लंबे समय से सीरियाई राष्ट्रपति बशर अल असद को किसी भी बाहरी दबाव से बचाने की कोशिश करता आ रहा है.

रूस ने अपने फ़ैसले का बचाव करते हुए कहा कि एस-300 मिसाइल भेजने का करार सीरिया और रूस के बीच कई सालों पहले हुआ था.

उप विदेश मंत्री सरगेई याबकोव ने अप्रत्यक्ष रूप से लीबिया में नेटो के लड़ाकू विमानों के इस्तेमाल की ओर इशारा करते हुए कहा, “हमें लगता है कि ये फ़ैसला सीरिया में स्थिरता लाने का काम करेगा और बाहरी ताकतों की दखलअंदाज़ी से सीरिया को बचाएगा.”

रूस का ये फैसला ऐसे समय में आया है जब पश्चिमी सीरिया में इस महीने करीब 200 लोगों के मारे जाने की खबर है.

संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक 2011 में जब से सीरिया में गृह युद्ध शुरू हुआ है, तब से वहां 80,000 से ज़्यादा लोग मारे जा चुके हैं, जबकि 15 लाख लोग देश छोड़ कर जा चुके हैं.

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