ईरानः आठ सालों में महमूद अहमदीनेजाद ने क्या पाया?

ईरान में 14 जून को अगले राष्ट्रपति का चुनाव होना है और इसके साथ ही महीने के अंत तक मौजूदा राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद अपने पद से हट जाएंगे.

उनकी हालिया घाना यात्रा में हमें अहमदीनेजाद को करीब से देखने और उनके आठ साल लम्बे कार्यकाल के मूल्यांकन का मौका मिला.

घाना की राजधानी एक्ररा स्थित हवाईअड्डे की सड़क पर चलते हुए महमूद अहमदीनेजाद नाखुश दिख रहे थे.

घाना पहुँचते ही उन्होंने अपने कर्तव्य का पालन करते हुए गार्ड आफ ऑनर का निरीक्षण किया. ईरान और घाना के राष्ट्रीय गान को सुना.

घाना के राष्ट्रपति जॉन महामा अहमदीनेजाद को हवाईअड्डे की टर्मिनल बिल्डिंग की तरफ ले कर जाने लगे.

तभी अहमदीनेजाद ने अपने हाथों को हवा में गोल-गोल घुमाया. वो वहाँ उपस्थित जनता से हाथ मिलाना चाहते थे.

इसके बाद अहमदीनेजाद हवाईअड्डे से निकलने लगे. तभी सफेद टी शर्ट पहने हुए दर्जनों छात्र उन्हें हलो कहने के लिए उनकी तरफ बढ़े.

अहमदीनेजाद उन्हें देख कर मुस्कराए. लोगों की भीड़ से ज्यादा खुशी उन्हें किसी और चीज से नहीं मिलती.

जनता के चहेते

एक्ररा में मंच पर बैठे ईरानी राष्ट्रपति पिछले आठ सालों में बनाई अपनी छवि की आनन्द ले रहे थे.

एक घाना निवासी जोर-जोर से चिल्ला रहा था, ''हम आप को चाहते हैं, हम आपको चाहते हैं, हम आपको चाहते हैं.''

अहमदीनेजाद पुराने ईरानी राष्ट्रपतियों से काफी अलग रहे हैं.

वो सस्ती सी जैकेट पहनते रहे. बेतरतीब दाढ़ी रखते रहे. इन चीजों ने ईरानी मध्यवर्ग को उनके सामने झुका दिया.

अहमदीनेजाद यही चाहते भी थे. वो किसानों और टैक्सी चालकों जैसे कामगार वर्ग के मामूली लोगों का समर्थन चाहते थे.

और अधिक शक्ति की चाहत

लेकिन ईरान के परमाणु कार्यक्रम का तीखा विरोध हुआ. पश्चिमी देशों और संयुक्त राष्ट्र ने ईरान पर कई तरह के प्रतिबंध लगा दिए.

अहमदीनेजाद इन प्रतिबंधों से डरे नहीं. जितना विरोध हुआ, उन्होंने उतना उन्हें भड़काया. और उतना ही उनका कद बढ़ता गया.

पिछले तीन दशकों में ईरान से सबसे ज्यादा जुड़े रहने वाले पूर्व अमरीकी राजदूत राइअन क्रोकर कहते हैं, ''मुझे पूरा विश्वास है कि हमने अहमदीनेजाद को जरूरत से ज्यादा गंभीरता से लिया.''

उन्होंने कहा, ''अहमदीनेजाद को भड़कना पसंद है. सभ्य समाज के हर कोने से होने वाले हमले को वो पसंद करते हैं. लेकिन मुझे लगता है कि ईरान संबंधी नीतियों के संदर्भ में इस बात से ज्यादा फर्क नहीं पड़ता.''

क्योंकि ईरान में राष्ट्रपति की नहीं चलती. इस इस्लामिक गणतंत्र में सबसे बड़े नेता आयतुल्लाह ख़ुमैनी की ही चलती है.

अपने पहले कार्यकाल में अहमदीनेजाद ने तय कर लिया था कि वो ईरान के मौलवियों का विरोध नहीं कर सकते.

क्योंकि उन्हें सत्ता दिलाने में मौलवी वर्ग काफी मददगार रहा था. लेकिन वो पश्चिम के खिलाफ विरोध कर सकते थे.

परमाणु कार्यक्रम

राष्ट्रपति पद ग्रहण करने के अगले ही दिन उन्होंने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को फिर से शुरू कर दिया.

ईरान के परमाणु वार्ता दल के सदस्य रहे हुसैन मुसावियान उस दौर को याद करते हुए कहते हैं, ''उन्हें बिल्कुल डर नहीं था. बिल्कुल भी नहीं.''

वह आगे कहते हैं, ''वो बोले, हम शुरू करेंगे और वे (पश्चिमी देश) कुछ नहीं कर पाएंगे. मैं तो हतप्रभ था. वो या तो बहुत बहादुर थे या अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक समीकरणों एवं संबंधों से बिल्कुल अनभिज्ञ थे. ईरान के परमाणु कार्यक्रम के बारे में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की राय की वो जरा भी परवाह नहीं करते थे.''

सर्वोच्च सत्ता के अभाव में अहमदीनेजाद को अपनी छवि बनाने के लिए कुछ नए तरीके चाहिए थे.

उनकी सबसे भरोसेमंद रणनीति अमरीका को भड़काने या संघर्ष करने की थी.

साल 2006 में उन्होंने अमरीका के राष्ट्रपति जार्ज डब्ल्यू बुश को 18 पन्ने का खत लिखा.

अमरीका के साथ रिश्ते

राष्ट्रपति बुश के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रहे स्टीव हेडली बताते हैं, ''जहां तक मुझे याद है यह एक उलझा हुआ खत था. और जब इस खत का जवाब देने की बारी आई तो हमारे सामने सबसे बड़ी मुश्किल यह थी कि हम जवाब क्या दें."

हेडली ने बताया, ''क्या आप सचमुच एक ऐसे नेता के खत के आत्मा की आवाज वाले खत का जवाब देना चाहेंगे जिसकी बनाई नीतियां उस क्षेत्र की शांति और स्थायित्व के लिए नुकसानदेह हों और हर किसी को पता हो कि उसके देश में आखिरी फैसला उस देश का सर्वोच्च नेता लेता है?''

उस खत को कोई जवाब नहीं दिया गया.

अहमदीनेजाद को घरेलू तौर पर और भी ज्यादा मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा था.

2009 के विवादित चुनावों के बाद उन्होंने अपने सर्वोच्च नेता को दरकिनार करने का निर्णय लिया.

वो अपने और अपने सहयोगियों के लिए और ज्यादा ताकत चाहते थे.

सुधारवादियों के साथ

पूर्व सुधारवादी प्रत्याशी तागी करौबी के पुत्र कहते हैं, ''ईरान के सर्वोच्च नेता के वफादारों की नजर में अहमदीनेजाद अब वो आदमी नहीं रहे जो तेहरान का मेयर बना था और बाद में ईरान का राष्ट्रपति बना था.''

उन्होंने कहा, ''जहां तक मुझे पता है अहमदीनेजाद ने पिछले चार सालों में जनता पर अत्याचार करने वाली हर नीति से दूरी बनाने की कोशिश की.''

वह कहते हैं, ''हमें कहा गया कि अहमदीनेजाद ने सर्वोच्च नेता को खत लिखकर राजनीतिक बंदियों को जेल से आजाद करने और अपने घर में नजरबंद विपक्षी नेताओं पर से नजरबंदी हटाने की मांग की थी. मुझे नहीं पता कि ये खबर सच है या झूठ ?''

कुछ लोगों के लिए यह बहुत सीधी बात लगती है कि अगर अहमदीनेजाद मौलवियों के साथ नहीं हैं तो वो सुधारवादियों के साथ हैं. लेकिन कुछ अन्य लोगों के अनुसार ऐसा समझना सही नहीं होगा.

राइअर क्रोकर कहते हैं, ''मैं एक क्षण के लिए यह नहीं मान सकता कि अहमदीनेजाद कट्टर मौलवियों के सामने मजबूती से डटे हुए गुप्त सुधारवादी हैं.''

अंतरिक्ष कार्यक्रम

अहमदीनेजाद कड़ी मेहनत से बनाई गई अपनी छवि का मजा ले रहे हैं. लेकिन आखिरकार उनके पास लोगों को दिखाने के लिए क्या है ?''

बीबीसी संवाददाता ने ईरानी राष्ट्रपति से घाना में पूछा, ''आप ने पश्चिम से लड़ाई लड़ी, अपने सर्वोच्च नेता से लड़ाई लड़ी, लेकिन इससे आपको क्या मिला ?''

अहमदीनेजाद का जवाब था, '' ईरानी जनता पर लादे गए तमाम अन्यायपूर्ण दबावों के बावजूद हम तेजी से विकास कर रहे हैं. जब हम पर प्रतिबंध लगाए गए उसके बाद हम परमाणु ऊर्जा संपन्न देश बने. अब हम परमाणु ऊर्जा का शांतिपूर्ण उपयोग कर रहे हैं''

''हम पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद हम अंतरिक्ष में अपना उपग्रह स्थापित करने वाले देश बने. दबावों ने हमारे लिए समस्या पैदा की लेकिन वो हमारा विकास रोकने में असफल रहे.''

अपने आठ साल के कार्यकाल में अहमदीनेजाद लोकप्रिय भी रहे और आम जनता के आदमी भी बने रहे. उन्होंने पश्चिमी देशों और ईरानी मौलवियों दोनों को भड़काया लेकिन किसी से जीत नहीं सके.'

इस साल की शुरुआत में उन्होंने इशारा किया था कि वो अंतरिक्ष में जाने वाले पहले ईरानी बनना चाहते हैं. लेकिन यहां धरती पर वो अपनी सबसे प्यारी चीज, अपनी गद्दी खो चुके हैं.

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